अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तारPESA

पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 ऐसा (PESA) कानून

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 के खण्ड (4) (ख) में अपेक्षित अनुसार संसद में पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1906 पारित किया गया है। इस अधिनियम को प्रभावशील करने का मुख्य उद्देश्य संविधान की पाँचवी अनुसूची के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्रों की पंचायतराज संस्थाओं का सशक्तिकरण है।

पेसा (PESA)- एक कानून

‘पैसा’ एक सरल लेकिन व्यापक और शक्तिशाली कानून है जो अनुसूचित क्षेत्रों के गांवों को अपने क्षेत्र के संसाधनों और गतिविधियों पर अधिक नियंत्रण देने की शक्ति देता है। यह अधिनियम संविधान के भाग 9 का, जोकि पंचायतों से संबद्ध है. अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार करता है। पैसा के जरिए पंचायत प्रणाली का अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार किया गया है जिसमें अधिनियम में उल्लेखित कुछ अपवाद और संशोधन शामिल हैं। ऐसा की अनुकूलता

उल्लेखित नौ राज्यों के सभी अनुसूचित क्षेत्रों में लागू है। पैसा के प्रावधानों को लागू करने के वास्ते राज्य विधानमण्डलों के लिए अपने-अपने राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों के लिए कानून बनाना आवश्यक था।

इन कानूनों में न केवल पैसा के सभी बिंदुओं को शामिल किया जाना था बल्कि उनमें केन्द्रीय ‘पैसा’ को ध्यान में रखते हुए शक्तियों तथा जिम्मेदारियों का आवंटन किया जाना था। साथ ही राज्यों के लिए यह जरूरी था कि वे अपने संबद्ध पंचायत कानूनों या संबद्ध विषय कानूनों या दोनों को केन्द्रीय कानून के समकक्ष लाने के लिए उनमें आवश्यक संशोधन करें। ऐसा का महत्व

विकेन्द्रीकृत स्वशासन का मुख्य उददेश्य गांव के लोगों को स्वयं अपने ऊपर शासन करने का अधिकार देना है। ऐसे विकेन्द्रीकरण के लिए एक संस्थागत ढ़ाचे की आवश्यकता है तथा साथ-साथ ढ़ाचे के भीतर ही शक्तियों तथा जम्मेदारियों का आवंटन भी जरूरी है। ‘पैसा’ ग्रामीण समुदाय को शासन की मूल इकाई के रूप में स्वीकार करता है और

पंचायत राज संस्थाओं की विभिन्न स्तरों पर स्थापना का उल्लेख करता है। ग्राम स्तर पर यह ग्रामसभा के गठन का प्रस्ताव करता है। ग्राम सभ ग्राम पंचायतों का चुनाव करती है जाकि ग्रामसभा के चुने हुए प्रतिनिधियों की संस्था है। ब्लॉक स्तर पर पंचायत समिति और जिला स्तर पर जिला परिषद का गठन अनिवार्य है।

ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद को संयुक्त रूप से उपयुक्त स्तर पर पंचायत कहा जाता है। साथ ही, पेसा ग्रामीण समुदाय को गांव के विकास की योजना बनाने, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और परंपरागत रीति-रिवाजों और प्रथाओं के तहत

पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 ऐसा (PESA) कानून

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 के खण्ड (4) (ख) में अपेक्षित अनुसार संसद में पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1906 पारित किया गया है। इस अधिनियम को प्रभावशील करने का मुख्य उद्देश्य संविधान की पाँचवी अनुसूची के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्रों की पंचायतराज संस्थाओं का सशक्तिकरण है।

पेसा (PESA)- एक कानून

‘पैसा’ एक सरल लेकिन व्यापक और शक्तिशाली कानून है जो अनुसूचित क्षेत्रों के गांवों को अपने क्षेत्र के संसाधनों और गतिविधियों पर अधिक नियंत्रण देने की शक्ति देता है। यह अधिनियम संविधान के भाग 9 का, जोकि पंचायतों से संबद्ध है. अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार करता है।

पैसा के जरिए पंचायत प्रणाली का अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार किया गया है जिसमें अधिनियम में उल्लेखित कुछ अपवाद और संशोधन शामिल हैं। ऐसा की अनुकूलता

उल्लेखित नौ राज्यों के सभी अनुसूचित क्षेत्रों में लागू है। पैसा के प्रावधानों को लागू करने के वास्ते राज्य विधानमण्डलों के लिए अपने-अपने राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों के लिए कानून बनाना आवश्यक था। इन कानूनों में न केवल पैसा के सभी बिंदुओं को शामिल किया जाना था

बल्कि उनमें केन्द्रीय ‘पैसा’ को ध्यान में रखते हुए शक्तियों तथा जिम्मेदारियों का आवंटन किया जाना था। साथ ही राज्यों के लिए यह जरूरी था कि वे अपने संबद्ध पंचायत कानूनों या संबद्ध विषय कानूनों या दोनों को केन्द्रीय कानून के समकक्ष लाने के लिए उनमें आवश्यक संशोधन करें। ऐसा का महत्व

विकेन्द्रीकृत स्वशासन का मुख्य उददेश्य गांव के लोगों को स्वयं अपने ऊपर शासन करने का अधिकार देना है। ऐसे विकेन्द्रीकरण के लिए एक संस्थागत ढ़ाचे की आवश्यकता है तथा साथ-साथ ढ़ाचे के भीतर ही शक्तियों तथा जम्मेदारियों का आवंटन भी जरूरी है।

‘पैसा’ ग्रामीण समुदाय को शासन की मूल इकाई के रूप में स्वीकार करता है और पंचायत राज संस्थाओं की विभिन्न स्तरों पर स्थापना का उल्लेख करता है। ग्राम स्तर पर यह ग्रामसभा के गठन का प्रस्ताव करता है। ग्राम सभ ग्राम पंचायतों का चुनाव करती है जाकि ग्रामसभा के चुने हुए प्रतिनिधियों की संस्था है।

ब्लॉक स्तर पर पंचायत समिति और जिला स्तर पर जिला परिषद का गठन अनिवार्य है। ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद को संयुक्त रूप से उपयुक्त स्तर पर पंचायत कहा जाता है। साथ ही, पेसा ग्रामीण समुदाय को गांव के विकास की योजना बनाने, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और परंपरागत रीति-रिवाजों और प्रथाओं के तहत


विवादों को सुलझाने का अधिकार भी देता है। यह शक्तिकरण पंचायत राज संस्थाओं के माध्यम से किया जाता है। इस अधिनियम में कुल पाँच धाराएँ है जिनमें निम्नांकित प्रावधान है : धारा 1 में अधिनियम का नाम उल्लेखित है।

धारा धारा 2 में परिभाषाएँ है, जिसमें एक मात्र शब्द “अनुसूचित क्षेत्र को परिभाषित किया गया है। 3 में संविधान के भाग के उपबंध अर्थात् 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के प्रावधानों

को ऐसे अपवाद और उपामारणों के अधीन रहते हुए जैसा कि इस अधिनियम की धारा 4 मे

उल्लेख है, अनुसूचित क्षेत्रों की पंचायतों में विस्तार किया गया है। -4 में अनुसूचित क्षेत्र की ग्राम सभा और पंचायतों के कृत्य और शक्तियों को वर्णित किया गया धारा है।

धारा 5 में यह प्रावधान है कि इस अधिनियम से प्रभावित केन्द्र / राज्य के अधिनियमों में एक वर्ष के भीतर संशोधन कर संगत प्रावधान किए जाएंगे और यदि एक वर्ष के भीतर संशोधन नहीं किए जाते हैं तो इस अधिनियम अर्थात् पेसा एक्ट, 1996 के प्रावधान लागू हो जायेंगे।

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