आदिम जाति कल्याण विभाग Traivel

आदिम जाति कल्याण विभाग

वन अधिकारों की मान्यता

अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 के

तहत काबिज वन भूमि के उपयोग के अधिकारों को मान्यता दिया जाना

अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 के तहत जीविका की वास्तविक आवश्यकताओं के लिये वनों या वन भूमि पर निर्भर अनूसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासियों के वन भूमि के व्यक्तिगत एवं सामुदायिक अधिकारों को मान्यता प्रदान करना।

वन भूमि के दावों को प्राप्त करना एवं उनका ग्राम सभा, उपखण्ड स्तर जिला स्तरीय समितियों द्वारा निराकरण कर दावाकर्ताओं को हक प्रमाण पत्र (वन अधिकार पत्र) दिया जाना। वन भूमि पर काबिज दावेदार अपना दावा ग्राम सभा / ग्राम पंचायत में प्रस्तुत करेगा, ग्राम सभा आवेदन पत्र को पंजीबद्ध कर पावती दावेदार को देगी।

ग्राम सभा / ग्राम पंचायत दावा आवेदन सम्बन्धित वन अधिकार समिति को सत्यापन हेतु प्रेषित करेगी। वन अधिकार समिति सत्यापन पश्चात अनुसूचित जन जाति वर्ग के लिए 13.12.2005 के पूर्व से तथा 31.12.2007 की स्थिति में वन भूमि पर काबिज होने पर वन अधिकार हक प्रमाण पत्र प्राप्त करने की पात्रता होगी।

अन्य परम्परागत वन निवासियों के लिए 13.12.2005 के पूर्व तीन पीढ़ी से वन भूमि पर काबिज होने पर वन अधिकार हक प्रमाण पत्र प्राप्त करने की पात्रता होगी।

मुख्यमंत्री मदद योजना 1. इस योजना के तहत अनुसूचित जनजाति परिवार में बच्चे के जन्म तथा परिवार के सदस्य की मृत्यु पर राशन सम्बंधित सहायता प्रदान की जाएगी।

  1. अनुसूचित जनजाति परिवार में लड़के अथवा लड़की के जन्म पर परिवार को 50 किलो ग्राम गेहूं एवं चावल तथा खाना बनाने हेतु पंचायत स्तर से बर्तन भी दिए जायेंगे। 3. मृत्यु होने पर परिवार को 1 क्विंटल गेहूं या चावल दिए जायेंगे।

  1. कुल चिन्हित जिले 20 (आदिवासी जिले ) जिसमे से 6 आदिवासी जिलो में चावल प्रदान किये जाने का प्रावधान है. आदिवासी जिले मण्डला, डिण्डोरी, बालाघाट, शहडोल, अनुपपुर एवं उमरिया है।
  2. अन्य शेष 14 जिलो में गेहूँ प्रदान किये जाने का प्रावधान है, संबंधित 14 जिले-झाबुआ अलीराजपुर, बहवानी, रतलाम, होशंगाबाद, बैतूल सीधी सिवनी, छिंदवाडा, धार, खरगोन, खण्डवा, बुरहानपुर श्योपुर है।

लाभार्थी अनुसूचित जनजाति वर्ग से हो, परिवार का कोई सदस्य शासकीय सेवा (वर्ग 1, 2, 3) या उच्च श्रेणी के पद पर कार्यरत न हो, दंपत्ति का यह प्रथम या द्वितीय बच्चा हो. राज्य संख्या प्रणाली पर जन्म अथवा मृत्यु का पंजीयन हो पंजीयन के समय ही ग्राम पंचायत सचिव द्वारा इस योजना के लाभ हेतु चयन कर मदद रसीद प्रदस्य की जाती है।

इस मदद रसीद के आधार पर लाभार्थी उस ग्राम पंचायत से लिक उचित मूल्य की दुकान से अनाज प्राप्त कर सकता है। रानी दुर्गावती एवं शंकर शाह पुरस्कार योजना

  1. यह पुरस्कार वार्षिक है।
  2. अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्र/छात्राओं को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह पुरस्कार योजना संचालित की गई है।
  3. यह योजना प्रदेश के समस्त शासकीय / अशासकीय हाई स्कूल एवं उ. मा. वि. में अध्ययनरत अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्र/छात्राओं के लिए है। 4. प्रदेश के समस्त एवं उ. मा. वि. में अध्ययन करने वाले अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्र/छात्राओं को जो 10 वीं एवं 12 वीं बोर्ड परीक्षा में प्रदेश में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने

वाले छात्र शंकर शाह पुरस्कार एवं छात्राएं रानी दुर्गावती पुरस्कार की पात्र होगी। 5. यह राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर आने वाले तथा सांस्कृतिक, सामाजिक एवं खेलकूद गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र एवं छात्राओं के लिये होगा।

आदर्श ग्राम पंचायत पुरस्कार (साक्षरता के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने पर) अनुसूचित जनजाति के हितार्थ शैक्षणिक, परीक्षा परिणाम, ड्राप आउट, उपस्थिति तथा शाला में शत

प्रतिशत प्रवेश, सामाजिक उत्थान, आदर्श कार्य करने वाली पंचायत को पुरस्कार राशि रु. 25 हजार

दिये जाने का प्रावधान है। ग्राम पंचायतों द्वारा आवेदन पत्र जिला कार्यालय में प्रस्तुत करना होता है।

पंचायतों के कार्यों के मूल्यांकन कर प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की जाती है।

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