पी.आर.ए. (PARTICIPATORY RURAL APPRAISAL)

पी. आर. ए. (सहभागी ग्रामीण आंकलन) अंग्रेजी शब्द (पार्टीसिपेटरी रूरल एप्रेजल) का संक्षिप्त रूप है। इसे हिन्दी में सहभागी ग्रामीण समीक्षा या सहभागी ग्रामीण आंकलन कह सकते हैं। यूं तो पी. आर.ए. का उपयोग विकास के किसी भी क्षेत्र में किया जा सकता है, किन्तु इसका उपयोग जन भागीदारी से विकास योजनाओं के निर्माण में निम्न कार्यों में किया गया है:

1. जलग्रहण क्षेत्र विकास योजना में।

2.जन भागीदारी द्वारा वन प्रबंधन में।

3. ग्राम की योजना बनाने में।

4. ग्रामीण विकास से संबंधित अन्य योजनाओं में।

पी.आर.ए. अर्धसंरचनित, लचीला (फ्लेक्सिबल) व नवपरिवर्तनशील (इनोवेटिव) विधि है। इस पद्धति में गांव के बारे में सब कुछ पूर्व से निश्चित नहीं किया जाता। गांव की परिस्थिति के अनुसार जानकारी प्राप्त की जाती है। इस पद्धति की सफलता तभी है जब लोग सक्रिय सहभागिता करें। अतः पी.आर.ए. के अभ्यास में स्थानीय परिस्थिति व आवश्यकता अनुसार कम या ज्यादा समय लग सकता है। इस पद्धति में बताई गई तकनीकों के अलावा नई तकनीकों का उपयोग भी किया जा सकता है।

पी. आर. ए. की आवश्यकता

पूर्व में ऐसा देखा जाता था कि अधिकांश योजनाएं केन्द्र में बनती थीं, राज्यों की सहभागिता सीमित होती थी। इन योजनाओं में निर्धारित नियमों, उप नियमों का उपयोग पूरे देश के लिए किया जाता था। ग्रामीण स्तर पर लोगों के साथ काम करने वाले विकास कार्यकर्ताओं/अधिकारियों के अनुभव ऐसे रहे हैं कि प्रत्येक राज्य, जिला, विकासखंड व गांव की स्थानीय परिस्थितियां भिन्न-भिन्न हैं।

अतः कार्यक्रमों का आयोजन स्थानीय स्तर पर स्थानीय लोगों की सहभागिता द्वारा किया जाना चाहिए। इससे योजना के प्रति लोगों में उत्साह विश्वास बढ़ेगा। मान्यता एवं अनुभव यह है कि अधिकारियों के ज्ञान के साथ-साथ जब स्थानीय लोगों के अनुभवों का उपयोग भी विकास कार्यक्रमों में होता है तो योजनाएं ज्यादा प्रभावकारी होती है।

पी. आर. ए. के सिद्धांत:

1. जन भागीदारी (people participation)

2.अर्धसंरचनित (semi structured)

3. त्रिकोणीय जांच (Triangulation)

4.सक्रियता से सुनना (Active listening)

5. पूर्वाग्रहरहित (Nobias)

6. लोग समस्या नहीं है (People are not the problem)

7. थोड़ी अशुद्धता को नजरअंदाज करना (Optimal ignorance)

जन भागीदारी

पी.आर.ए. का मूल सिद्धांत है कि योजना के नियोजन से प्रबंधन तक प्रत्येक प्रक्रिया में लोगों का शामिल किया जाए। वास्तव में कार्य ऐसा होना चाहिए कि लोग केन्द्र बिन्दु में हों और विकास कार्यकर्ता सहयोगी की भूमिका में हों।

अर्धसंरचनित

प्रायः देखा गया है कि पूर्व में योजना संबंधी निश्चित पत्रक रहते थे, उसमें पूछे जाने वाले प्रश्न निश्चित थे। कई बार ऐसा देखा गया है कि गांव की स्थिति सर्वे पत्रक से भिन्न है। जिससे गांव के बारे में बहुत सी महत्वपूर्ण जानकारी नहीं ली जा सकती थी। पी.आर.ए. करते समय गांव में जानकारी लेते समय चैक लिस्ट ले जाई जा सकती है।

त्रिकोणीय जांच

सामान्य तौर पर देखा गया है कि गांव में एक स्त्रोत / मोहल्ला / टोला /फणिया के कुछ सीमित व्यक्तियों द्वारा दी गई जानकारी पूरी तरह सही नहीं होती है, कारण स्थानीय लोग आपस में जातिगत, धर्मगत या राजनैतिक रुप से विभाजित रहते हैं।

सक्रियता से सुनना

प्रायः देखा जाता है कि विकास कार्यकर्ता ग्रामीणों की बात को ध्यान से नहीं सुनते, इससे वे समस्या की तह में नहीं जा पाते। अतः पी.आर.ए. का सिद्धांत है कि ग्रामीणों की बात को सक्रियता से सुना जावे जिससे हम समस्या को अच्छी तरह से समझ सकें। ध्यान से सुनने से हमें समस्या की तह में जाकर उसके निराकरण में मदद मिलेगी।

पूर्वाग्रह रहित

अनेकों बार हम अपने पूर्व अनुभवों के आधार पर कई चीजों के बारे में अपना निश्चित दृष्टिकोण बना लेते हैं। जब हम यह पहले से ही मान लेंगे कि वन अधिकारी होने के नाते प्रत्येक गांव या जंगल में होने वाली वानस्पतिक प्रजातियों के बारे में हम से ज्यादा ग्रामीण नहीं जान सकतें, तब हम लोगों से जानकारी नहीं लेंगे ।

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