पी. आर. ए. हेतु दिशानिर्देश

  • वे जानते हैं इसलिए उन्हें प्राथमिकता (ग्रामीण)
  • वे कर सकते हैं (पी.आर.ए. की विधियां कार्यों का नियोजन एवं क्रियान्वयन)
  • वार्तालाप को ध्यान से सुनें व सीखने का प्रयास करें। लोगों से उनकी सुविधा व समय के अनुसार मिलें न कि अपनी सुविधा अनुसार ।
  • प्रक्रिया में ज्यादा हस्तक्षेप न करें, जल्दबाजी न बताएं।
  • आलोचना न करें।
  • उचित जगह प्रश्न पूछें व कार्य को आगे बढ़ाने में मददगार की भूमिका अदा करें।
  • खुले दिमाग से गांव में जायें (पूर्वाग्रह न रखें)।
  • सभी लोगों को भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • लोगों द्वारा प्राप्त जानकारी का त्रिकोणीय जांच द्वारा पुष्टिकरण करें।
  • लोगों की रुचि / इच्छा को देखते हुए ही चर्चा करें।
  • प्रक्रिया में सृजनशीलता व अन्वेषण की सम्भावना बनी रहे। यदि लोग दूसरे तरीके से व्यक्त करते हैं तो
  • करने दें। महिलाओं और पुरुषों दोनों की राय जानकर सहभागिता प्राप्त करें।
  • ग्रामीणों को प्रक्रिया में भाग लेने हेतु प्रोत्साहित करें।
  • कार्य समाप्त होने पर लोगों को उनके सहयोग हेतु धन्यवाद दें।
  • अपना व्यवहार ठीक रखे।
  • ग्रामीणों द्वारा पेश आतिथ्य को स्वीकार करें।
  • ग्रामीणों को आपस में विचार विमर्श करने व चर्चा करने का अवसर दें (फेसिलिटेटर की भूमिका निभायें)
  • एक साथ अनेक प्रश्न न पूछें।
  • पी.आर.ए. दौरान सामने आयें महत्वपूर्ण तथ्य नोट कर लें।
  • लोगों को विचार, सुझाव, समाधान प्रस्तुत करने का अवसर दें। कुछ लोग (गांव से ही) दूसरों को बोलने का अवसर नहीं देते उन्हें समझदारी से हतोत्साहित करें ताकि दूसरे लोगों को भी अपनी बात करने का अवसर मिल सके।
  • क्या कहा, कब, कौन सा क्यों तथा कैसे शब्दों की सहायता से समस्या संबंधी हकीकत को पूरी तरह समझा जाये।
Scroll to Top