पी. आर. ए. से आंकड़ों के संकलन –

प्राथमिक आंकड़ों के संकलन हेतु सहभागी नियोजन की प्रक्रिया अपनाते हुए पी.आर.ए. (सहभागी ग्रामीण आंकलन) पद्धति का उपयोग किया जायेगा। पी.आर.ए. ग्रामीणों की महत्वपूर्ण समस्यायें एवं निराकरण की संभावनाओं को शीघ्रतम ज्ञात करने हेतु यह एक अनौपचारिक तरीका है। प्राथमिक आंकड़ों के संकलन हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न गतिविधियों को उपयोग किया जा सकता है:

1. क्षेत्र भ्रमण

2. सामाजिक मानचित्र

3. संसाधन मानचित्रण

4. ऋतु आधारित परिवर्तन चित्रण

5. चपाती चित्रण

6. आर्थिक वर्गीकरण

7. समय रेखा

8. खुली समूह चर्चा |

1- क्षेत्र भ्रमण इस प्रक्रिया में ग्राम में भ्रमण कर वास्तविक स्थिति को ज्ञात करने का प्रयास किया जाता है।

2. सामाजिक मानचित्र (Social Map)

उद्देश्यः

(अ) गांव में प्रत्येक वर्ग के लोगों के घरों, मोहल्ला / टोला / फणिया के बारे में जानकारी प्राप्त करना । (ब) गांव के बारे में मूलभूत जानकारी प्राप्त करना।

“ग्राम सामाजिक मानचित्र”

प्रक्रिया: इस विधि में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार जब हम गांव में पहुंचते हैं तब पहला कार्य सामाजिक मानचित्र बनाने का करते हैं। इस विधि में गांव तल जहां गांव बसा हुआ है उसका नक्शा बनाया जाता है। नक्शा बनाने हेतु चाक, रंगोली या अन्य स्थानीय वस्तुओं का उपयोग किया जाता है। विकास कार्यकर्ता सहयोगी / उत्प्रेरक की भूमिका निभाते हैं। स्थल का चयन इस तरह किया जाता है ताकि गांव के सभी लोग बिना हिचक आ सकें व सक्रिय सहभागिता कर सकें। नक्शा बनाते समय सभी उम्र के लोग शामिल हों ताकि सभी उम्र व वर्ग के लोगों से जानकारी प्राप्त की जा सके। इस नक्शे के अंतर्गत गली, मकान, मंदिर, मस्जिद, चर्च जो भी गांव में हों हैंडपंप, स्कूल, पंचायत भवन, बिजली के खंबे व इसी तरह के कोई अन्य सार्वजनिक संसाधन हों वे बनाये जाते हैं। पक्के व कच्चे मकानों को अलग-अलग रंग से बताया जाता है, गांव के प्रत्येक घर में महिला, पुरुष की संख्या इत्यादि विभिन्न तरह की मूलभूत जानकारी इस नक्शे द्वारा प्राप्त की जा सकती है।

उपयोगिता

अ. गांव में विविध जाति के समूह कहां-कहां बसे हैं, इसकी जानकारी प्राप्त होती है।

ब. गांव में विविध जाति के लोगों के घर से ग्राम में लोगों की आर्थिक स्थिति का पता चलता है।

स. गांव में सार्वजनिक संसाधनों के वितरण के संबंध में जानकारी प्राप्त होती है।

द. इस नक्शे के उपयोग से गांव में संसाधन कहां-कहां स्थित है व इसका उपयोग कौन कर रहा है।

इ. गांव की मूलभूत जानकारी जैसे प्रत्येक परिवार में महिला व पुरुषों की संख्या, पशुओं की संख्या इत्यादि की जानकारी।

3. संसाधन मैपिंग (Resource Map)

इस प्रक्रिया से गांव में प्राकृतिक और भौतिक संसाधनों के बारे में जानकारी हासिल करने में सहायता मिलती है। इसे भी स्थानीय लोग ही तैयार करते हैं और इस मैप में प्रमुखतः भूमि उपयोग, जल निकास, सिंचाई के साधन, भूमि का स्वरूप आदि को दर्शाया जाता है।

उद्देश्य:

(1) गांव में उपलब्ध संसाधनों जैसे मिट्टी पानी, पेड़-पौधे, घास-चारे, जलाऊ लकड़ी इत्यादि की वर्तमान स्थिति का आंकलन करना ।

(2) प्राकृतिक संसाधनों की भूतकाल की स्थिति की जानकारी प्राप्त करना । (3) प्राकृतिक संसाधनों के विकास के लिए रणनीति / कार्ययोजना बनाना ।

प्रकिया:

गांव में विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों जैसे कृषि भूमि, पड़ती भूमि, वन, घास-चारे की स्थिति, पानी का बहाव, मिट्टी का क्षरण, खेतों में सिंचित व असिंचित खेत इत्यादि, सभी जानकारी इस मानचित्र से ली जाती है। गांव के पटवारी से नक्शा प्राप्त कर लिया जाता है, गांव की वर्तमान वास्तविक स्थिति व पटवारी नक्शे द्वारा प्राप्त जानकारी का विश्लेषण किया जाता है, जिससे बनाई जाने वाली योजना गांव की वास्तविक स्थिति के अनुसार हो।

उपयोगिता

1. गांव के संसाधनों जैसे जल, जंगल, जमीन इत्यादि की वर्तमान स्थिति का आंकलन करने में।

2 गांव में उपलब्ध उपरोक्त संसाधनों की स्थिति के आंकलन के आधार पर क्षेत्र के विकास की कार्ययोजना बनाने में।

3. परम्परागत रूप से संसाधनों के प्रबंधन की स्थानीय पद्धतियों के जानने में।

4. गांव के विभिन्न क्षेत्रों का आंकलन कर तदानुसार प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्य तय करने में।

4. ऋतु आधारित परिवर्तन चित्रण (Seasonality)

उद्देश्य

गांव में ऋतु के अनुसार वर्षा, रोजगार, जलाऊ लकड़ी, पलायन, बीमारियों इत्यादि का आंकलन करना।

प्रक्रिया:

इस तकनीकी के द्वारा हम ग्राम में वर्षा की स्थिति व वर्ष में वर्षा के वितरण की जानकारी प्राप्त करते

हैं।

उपयोगिता

अ. वर्षा का वितरण जानकर हम जलसंरक्षण के साधनों का निर्धारण कर सकते हैं।

ब. लोगों को कब रोजगार गांव में रहता है व कब गांव में रोजगार नहीं मिलता, इस आधार पर हम ऐसे समय में कार्य प्रारंभ कर सकते हैं जब लोगों को रोजगार नहीं मिलता।

स. पानी की कमी कब रहती है यह जान सकते हैं।

द कब ग्रामीण अपने गांव से रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं इसे हम जान सकते। हैं।

इ. पशुओं को घास चारा कब उपलब्ध रहता है व कब कमी रहती है. इसका पता चल जाता है।

ड. जलाऊ लकड़ी कब उपलब्ध रहती है व कब नहीं रहती इस बात की जानकारी भी हमें प्राप्त हो।

5. चपाती चित्रण (Chapati Diagram)

उद्देश्य

ग्रामीणों में विभिन्न संस्थाओं की जानकारी एवं उनके महत्व को जानना ।

पंकिया :

चपाती डायग्राम के द्वारा ग्रामीणों की नजर में विभिन्न शासकीय/अशासकीय विभागों के साथ दूरी व ग्रामीणों की नजर में उनके महत्व की जानकारी प्राप्त की जाती है। उपयोगिता –

अ. चपाती डायग्राम के द्वारा हमें पता चलता है कि ग्रामीणों की नजर में अलग-अलग संस्थाओं/विभागों की अहमियत कितनी है।

ब. यदि हमारे विभाग का गोला अन्य विभागों की तुलना में छोटा है इससे पता चलता है कि हमारे विभाग की एहमियत लोगों की नजर में कम है।

स. इस तकनीक का उपयोग गांव में उपलब्ध सेवाओं को जानने में भी किया जा सकता है।

6. आर्थिक वर्गीकरण (Wealth Ranking)

उद्देश्य:

स्थानीय लोगों द्वारा उनके मानकों के आधार पर परिवारों का आर्थिक दृष्टि से वर्गीकरण।

प्रक्रियाः

प्रायः देखा गया है कि जब आर्थिक दृष्टि से परिवारों का वर्गीकरण करना होता है तब भूमि के रकबा, जो कि उस व्यक्ति के पास है, उसको मुख्य आधार माना जाता है।

उपयोगिता

अ. चूंकि यह प्रक्रिया लोगों द्वारा स्वयं में की गई है अतः इसमें सत्यता अधिक देखी जा सकती है।

ब. चूंकि गरीब व अमीर का निर्धारण लोगों द्वारा स्वयं किया गया है।

स.. गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम हेतु वास्तविक गरीब व्यक्ति का चयन संभव हैं।

द. भूमिहीन कृषकों हेतु गैर कृषि कार्यक्रमों की संभावना तलाशी जा सकती हैं। घ भूमिहीन कृषकों को विकास कार्यों में प्राथमिकता देकर लाभ पहुंचाया जा सकता है।

7. समय रेखा (Time Line)

उददेश्य: गांव की ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त करना

प्रक्रिया: इस तकनीक के उपयोग से हम गांव के भूतकाल से लेकर वर्तमान समय तक लोगों के आपसी अंतर्संबंध, प्रमुख घटनाओं जैसे अकाल, सूखा, आग या ऐसी कोई अन्य विशेष घटना व प्राकृतिक संसाधनों में हुए परिवर्तन के बारे में जान सकते हैं। यह जानकारी हमें गांव के वर्तमान स्वरुप के साथ ही उसके इतिहास की जानकारी देती है।

1860 गांव में पीने की पानी हेतु कुआं बना। 1930 ठेकेदारों द्वारा जंगल कटाई।

1970 गांव के पास के जंगल में आग लगी। 1975 गांव में हैजा फैलने से 12 लोगों की मृत्यु हुई।

उपयोगिता :

1950 गांव में कच्ची सड़क बनी। 1980 गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खुला। 1988 गांव में बिजली सुविधा मिली। 1995 हाई स्कूल प्रारंभ हुआ। 2000 हायर सेकेण्डरी स्कूल प्रारंभ 2004 में गांव को मुख्य सड़कों से जोड़ना प्रारंभ। 2008 में गांव में उपस्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना । 2011 में गांव में दूरसंचार कनेक्टीविटी 2015 में गांव में बैंक शाखा प्रारंभ ।

अ. ग्राम में विभिन्न जातियों का आपस में संबंध भूतकाल में कैसा रहा है इसके आधार पर हम अपने कार्य की रणनीति बना सकते हैं।

ब. प्राकृतिक संसाधनों की पूर्व की स्थिति नक्शों द्वारा बनाई जाती है इससे वर्तमान में विश्वास उत्पन्न होता

है कि हम प्राकृतिक संसाधनों का विकास कर सकते हैं। 

स. विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में लोगों की भूमिका के बारे में जानने से कार्यक्रम में सहभागिता बढ़ाने रणनीति बना सकते हैं।

हेतु

उदाहरण :

1850 गांव बसा।

8. खुली समूह चर्चा

स्थिति विश्लेषण में प्रमुखतः निम्न प्रश्नों का समाधान खोजने का प्रयास किया जाएगा

अधोसंरचना में क्या-क्या गेप्स अर्थात कमियां है?

सेवाओं के प्रदाय में क्या-क्या कमियां है? आर्थिक विकास की क्या संभावनाएं हैं?

मानव विकास की राह में क्या क्या कमियां हैं?

सामाजिक विकास में क्या-क्या चुनौतियां हैं?

प्राकृतिक संसाधनों का सतत् विकास की प्रक्रिया का प्रबंधन कैसे किया जाए?

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