हितग्राही योजना इकाई लागत

सभी वर्ग के सीमान्त एवं लघु कृषक | • पशुपालक न्यूनतम 5 या इससे अधिक पशु की योजना स्वीकृत करा सकेगा तथा परियोजना

की अधिकतम सीमा राशि रू. 10.00 लाख तक होगी। • परियोजना लागत की 75% राशि बैंक ऋण के माध्यम से प्राप्त करनी होगी तथा शेष राशि की व्यवस्था मार्जिन मनी सहायता एवं हितग्राही का स्वयं के अंशदान के रूप में करनी होगी।

• इकाई लागत के 75 प्रतिशत पर या हितग्राही द्वारा बैंक से प्राप्त ऋण पर जो भी कम हो 5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से (अधिकतम रु. 25,000 प्रतिवर्ष) ब्याज की प्रतिपूर्ति 7 वर्षों तक विभाग द्वारा की जाएगी। 5 प्रतिशत से अधिक शेष ब्याज दर पर ब्याज की प्रतिपूर्ति हितग्राही को स्वयं करना होगी।

मार्जिन मनी सहायता

• सामान्य वर्ग हेतु परियोजना लागत का 25 प्रतिशत, अधिकतम रु. 1.50 लाख • अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति हेतु परियोजना लागत का 33 प्रतिशत, अधिकतम रू. 2.00 लाख। संबंधित जिले के निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी / उपसंचालक पशु चिकित्सा

संपर्क

  1. छोटे पशुओं एवं कुक्कुट का उत्प्रेरण

(5.1) अनुदान के आधार पर नर बकरा प्रदाय योजना

उदेश्य → देशी / स्थानीय बकरियों की नस्ल में सुधार लाना ।

योजना

• इस योजना में सभी वर्ग के बकरी पालक को उन्नत नस्ल का एक नर बकरा अनुदान के आधार पर प्रदाय करने का प्रावधान योजना प्रदेश के सभी जिलों में क्रियान्वित।

हितग्राही

सभी वर्ग के बकरी पालक । एक उन्नत नस्ल का नर बकरा ।

योजना इकाई इकाई लागत

रूपये 8300=00 (बकरे का मूल्य 7500.00, बीमा राशि 3.75 प्रतिशत एक वर्ष हेतु रु.206.00 मिनरल मिक्सचर रु. 394.00 एवं प्रशिक्षण बुकलेट व मॉनिटरिंग कार्ड हेतु 200.00 ) सभी वर्ग के लिए 80 प्रतिशत एवं हितग्राही अंश 20 प्रतिशत ।

अनुदान संपर्क

संबंधित जिले के निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी / उपसंचालक पशु चिकित्सा । (5.2) अनुदान के आधार पर वराह (नर सूकर) प्रदाय

(योजना केवल अनुसूचित जाति के हितग्राहियों के लिए)

उद्देश्य

● देशी / स्थानीय सूकरों की नस्ल में सुधार लाना ।

योजना

• इस योजना में केवल अनुसूचित जाति के सूकर पालक को उन्नत नस्ल का एक वराह (नर सूकर) अनुदान के आधार पर प्रदाय करने का प्रावधान योजना प्रदेश के अनुसूचित जाति बाहुल्य जिलों में क्रियान्वित ।

हितग्राही

अनुसूचित जाति के वराह (सूकर) पालक ।

एक उन्नत नस्ल का प्रजनन योग्य नर वराह (नर सूकर ) ।

योजना इकाई इकाई लागत अनुदान

रूपये 5000.00

अनुसूचति जाति के सूकर पालकों के लिये 75 प्रतिशत अनुदान के आधार पर। संपर्क संबंधित जिले के निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी / उपसंचालक पशु चिकित्सा ।

(5.3) अनुदान के आधार पर वराह त्रयी (सूकर त्रयी) का प्रदाय (योजना केवल अनुसूचित जनजाति के हितग्राहियों के लिए)

उद्देश्य

→ देशी / स्थानीय वराह (सूकर) की नस्ल में सुधार लाना।

योजना

  • इस योजना मे केवल अनुसूचित जन जाति के वराह पालक को उन्नत नस्ल का एक नर वराह

एवं दो मादा वराह अनुदान के आधार पर प्रदाय करने का प्रावधान। ● योजना प्रदेश के अनुसूचित जन जाति बाहुल्य जिलों में क्रियान्वित

हितग्राही योजना इकाई इकाई लागत

अनुसूचित जन जाति के बराह पालक एक उन्नत नस्ल का प्रजनन योग्य नर बराह दो उन्नत नस्ल की मादा वराह

रुपये 1500000.

अनुदान संपर्क

अनुसूचित जन जाति के सूकर पालकों को 75 प्रतिशत अनुदान के आधार पर। संबंधित जिले के निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी/उपसंचालक पशु चिकित्सा । (5.4) बैंक ऋण एवं अनुदान पर (10+1) बकरी इकाई का प्रदाय

उद्देश्य

(योजना सभी वर्ग के लिए) ● देशी बकरियों में नस्ल सुधार लाना हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना ।

  • मांस तथा दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करना।

योजना

• योजना सभी वर्ग के भूमिहीन, कृषि मजदूर, सीमान्त एवं लघु कृषकों के लिये। ● हितग्राही को बकरी पालन का अनुभव हो।

हितग्राही सभी वर्ग के भूमिहीन, कृषि मजदूर, सीमान्त एवं लघु कृषकों के लिये ।

योजना

इकाई

लागत

क्र

1

2

विवरण

देशी स्थानीय नस्ल की बकरी दर 6000/- प्रति बकरी 1 जमुनापारी / बारबरी / सिरोही बीटल बकरा

3

4

बीमा राशि 10.35% के दर से 5 वर्ष के लिये बकरी आहार 3 माह के लिये 250 ग्राम प्रतिदिन

| (10+1) बकरी इकाई

60000.00 7500.00

6986.00

2970.00

रू. 12/- प्रतिकिलो योग

77456.00

प्रति इकाई

अनुदान अनुसूचित जनजाति / अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 50 प्रतिशत अनुदान रु. 38728/ सामान्य वर्ग के लिये 25 प्रतिशत अनुदान रु. 19364 / इकाई लागत का 10 प्रतिशत हितग्राही अंशदान, शेष बैंक ऋण।

संपर्क

संबंधित जिले के निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी / उपसंचालक पशु चिकित्सा । (5.5) बिना लिंग भेद के 28 दिवसीय 40 रंगीन चूजों की बैकयार्ड इकाई

(योजना केवल अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए)

उद्देश्य

• कुक्कुट पालन के माध्यम से हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति में सुधार । ★ यह योजना केवल अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के हितग्राहियों के लिये बिना लिंग भेद के 28 दिवसीय 40 चूजे, औषधि, परिवहन व्यय का प्रावधान योजना अनुसूचित जाति/जनजाति बाहुल्य जिलों में ही लागू।

योजना

हितग्राही

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कुक्कुट पालक । बिना लिंग भेद के 28 दिवसीय 40 रंगीन चूजे ।

28 दिवसीय 40 चूजों का मूल्य प्रति इकाई (प्रति चूजा रू45/-)

रू.180000

योजना इकाई इकाई लागत

औषधि / टीकाकरण रू 5 प्रति चूजा परिवहन (चिक बाक्स सहित )

रू.200-00

योग इकाई लागत

रू.225-00

रू.222500

अनुदान संपर्क

अनुसूचित जाति / जनजाति वर्ग के लिये 80 प्रतिशत हितग्राही अंश 20 प्रतिशत।

संबंधित जिले के निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी / उपसंचालक पशु चिकिस्ता

विशेष

प्रोजेक्ट प्रपोजल निर्माण के कुछ मूलभूत सिद्धांत

किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए पहले संस्थाओं द्वारा परियोजनाओं का प्रारूप बनाया जा है। कहते भी है कि किसी कार्य की सफलता उसके प्रोजेक्ट के निर्माण पर निर्भर करती है। प्रोजेक्ट के उद्देश्य, सिद्धांत और उसकी क्या अवधि निर्धारित की गई है, ऐसे प्रकल्पों को समाहित करके एक प्रभावी प्रोजेक्ट की कल्पना की जाती है। हर संस्था में किसी भी कार्य का प्रारंभिक कदम प्रोजेक्ट निर्माण से होता है। प्रोजेक्ट निर्माण में ही कार्य के सभी पहलुओं जैसे व्यय, संसाधन, जिम्मेदारियाँ, कार्य का स्वरूप, लाभ आदि को ध्यान में रखा जाता है। अलग-अलग सेक्टरों के अलग-अलग प्रोजेक्ट निर्माण होते हैं। इसकी आवश्यकता आज हर क्षेत्र में है। प्रोजेक्ट निर्माण की संरचना भी कठिन कार्य है। प्रोजेक्ट निर्माण के समय हर छोटे से छोटे पहलू को देखा जाता है। यह भी सही है कि कार्य की सफलता और प्रभावशीलता उसके प्रोजेक्ट पर निर्भर करती है। प्रोजेक्ट निर्माण ही वह विधा है जिसके बल पर कार्यों को लक्ष्यों तक पहुँचाया जाता है।

प्रोजेक्ट / परियोजना क्या है?

प्रोजेक्ट किसी विशिष्ट उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए निश्चित समय में की जाने वाली गतिविधियों का समूह है जिन्हें निश्चित मानव, वित्तिय एवं भौतिक संसाधनों के द्वारा किया जाना है। अतः प्रोजेक्ट का संबंध निम्न सभी बातों से है:

  1. विशिष्ट उद्देश्यों की प्राप्ति
  2. निश्चित समय सीमा
  3. विभिन्न गतिविधियों का समूह
  4. इन गतिविधियों के लिये विशिष्ट संसाधन मानव, वित्तीय व भौतिक

लक्ष्य एवं उद्देश्य –

किसी प्रोजेक्ट का निर्माण करते हुए सबसे महत्वपूर्ण चरण उसके उद्देश्य एवं लक्ष्यों को परिभाषित करना होता है। दोनों परिकल्पनाएं अधिकतर एक-दूसरे पर आश्रित है। किसी प्रोजेक्ट के उद्देश्यों का विशिष्टीकरण एवं लक्ष्य की स्पष्टता होना अति आवश्यक है और सम्पूर्ण प्रोजेक्ट के अंतर्गत किए जाने वाले कार्य इन्हीं उद्देश्यों की ओर प्रवाहमान होते हैं।

किसी प्रोजेक्ट का उद्देश्य वांछित परिस्थियों का सामान्य कथन होता है। इसी प्रकार लक्ष्य से आशय इच्छित परिस्थिति के विस्तृत कथन से है। लक्ष्य का तात्पर्य एक दीर्घकालीन दृष्टि

से है जैसे कि जीवन की गुणवत्ता सुधारना इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कई विशिष्ट उद्देश्य परिस्थिति को प्राप्त करने के कथन है जैसे किसी प्रस्फुटन ग्राम में लोगों की आमदनी बढ़ाकर दो गुना कर देना या गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाले लोगों की संख्या में निर्धारित अवधि में 10 प्रतिशत कमी लाना।

हम जो राशि अथवा प्रतिशत उद्देश्य की तरह निर्धारित करते हैं वह प्रोजेक्ट की गतिविधियों के सामान्य होने के बाद की विशिष्ट परिस्थिति होगी।

प्रोजेक्ट के उद्देश्यों को अंग्रेजी के SMART से समझा जा सकता है जिसका आशय है

Specific

: विशिष्ट

Measurable

मापन योग्य

Attainable प्राप्ति योग्य

Realistic

: वास्तविकता के अनुरूप

Time bound समयबद्ध

परियोजना प्रस्ताव बनाने के लिए सामान्य मार्गदर्शन :

  1. संस्था के बारे में सूचना

संस्था किस साल बनी ? क्या इसका ध्येय है? इसकी

रचना क्या है? कौन-कौन इसके सदस्य है? इसके संचालक कौन है? कब-कब इसकी भेंट होती है? इनके कौन से मूल क्षेत्र है? और एकत्र करने की इसकी कितनी क्षमता है?

  1. लक्ष्य विवरण :

संस्था के सिद्धांत व उद्देश्य क्या है। 3. परियोजनाएं पूरी/या अधूरी

संस्था ने जो परियोजनाएँ पूरी की हो उनके बारे में विवरण। इसके अतिरिक्त जो परियोजनाएं चल रही हैं, उनके बारे में बताना विशेषकर किन लोगों के फायदे के लिये और क्या फायदों के लिये ये परियोजनाएँ चल रही है और किन परिणामों की उम्मीद की जा सकती है।

परियोजना

परियोजना का किस विशेष आबादी के लिये फायदा होगा और ये कहाँ लागू की जायेगी। इसके अलावा क्या उस इलाके में और भी ऐसी परियोजनाएं चल रही है? इस बात का उल्लेख भी करें कि परियोजना को लागू करने के लिये किन समर्थकों (sponsor) की सेवायें प्राप्त है।

  1. मानव संसाधनों की आवश्यकता :

किन-किन कर्मियों की आवश्यकता है, कितने लोग संस्था की ओर से कितने लोग बाहर से इस परियोजना में कार्यरत होंगे। इन कर्मियों की जिम्मेदारियाँ और पदनामों का स्पष्ट उल्लेख करें।

  1. परियोजना का उद्देश्य :

संस्था के इस परियोजना को लेकर क्या-क्या उद्देश्य हैं और इनकी, समय के अंदर प्राप्ति के लिये क्या कोशिश की जानी है।

  1. परियोजना के लाभार्थी :

इस परियोजना के पूरे होने से कितने लोगों को प्रत्यक्ष/ अप्रत्यक्ष लाभ होगा।

  1. परियोजना लागू करने की रणनीति

संस्था की परियोजना को लागू करने की क्या रणनीति है इसको स्पष्ट रूप से बतायें ये भी विस्तारपूर्वक बतायें कि इसको लागू करने में अलग-अलग चरणों में क्या रणनीति होगी।

  1. परियोजना की मॉनिटरिंग :

संक्षेप में बतायें कि परियोजना को लागू करने के क्या उपाय किये जायेंगे और इसकी तरक्की जानने के लिये किस-किस समय पर समीक्षा की जायेगी और उसकी जिम्मेदारी किस पर होगी जहाँ भी जरूरी हो, समीक्षा के उपरांत सही कदम उठायें और इस काम में संस्था के कर्मचारी और बाहरी विशेषज्ञों की मदद भी ली जाये।

  1. परियोजना की अवधि:

परियोजना को पूरा करने के लिये और इसके अलग अलग चरणों में कितना समय लगेगा इसका विवरण दें।

  1. आयव्ययक (Budget) परियोजना के अंतर्गत अलग-अलग भागों के लिये कितना धन लगेगा और कितनी लागत आयेगी का ब्योरा देना चाहिए। इसके साथ ये दान कहाँ से आयेगा, और इसका खर्चा किस प्रकार होगा, कितना धन सत्या अपना लगायेगी और कितना धन बाहर से दान के रूप में एकत्र करेगी, इन सबका उल्लेख किया जाये।
  2. स्वयंसेवी संस्था का अपना धन

स्वयंसेवी संस्था ये बताये कि परियोजना को पूरा करने में वह अपना कितना धन लगायेगी।

  1. बाहरी दानकर्ताओं से धन की अपेक्षा :

संस्था के अनुसार कुल कितनी धनराशि की आवश्यकता होगी, इसकी सूचना परियोजना में जारी करें। साथ ही ये धन कहाँ-कहाँ से आयेगा संस्था से और बाहरी स्त्रोत से, इसका ब्योरा बजट में अलग-अलग दिया जाये।

  1. दानकर्ताओं का प्रचार

दानकर्ताओं की अपेक्षा होगी कि उनकी ओर से लोगों की भलाई के लिये उनके कार्य का उचित प्रचार हो, इसके लिये संस्था को चाहिए कि वे इस प्रकार के लिये कदम उठायें।

  1. परियोजना की समय रेखा

संस्था को चाहिए कि वह एक समय रेखा निर्धारित करे जिसके अंतर्गत ये पता लग सके कि किस कार्य को कितना समय लगेगा और किस समय ये परियोजना पूरी होगी।

● अगस्त 2010

1247

दी टंट्या भील स्व-रोजगार योजना अंतर्गत सेवा इकाई हेतु प्रस्तावित कार्य योजना

आवेदक का नाम:

आवेदक का पता

(1) सेवा / व्यवसाय का नाम व सामान्य परिचय- सरताज डब्ल्यूही परिचालन सेवा: यातायात के क्षेत्र में आधुनिक वाहनों की लोकप्रियता बढ़ी है, क्योंकि ये यातायात हेतु सुविधायुक्त होने से इनकी मांग अत्यधिक है। अतः आवागमन के क्षेत्र में इस सेवा व्यवसाय का भविष्य उज्जवल

है।

(2) सेवा / व्यवसाय प्रक्रिया (संदीप में)

परमिट वाले रूट पर यात्रियों को उनके इच्छित स्थान पर सुरक्षित पहुचा कर बदले में उपभोक्ता व्यापारियों की सेवा पूर्ण होने पर नियमानुसार निर्धारित किराया प्राप्त होगा।

(3) उत्पादन लक्ष्य (वार्षिक)

(4) भूमि भवन का विवरण:

(5) स्थायी सम्पत्ति :

(अ) मशीनरी एवं उपकरणों का विवरण: सरताज डब्ल्यूव्ही 26एस टीसी-3

योग:

13,44,000.00

वाहन रखने की सुव्यवस्था आवेदक के पास है ।

8,64,880.00 8,64,880.00

9,500.00

28.000.00

37,500.00

(ब) अन्य विविध परिसम्पत्तियाँ :

  1. रजिस्ट्रेशन
  2. इन्शोरेंस

योग :

कुल स्थायी विनियोजन राशि

: 9.02.380.00

(6) कच्चे माल की आवश्यकता (प्रतिमाह )

  1. डीजल

1000 ली.

  1. ऑयल

योगः

(7) कर्मचारियों / श्रमिकों को देय वेतन (प्रतिमाह )

प्रबंधक एवं कुशल चालक 1.

स्वय

65,000.00

10 लीटर

3,000.00

68,000.00

2.

कुशल चालक

1

4,500.00

योग :

4,500.00

(8) उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)

  1. विद्युत व्यय
  2. जल व्यय
  3. अन्य व्यय

योग

  1. मरम्मत एवं रखरखाव स्टेशनरी फोन पर व्यय

22,520.00

(9) विविध व्यय ( प्रतिमाह )

बीमा व्यय 3.

2.

600.00

5.

अन्य व्यय

2,000.00

योग

25,120.00

कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)

  1. कार्यस्थल का किराया कच्चे माल की लागत

2.

68,000.00

  1. कर्मचारियों / श्रमिकों को वेतन विविध व्यय

4

4,500.00

25.120.00

(11) इकाई में स्थायी पूँजी निवेश :

कुल कार्यशील पूंजी

97.620.00

स्थायी सम्पत्ति :

8,64,880,00

अ. मशीनरी उपकरणों की लागत ब. अन्य स्थाई परिसम्पत्तियों

37.500.00

97,620.00

2

कार्यशील पूंजी की लागत

कुल परियोजना लागत

(12) इकाई स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत : 1. बैंक से प्रस्तावित ऋण राशि

  1. शासन द्वारा मार्जिन मनी सहायता

योग :

(13) इकाई की वार्षिक उत्पादन लागत :

  1. मशीनरी उपकरण तथा स्थाई संपत्ति पर मूल्य हास

1.29,732.00

11,71.440.00

  1. कार्यशील पूंजी लागत
  2. प्रस्तावित बैंक ऋण पर ब्याज

84,000.00

13,85.172.00

(14) कुल वार्षिक विक्रय :

कुल उत्पादन लागत :

आदर्श अनुमानित प्राप्तियाँ

18,72,000.00

18,72,000.00

(15) इकाई की वार्षिक लाभप्रदत्ता : (वार्षिक)

योग :

प्राप्तियाँ

लागत

लाभप्रदत्ता

18,72,000.00

13,85,172.00

4,86,828.00

(16) लाभ का प्रतिशतः

35.14 प्रतिशत

आवेदक के हस्ताक्षर…

एवं नाम

प्रारूप कमांक दिखिये नियम 3) समितियों के पंजीयन हेतु ज्ञापन पत्र

(1)

संस्था का नाम मॉडल विलेज समिति नवाही ()

संस्था का कार्यालय (पूरा पता) जिला जबलपुर म.प्र. नवापोस्ट उमरिया बिरहा थाना मझौली तहसील मुझ

(3) संस्था के उद्देश्य :–

  1. युवक-युवतियो को विभिन्न कार्यों के साथ जोड़कर उनने चरित्र प्रतिमा एवं आत्मविश्वास विकसित करना तथा युकाओं में राष्ट्रीयता, धर्मनिरपेक्षता, सेवा तथा सहयोग का भाव विकसित करना ।
  2. ग्रामीण युवती / युवाओं को विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना।
  3. युवाशक्ति को गांव के विकास से जोडना और इस तरह राष्ट्रीय विकास के कार्यों से जोड़ना है।
  4. युवा-युवतियों को सरकार द्वारा चलायी जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना। 5. सामाजिक बुराईया जैसे दहेजप्रथा, छुआछूत नशावृति, बालविवाह आदि के विरूद्ध युवा वर्ग को तैयार करना।
  5. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के कार्यक्रम मे आम युवा/युवतियों को भागीदार बनाना। 7. विभिन्न कार्यक्रमो वर्क शाप, राष्ट्रीय एकता शिविर, सेमिनार, नुक्कड तथा गोठियों के माध्यम से लोगों में साक्षरता, पर्यावरण एंव प्रदुषण के प्रति जागृति लाना।
  6. महिला बाल विकास के द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर महिलाओं एवं बच्चों के सर्वांगीय विकास के लिए प्रोत्साहित करना।
  7. युवा / युवतियों के लिए आधुनिक व्यावसायिक शिक्षा के कार्यक्रमों का संचालन करना। 10. युवा / युवतियों का अपनी आत्मरक्षा के लिए शारीरिक तथा मानसिक प्रशिक्षण देना।
  8. मध्यप्रदेश व भारत सरकार के समाज कल्याण आदिमजाति कल्याण एवं सुरक्षा युवा कार्य एंव युवा कार्य एव

खेल विभाग द्वारा विशेष कार्यक्रमों के तहत युवा / युवतियों को लाभन्वित करना । 12. उपभोक्ता जागरूकता के शिविर प्रचार-प्रसार करना।

  1. युवाओं में राष्ट्रीय एकता, सामुदायिक विकास, आपसी सदभाव जैसे मूल्यों को विकास करना तथा उनके प्रचार- प्रसार में सहयोग देना एवं युवाओं में नेतृत्व मे गुण विकसित करना।
  2. शिक्षा के प्रचार-प्रसार हेतू विद्यालयों तथा महाविद्यालयो की स्थापना।
  3. गौ, पशु, पक्षी, संवर्धन, स्वास्थ्य उपचार हेतु गौशाला निर्माण करना। 16. बाल श्रम रोकने हेतू गतिविधियाँ चलाना जैसे विशेष विद्यालय चलाना तथा बालश्रम हेतु शासन के साथ मिलकर

प्रयास करना।

  1. भारत में उल्लेखित मूलभूत उद्देश्यों की पूर्ति हेतु शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना विद्यालयों की

स्थापना करना 1 18. एड्स शिक्षा, पल्स पोलियो, स्वास्थ्य रक्षण जैसी शासकीय जनकल्याणी योजनाओं का शासन के सहयोग से

कियान्वयन करना ।

(अध्यक्ष)

(कोषाध्यक्ष)

(सचिव)

समिति के प्रबंध विनियमो द्वारा समिति के कार्यों का प्रबंध शासन परिषद, संचालको सभा या शादी निकायों को सौंपा गया है। जिनके नाम तथा बंधो का उल्लेख निम्नलिखित है

नाम श्री धर्मेंद सिंह ठाकुर

1

आयक्ष पद

पधा व्यवसाय

2

श्री आकाश चंदौल

उपाध्यक्ष

ग्राम धनवाही पोस्ट उमारिया विरहा, थाना मझौली तहसील मझौली जिला जबलपुर

म.प्र.

ग्राम धनवाही पोस्ट

उमारिया द्विरहा थाना छात्र

| मझौली तहसील – मझौली जिला- जबलपुर स.प्र.

ग्राम धनवाही पोस्ट उमारिया, दिरहा, थाना मझौली तहसील – मझौली जिला- जबलपुर

छात्र

3

श्री देवेन्द्र सिंह ठाकुर

सचिव

4

श्री शैलेन्द्र कुमार दुबे

सहसचिव

म.प्र. ग्राम धनवाही पोस्ट उमारिया विरहा, थाना मझौली तहसील मझौली जिला- जबलपुर

कृषि

5

श्री हरिशंकर सेन

मप्र ग्राम धनवाही पोस्ट उमारिया द्विरहा, थाना मझौली तहसील – मझौली जिला जबलपुर

कोषाध्यक्ष

6

श्री पर्वत सिंह ठाकुर

म.प्र. ग्राम धनवाही पोस्ट उमारिया बिरहा. थाना मझौली तहसील मझौली जिला जबलपुर

व्यवसाय

मजदूरी

सदस्य

7

श्री अजीत कुमार दुबे

सदस्य

म.प्र. ग्राम धनवाही पोस्ट उमारिया द्विरहा, थाना मझौली तहसील मझौली जिला जबलपुर

कृषि

म.प्र. ग्राम धनवाही पोस्ट उमारिया द्विरहा, थाना मझौली तहसील मझौली जिला- जबलपुर

मजदूरी

श्री धर्मेंद्र परधान

सदस्य

म.प्र. ग्राम सिग्लदीप पोस्ट इन्द्राना थाना पनागर,

9

श्री वीरेन्द्र पटेल

सरक्षक

10.

श्री संतोष कुमार

संरक्षक

व्यास

कृषि

तहसील पनागर जिला- जबलपुर म.प्र. ग्राम धनवाही पोस्ट उमारिया द्विरहा, थाना मझौली तहसील – मझौली जिला जबलपुर

व्यवसाय

म.प्र.

(अध्यक्ष)

(कोषाध्यक्ष)

(सचिव)

5.समिति के इन पत्र के साथ विनियमो को एक प्रमाणित प्रति जैसा कि म.प्र. सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973 (1973 का 44) की धारा-6 की उपधारा (1) के अधीन अपेक्षित है संलग्न

हम अनेक व्यक्ति जिनके नाम और पते नीचे लिखे हैं समिति का निमार्ण उपरोक्त ज्ञापन पत्र के अनुसार करने के इच्छुक है। तथा ज्ञापन पत्र पर निम्नलिखित साक्षियों की उपस्थित में हस्ताक्षर किए गए है

नाम श्री धर्मेद्र सिंह श्री ताकुर

1

हस्ताक्षर

ठाकुर पिता का नाम लाखन

2

श्री देवेन्द्र सिंह ठाकुर

श्री शैलेन्द्र कुमार दुबे

5

पता सिंह ग्राम पनवाही पोस्ट उमारिया विरहा

थाना मझौली तहसील मझौली

श्री आकाश चंद्र श्री दीपक चंदोल

जिला जबलपुर म.प्र ग्राम धनवाही पोस्ट उमारियां दिरहा,

थाना मझौली तहसील मझौली जिला- जबलपुर म.प्र

श्री कप्तान सिंह ठाकुर

ग्राम धनवाही पोस्ट उमारिया द्विरहा, थाना मझौली तहसील मझौली जिला जबलपुर म.प्र

श्री सुरेश कुमार दुबे

ग्राम धनवाही पोस्ट उमारिया द्विरहा, थाना मझौली तहसील मझौली

जिला जबलपुर म.प्र.

श्री हरिशंकर सेन

श्री सरजू प्रसाद सेन

ग्राम धनवाही पोस्ट उमारिया द्विरहा, थाना मझौली तहसील मझौली

जिला- जबलपुर म.प्र. ग्राम धनवाही पोस्ट उमारिया विरहा. थाना मझौली तहसील मझौली

श्री पर्वत सिंह ठाकुर

श्री बहादुर सिंह ठाकुर

जिला- जबलपुर म.प्र. ग्राम धनवाही पोस्ट उमारिया दिरहा,

श्री अजीत कुमार

श्री इन्द्रपति दुबे

थाना मझौली तहसील मझौली

जिला जबलपुर म.प्र. ग्राम धनवाही पोस्ट उमारिया ढिरहा,

8

श्री धर्मेंद्र परधान

श्री रामनाथ परधान

थाना मझौली तहसील मझौली जिला- जबलपुर म.प्र. ग्राम सिग्लदीप पोस्ट इन्द्राना थाना

श्री वीरेन्द्र पटेल

श्री सीताराम पटेल

पनागर, तहसील

पनागर, जिला

जबलपुर म.प्र.

10 श्री संतोष कुमार व्यास

श्री रामलखन व्यास

ग्राम धनवाही पोस्ट उमारिया दिरहा, थाना मझौली तहसील: मझौली जिला- जबलपुर म.प्र.

-: साक्षीगण :

नाम

हस्ता.

पता

(अध्यक्ष)

(कोषाध्यक्ष)

(सचिव)

नियमावली :

04

(1) संस्था का नाम मॉडल विलेज समिति धनवाही संस्था का कार्यालय (पूरा पता)

(2)

ग्राम धनवाही पोस्ट उमरिया बिरहा थाना मझौली तहसील

मझौली जबलपुर (म.प्र.)

(3) कार्यक्षेत्र :- माय प्रदेश

(4) संस्था के उद्देश्य

  1. युवक युवतियों को विभिन्न कार्यों के साथ जोडकर उनमें चरित्र प्रतिभा एवं आत्मविश्वास विकसित करना

तथा युकाओ मे राष्ट्रीयता, धर्मनिरपेक्षता, सेवा तथा सहयोग का भाव विकसित करना । 2. ग्रामीण युवती / युवाओं को विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोडना ।

  1. युवाशक्ति को गांव के विकास से जोडना और इस तरह राष्ट्रीय विकास के कार्यों से जोड़ना है।
  2. युवा-युवतियों को सरकार द्वारा चलायी जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना। 5. सामाजिक बुराईया जैसे दहेजप्रथा छुआछुत नशावृति, बालविवाह आदि के विरूद्ध युवा वर्ग को तैयार करना।
  3. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के कार्यक्रम मे आम युवा युवतियों को भागीदार बनाना। 7. विभिन्न कार्यक्रमो वर्क शाप राष्ट्रीय एकता शिविर सेमिनार, नुक्कड तथा गोटियों के माध्यम से लोगो

साक्षरता, पर्यावरण एवं प्रदुषण के प्रति जागृति लाना।

में

8 महिला बाल विकास के द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर महिलाओं एवं बच्चों

के सर्वागीय विकास के लिए प्रोत्साहित करना।

  1. युवा / युवतियों के लिए आधुनिक व्यावसायिक शिक्षा के कार्यक्रमों का संचालन करना । 10 युवा/युवतियों का अपनी आत्मरक्षा के लिए शारीरिक तथा मानसिक प्रशिक्षण देना।
  2. मध्यप्रदेश व भारत सरकार के समाज कल्याण, आदिमजाति कल्याण एवं सुरक्षा युवा कार्य एंव युवा कार्य एव

खेल विभाग द्वारा विशेष कार्यक्रमों के तहत युवा / युवतियों को लाभन्वित करना। 12 उपभोक्ता जागरूकता के शिविर प्रचार-प्रसार करना।

  1. युवाओं मे राष्ट्रीय एकता, सामुदायिक विकास, आपसी सदभाव जैसे मूल्यों को विकास करना तथा उनके

प्रचार-प्रसार में सहयोग देना एवं युवाओं में नेतृत्व मे गुण विकसित करना।

  1. शिक्षा के प्रचार-प्रसार हेतू विद्यालयो तथा महाविद्यालयों की स्थापना ।
  2. गौ पशु पक्षी, संवर्धन, स्वास्थ्य उपचार हेतु गौशाला निर्माण करना।
  3. बाल श्रम रोकने हेतू गतिविधियों चलाना जैसे विशेष विद्यालय चलाना तथा बालश्रम हेतु शासन के साथ मिलकर प्रयास करना।
  4. भारत में उल्लेखित मूलभूत उद्देश्यों की पूर्ति हेतु शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना विद्यालयों की स्थापना करना ।
  5. एड्स शिक्षा, पल्स पोलियो, स्वास्थ्य रक्षण जैसी शासकीय जनकल्याणी योजनाओं का शासन के सहयोग से

कियान्वयन करना |

(अध्यक्ष)

(सचिव)

संस्था के निम्नलिखित श्रेणी के सदस्य होंगे –

(क) साधारण सदस्य :- जो व्यक्ति 40/- रूपये प्रतिमाह तथा 480/- रूपये प्रतिवर्ष संस्था की चंदे के रूप में देगा यह साधारण सदस्य होगा केवल उसी अवधि के लिये सदस्य होगा जिसके लिये उसने चंदा दिया है. जो साधारण सदस्य बिना संतोशजनक कारणों के छः माह तक देय चंदा नहीं होगा उसकी सदस्यता समाप्त हो जावेगी। ऐसे सदस्य द्वारा संस्था के लिये नया आवेदन पत्र देने तथा बकाया चंदे की राशि पर पुनः सदस्य बनाया जा सकता है।

(ख) सम्मानीय सदस्य :- संस्था की कार्यकारिणी किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को उस समय के लिये जो भी वह उचित समझे सम्मानित सदस्य बना सकती है. ऐसे सदस्य साधारण सभी की बैठक में भाग ले सकते हैं, परंतु उनको मत देने का अधिकार न होगा।

  1. सदस्यता की प्राप्ति :- प्रति व्यक्ति जो कि समिति का सदस्य या बनने का इच्छुक हो उसे लिखित रूप से आवेदन करना होगा। ऐसा आवेदन पत्र कार्यकारिणी समिति को प्रस्तुत होगा। जिसे आवेदन पत्र को स्वीकार करने या अमान्य करने का अधिकार होगा।
  2. सदस्यों की योग्यता :- संस्था का सदस्य बनने के लिये किसी भी व्यक्ति में निम्नलिखित योग्यता होना

आवश्यक है।

  1. आयु 15 वर्श से कम तथा 45 वर्श से अधिक न हो।

भारतीय नागरिक हो।

3 समिति के नियमों के पालन की प्रतिज्ञा की हो। सचरित्र हो तथा मद्यपान न करता हो।

  1. सदस्यता की समाप्ति : संस्था की सदस्यता निम्नलिखित स्थिति में समाप्त हो जायेगी। (1) मृत्यु हो जाने पर (2) पागल हो जाने पर (3) संस्था को देय चंदे की रकम नियम-5 में बताये अनुसार जमा न करने पर (4) त्यागपत्र देने और वह स्वीकार होने पर (5) चारित्रिक दोश होने पर और कार्यकारिणी समिति के निर्णयानुसार निकाल दिये जाने पर जिसके निर्णय पारित होने की सूचना सदस्य को लिखित रूप में देनी होगी।
  2. संस्था कार्यालय में सदस्य पंजी रखी जावेगी जिसमें निम्न व्यौरे दर्ज किये जायेंगे:- (1) प्रत्येक सदस्य का नाम, पता तथा व्यवसाय (2) वह तारीख जिसमें सदस्यों को प्रवेश दिया गया हो व रसीद नंबर (3) वह तारीख जिसमें सदस्यता समाप्त हुई हो (4) सदस्यों के हस्ताक्षर दिनांक ।।
  3. (अ) साधारण सभा :- साधारण सभा में नियम-5 में दर्शाये श्रेणी के सदस्य समावेषित होंगे सभा की बैठक आव यकतानुसार हुआ करेगी, परंतु वर्श में एक बार अनिवार्य होगी बैठक का माह तथा बैठक का स्थान व समय कार्यकारिणी समिति निश्चित करेगी 15 दिवस पूर्व प्रत्येक सदस्य को सूचना दी जावेगी उसमें बैठक कोरक 3/5 सदस्यों का होगा।

संस्थान को प्रथम आम सभा पंजीयन दिनांक से 3 माह के भीतर बुलाई जावेगी इसमें संस्था के पदाधिकारियों का विधिवत निर्वाचन किया जावेगा यदि संबंधित आम सभा का आयोजन किसी समय नहीं किया जाता

(अध्यक्ष)

(कोषाध्यक्ष)

तो पंजीयक को अधिकार होगा कि संस्था की आमसभा का आयोजन किसी जिम्मेदार कर्मचारी के मार्गदर्शन में एवं पदाधिकारियों को विधिवत चुनाव कराया जायेगा।

प्रबंधकारिणी समिति :- प्रबंधकारिणी सभा की बैठक प्रत्येक माह होगी तथा बैठक का एजेन्डा तथा सूचना बैठक दिनांक से सात दिन पूर्व कार्यकारिणी के प्रत्येक सदस्य को भेजी जाना आव यक होगी बैठक में कोरम 1/2 सदस्यों का होगा। यदि बैठक का कोरम पूर्व नहीं होगा है तो बैठक 1 घण्टे के लिये स्थगित की जाकर उसी स्थान पर उसी स्थान पर उसी दिन पुनः की जा सकेगी जिसके लिये कोरम की कोई भात नहीं होगी।

(स) विशेष :– यदि कम से कम कुल संस्था (कुल सदस्यों की संख्या का) के 2/3 सदस्यों द्वारा लिखित रूप से बैठक बुलाने हेतु आवेदन करें तो उनके दाये गये विशेष पर विचार करने के लिये साधारण सभा की बैठक बुलाई जावेगी विशेष संकल्प पारित हो जाने पर संकल्प की प्रति बैठक पंजीयक की संकल्प पारित हो जाने के दिनांक से 14 दिन के भीतर भेजा जायेगा पंजीयक को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने तथा समिति को परामर्श देने का अधिकार होगा।

  1. साधारण सभी के अधिकार व कर्तव्य :- (क) संस्था के पिछले वर्ष का वार्शिक विवरण प्रगति प्रतिवेदन स्वीकृत करना। (ब) संस्था की स्थायी निधि व सम्पत्ति की ठीक व्यवस्था करना। (ग) आगामी वर्ष के लिये लेखा परीक्षकों की नियुक्ति करना। (घ) अन्य ऐसे विषयों पर विचार करना जो कार्यकारिणी समिति द्वारा प्रस्तुत हो (च) संस्था द्वारा संचालित संस्थाओं के आय व्यय पत्रों को स्वीकृत करना। (छ) बजट का अनुमोदन करना। 12. कार्यकारिणी का गठन :- नियम-5 (अ.ब.स) में दर्शाये गये सदस्यों जिनके नाम पंजी रजिस्टर में दर्ज हो.

बैठक में बहुमत के आधार पर निम्नांकित पदाधिकारियों तथा कार्यकारिणी समिति के सदस्यों का निर्वाचन होगा। (1)

अध्यक्ष (2) उपाध्यक्ष (3) सचिव (4) सह-सचिव (5) कोषाध्यक्ष एवं (6) कार्यकारिणी सदस्य- दो।

  1. कार्यकारिणी का कार्यकाल :- कार्य समितित का कार्यकाल तीन वर्श का होगा। समिति का यथेश्ठा कारण होने पर उस समय तक जब तक कि नई कार्यकारिणी समिति का निर्माण नियमानुसार या अन्य कारणों से नहीं हो। जाता, करती रहेगी यह अवधि छ माह से अधिक नहीं होगी जिसका अनुमोदन साधारण सभा से कराना अनिवार्य होगा।
  2. कार्यकारिणी के अधिकार व कर्तव्य :

(अ) जिन उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु समिति का गठन हुआ है उसकी पूर्ति करना और इस आशय की पूर्ति हेतु व्यवस्था

करना। (ब) पिछले वर्ष का लेखा पूर्णतः परिक्षित किया हुआ प्रगति प्रतिवेदन के साथ प्रतिवर्श साधारण सभी की बैठक में

प्रस्तुत करना।

(स) समिति एवं उसके अधीन संचालित संस्थाओं के कर्मचारियों के वेतन तथा भत्ते आदि का भुगतान करना। संस्था की चल अचल सम्पत्ति पर लगने वाले कर आदि का भुगतान करना।

(2) कर्मचारियों शिक्षकों की नियुक्ति करना।

अन्य आवश्यक कार्य करना जो साधारण सभा द्वारा समय पर सौंपे जायेंगे।

(च) संस्था की समस्त चल अचल सम्पत्ति संस्था के नाम से ही होगी।

संस्था कोई भी स्थाई सम्पत्ति, रजिस्ट्रार की लिखित अनुज्ञा के बिना विक्रय द्वारा या अन्यथा अर्जित या आतंरिक नहीं की जावेगी। (ज) विशेष बैठक आमंत्रित कर संस्था के विधान में संशोधन किये जाने के प्रस्ताव पर विचार विमर्श कर साधारण सभा को विशेष बैठक में उसकी स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करेगी। साधारण सभा में कुल सदस्यों 2/3 मत से संशोधित

(घ)

पारित होने पर उक्त प्रस्ताव पारित कर पंजीयक को अनुमोदन हेतु भेजा जायेगा। 15 अध्यक्ष के अधिकार :- अध्यक्ष साधारण सभा तथा कार्यकारिणी समिति की समस्त बैठक की अध्यक्षता

करेगा तथा मंत्री द्वारा साधारण सभा में कार्यकारिणी की बैठक का आयोजन करवायेगा अध्यक्ष का मत विचारार्थं विषयों में निर्णायात्मक होगा।

  1. उपाध्यक्ष के अधिकार :- अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा साधारण सभा एवं कार्यकारिणी की

समस्त बैठकों की अध्यक्षता करेगा। अध्यक्ष के समस्त अधिकारों का उपयोग करेगा।

  1. उपाध्यक्ष के अधिकार :- (1) साधारण सभा एवं कार्यकारिणी की बैठक समय-समय पर बुलाना और समस्त आवेदन पत्र तथा सुझाव जो प्राप्त हो, प्रस्तुत करना (2) समिति का आय व्यय का लेखा परीक्षण से प्रतिवेदन तैयार करना तथा करवाना उनका निरीक्षण करना तथा अनियमितता पाये जाने पर उसकी सूचना कार्यकारिणी को देना (3) सचिव को किसी के लिए एक समय में रूपये 500/- (पाँच सौ) तक व्यय करने का अधिकार होगा।

18.

कोषाध्यक्ष के अधिकार :- समिति की धनराशि का पूर्ण हिसाब रखना तथा सचिव या कार्यकारिणी द्वारा

स्वीकृत करना।

  1. सह-सचिव के अधिकार :- सचिव के कार्य में मदद करना एवं उनकी अनुपस्थिति में कार्य करना पंजीयक को भेजी जाने वाली जानकारी :- अधिनियम की धारा 27 के अन्तर्गत संस्था को वार्षिक आम सभा होने के दिनांक से 14 दिन के भीतर निर्धारित प्रारूप पर कार्यकारिणी समिति की सूची फाईल की जायेगी धास

28 के अन्तर्गत संस्था की परीक्षत लेखा भेजेगी।

  1. बैंक खाता :- संस्था की समस्त निधि किसी अधिसूचित बैंक या पोस्ट ऑफिस में रहेगी धन का आहरण अध्यक्ष या मंत्री तथा कोशाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षरों से होगा। दैनिक व्यय हेतु कोषाध्यक्ष के पास अधिकतम रूपये 500/- रहेंगे।
  2. संशोधन :- संस्था के विधान में संशोधन साधारण सभा की बैठक में कुल सदस्यों के 2/3 मतों से पारित होगा। यदि आवश्यक हुआ तो संस्था के हित में उसके पंजीकृत विधान में संशोधन करने के अधिकार पंजीयक फर्म्स एवं संस्थाओं को होगा, जो प्रत्येक सदस्य को मान्य होगा।
  3. विघटन :- संस्था का विघटन साधारण ब्याज में कुल सदस्यों के 3/5 मतों को पारित किया जायेगा विघटन के पश्चात संस्था को चल तथा अचल संपत्ति किसी समान उद्देश्यों वाली संस्था को सौंप दी जावेगी उक्त समस्त कार्यवाही अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार की जावेगी।

सम्पत्ति :- संस्था की समस्त चल तथा अचल सम्पत्ति संस्था के नाम ही रहेगी संस्था का अचल सम्पत्ति (स्थावर) रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाओं की लिखित अनुज्ञा के बिना विक्रय द्वारा या अन्य प्रकार से अर्जित या अन्तर्गत कि जा सकेगी।

  1. बैंक खाता :- संस्था की समस्त निधि किसी अनुसूचित बैंक या पोस्ट ऑफिस में खोला जायेगा एवं समय पर धन जमा करने व निकालने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
  2. पंजीयक द्वारा बैठक बुलाना :- संस्था की पंजीयक नियमावली के अनुसार पदाधिकारियों द्वारा वार्शिक बैठक न बुलाये जाने पर अन्य प्रकार से आवश्यक होने पर पंजीयक फर्म्स एवं संस्थाओं की बैठक बुलाने का अधिकार होगा साथ यह बैठक में विचारार्थ विशय निश्चित कर सकेगा।
  3. विवाद :- संस्था में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न होने पर अध्यक्ष को साधारण सभा की अनुमति से सुलझाने का अधिकार होगा यदि इस निश्चिय या निर्णय से पक्षों को संतोष न हो तो रजिस्ट्रार की ओर विवाद के निर्णय के लिये भेज सकेंगे। रजिस्ट्रार का निर्णय अंतिम सर्वमान्य होगा। संचालित सभाओं के विवादित अथवा कार्यसमिति के विवाद होने पर अंतिम निर्णय देने का अधिकार रजिस्ट्रार को होगा।
  4. Mixvely.site

गान,

इंसान

आय

है

मध्यप्रदेश शासन

पशुपालन विभाग

उन्नत पशुपालन आजीविका का बेहतर साधन

से

पशुपालन एवं योजनाओं की जानकारी

संचालनालय, पशुपालन, कामधेनु भवन, वैशाली नगर, भोपाल – 462003

  1. बड़े पशुओं का उत्प्रेरण

(1.1) समुन्नत पशु प्रजनन योजना (अनुदान पर प्रजनन योग्य मुर्रा सांड का प्रदाय) (योजना सभी वर्ग के लिए)

उद्देश्य योजना

● नस्ल सुधार

● इस योजना के अंतर्गत प्रगतिशील पशुपालक अथवा प्रशिक्षित गौ सेवक को मुर्रा भैंसा स प्रदाय किये जाते हैं। योजना प्रदेश के सभी जिलों में लागू योजना सभी वर्गों के लिए।

हितग्राही

सभी वर्ग के पशु पालक ।

योजना इकाई

पेडीचि प्रजनन योग्य मुर्रा सांड

रुपये 45000.00 परिवहन, सहित ।

इकाई लागत अनुदान संपर्क

सभी वर्ग के लिए 80 प्रतिशत । संबंधित जिले के निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी / उपसंचालक पशु चिकित्सा ।

हितग्र

योजन

इका

चयन

संपव

(1.2) नन्दी शाला योजना (अनुदान पर प्रजनन योग्य देशी वर्णित गौसांड का प्रदाय)

उददेश्य

(योजना सभी वर्ग के लिए )

  • ग्रामीण क्षेत्रों की स्थानीय अवर्णित / श्रेणीकृत, गौ वंशीय पशुओं की नस्ल सुधार हेतु देशी वर्णित नस्ल के सांडो का प्राकृतिक गर्भाधान सेवाये हेतु पशुपालकों को अनुदान आधार पर प्रदाय |

योजना

उद

प्रोल

अंत

पश

के

एवं

पश

जा

→ ग्राम पंचायत स्तर पर प्रगतिशील पशुपालकों को अनुदान पर देशी वर्णित नस्ल गौ-सांड यथा, मालवी, निमाडी, केनकथा नस्ल के प्रदाय योजना प्रदेश के सभी जिलों के ग्रामीण क्षेत्र के लिए लागू |

हितग्राही

सामान्य वर्ग के पशुपालक जिनके पास पर्याप्त कृषि भूमि के साथ न्यूनतम 5 गौवंशीय पशुधन या जिनके पास कृषि भूमि नहीं है किन्तु 20 या उससे अधिक पशु है। ★ एक देशी वर्णित गौ-सांड प्रदायित सांड के प्रथम 60 दिवस के लिए पशु आहार ।

योजना इकाई इकाई लागत

देशी वणित गौ सांड का मूल्य, परिवहन सहित रू.15,000, तीन वर्ष का बीमा, 6.4 प्रतिशत की दर से रू. 960, प्रथम 60 दिवस के लिए पशु आहार रूपये 2100 प्रशिक्षण बुकलेट एवं मानिटरिंग कार्ड हेतु रू. 200 कुल रूपये 18260.00 1

अनुदान

» प्रति इकाई अनुदान

80 प्रतिशत सभी वर्ग के पशुपालक

★ हितग्राही अंशदान 20 प्रतिशत संबंधित ग्राम पंचायत / निकटस्थ पशु चिकित्सा संस्था / उपसंचालक पशु चिकित्सा ।

संपर्क

  1. वत्स पालन प्रोत्साहन योजना

उद्देश्य

योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में भारतीय देशी नस्ल के गौवंश को बढ़ावा देने लिए पशुपालकों को प्रोत्साहित करना एवं उनके पास उपलब्ध उच्च आनुवांशिक गुणों वाले वत्सों का संरक्षण एवं संर्वधन करना है।

योजना

ऐसे पशुपालक जिनके पास भारतीय देशी उन्नत नस्ल के पशु (गाय) है तथा जिनका दुख उत्पादन उस नस्ल के पशुओं के औसत दुग्ध उत्पादन से 30 प्रतिशत अधिक है एवं उसका वस उच्च आनुवांशिक क्षमता वाले भारतीय नस्ल के सांड़ के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान अथवा प्राकृतिक गर्भाधान द्वारा पैदा हुआ है। ऐसी गायों के पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए राशि रू. 5000.00 (पांच हजार) एवं उनके वत्सों के संरक्षण हेतु राशि रू.500.00 रुप (सौ) प्रतिमाह पशु आहार / औषधी के रूप में 0-4 माह की उम्र से दो वर्षों तक जाएगी। इस योजना में नर एवं मादा दोनों प्रकार के वत्स लाभान्वित हो सकेंगे।

हितग्राही योजना इकाई

यह योजना सभी वर्ग के हितग्राहियों के लिए है।

भारतीय देशी उन्नत नस्ल की ऐसी गायें जिनका दुग्ध उत्पादन उनकी नस्ल के औसत उत्पादन से 30 प्रतिशत अधिक है एवं उनका वत्स उच्च आनुवांशिक क्षमता वाले भारतीय सांडो के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान / प्राकृतिक गर्भाधान द्वारा उत्पन्न हुआ है।

इकाई लागत

17000/- (रूपये सत्रह हजार मात्र) शत-प्रतिशत अनुदान राशि हितग्राही एवं पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ के संयुक्त खाते में जमा कर योजना की आवश्यकता अनुसार समय-समय पर आहरित की जाएगी।

चयन समिति

जिले के उप संचालक पशु चिकित्सा सेवायें समिति के अध्यक्ष होंगे एवं दो पशु चिकित्सा सहायक शल्यक्ष / पशु चिकित्सा विस्तार अधिकारी सदस्य होंगे। संबंधित जिले के निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी / उपसंचालक पशु चिकित्सा ।

संपर्क

  1. योजना का नाम – गोपाल पुरस्कार योजना

उद्देश्य- भारतीय उन्नत नस्ल के गौवंशीय पशुओं के पालन को बढ़ावा देने एवं अधिक दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिये ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में गोपाल पुरस्कार योजना संचालित की गई है। योजना अतरांत अधिक दुग्ध उत्पादन देने वाली भारतीय नस्ल की गाय के पशुपालकों को पुरस्कार दिया जाता है। जिससे पशुपालकों को अतिरिक्त आय के साधन एवं दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होती है। इसके साथ ही भारतीय उन्नत नस्ल के गौवंशीय उत्पादक पशुओं की संख्या में वृद्धि होती है। योजना संपूर्ण प्रदेश में विकास खण्ड स्तर, जिला स्तर एवं राज्य स्तर पर प्रतिवर्ष क्रियान्वित की जाती है। योजना में जिले के अंतर्गत समस्त विकास खण्डों से ऐसे

पशुपालक, जिनकी देशी नस्ल की गाय का दुग्ध उत्पादन 4 लीटर अथवा उससे अधिक है, से आवेदन प्राप्त किये जाते हैं। • विकास खण्ड स्तर पर प्रक्रिया सर्वाधिक दूध देने वाली गायों के पंजीकरण पश्चात् प्रतियोगिता आयोजित कर

क्रमशः प्रथम, द्वितीय, तृतीय पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं।

. जिला स्तर पर प्रक्रिया- विकास खण्ड स्तरीय प्रतियोगिता के आधार पर जिले के समस्त विकास खण्डों की सम्मिलित वरीयता सूची तैयार कर परीक्षण के उपरांत जिले में अधिकतम दूध देने वाली 10 गाय का चयन कर जिला स्तर पर प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है इनमें से अधिकतम दूध देने वाली गायों को क्रमशः प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं 07 सांत्वना पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं।

राज्य स्तर पर राज्य स्तरीय परिणामों के आधार पर परीक्षण उपरांत क्रमश प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं 7 सांत्वना पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं।

4 विकास खण्ड स्तरीय पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार रू.10,000 द्वितीय पुरस्कार रू. 7,500, तृतीय पुरस्कार रू. 5,000 जिला स्तरीय पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार रू. 50,000 द्वितीय पुरस्कार रू. 25000, तृतीय पुरस्कार रू. 15,000,

07 सांत्वना पुरस्कार रू. 5000 प्रत्येक ।

• राज्य स्तरीय पुरस्कार – प्रथम पुरस्कार रू. 2.00 लाख. द्वितीय पुरस्कार रू.1.00 लाख, तृतीय पुरस्कार रू.0.50 लाख 07 सांत्वना पुरस्कार रू. 10,000 प्रत्येक । संपर्क: संबंधित जिले के निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी / उपसंचालक पशु चिकित्सा ।

  1. आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना (यह योजना सभी वर्ग के हितग्राहियों के लिए)

उद्देश्य

योजना

हि

यो

स्

F

• दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना। • पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि। रोजगार के अवसर प्रदाय करना

» योजना सभी वर्ग के हितग्राहियों के लिए। हितग्राही के पास 5 पशुओं हेतु न्यूनतम 1 एकर

कृषि भूमि होना आवश्यक है तथा पशुओं की संख्या में वृद्धि होने से आनुपातिक रूप से वृद्धि करते हुए न्यूनतम कृषि भूमि का निर्धारण किया जाएगा। मिल्क रूट को क्रियान्वयन का प्राथमिकता ।

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