PESA Gram Sabha

अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम रामा

मध्यप्रदेश के चार जिले पूर्ण रूप से लगभग और 15 जिले आंशिक रूप से संविधान की पांचवी अनुसूची में आते हैं। संविधान की पांचवी सूची वाले क्षेत्रों में संसद और विधान सभा का कोई भी कानून तब तक लागू नहीं होता जब तक कि प्रदेश के राज्यपाल उसकी अनुमति न दें संविधान में यह व्यवस्था इसलिए है

क्योंकि पांचवी अनुसूची वाले क्षेत्र में अधिकाशंत: अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) के लोग निवास करते हैं और संविधान में यह व्यवस्था है कि इन जनजातियों की परम्परा और संस्कृति को सुरक्षित रखने का प्रयास होना चाहिए। अतः अगर देश का कोई नियम कानून जनजातीय परम्परा के विपरीत है तो राज्यपाल उसे इन क्षेत्रों में नहीं लागू होने दे सकते हैं।

73वें संविधान संशोधन में इन क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान नहीं बने थे अतः संसद से दिसम्बर 1996 में इन पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में पंचायत राज व्यवस्था के क्रियान्वयन व संचालन के लिए विशेष विस्तार अधिनियम बनाया गया। दिसम्बर 1997 में मध्यप्रदेश की विधानसभा ने इन्हीं केन्द्रीय प्रावधानों के अनुरूप राज्य अधिनियम बनाए जिसमें ग्राम सभा को निम्न अधिकार दिए गए हैं :

ग्राम सभा का गठन (धारा 2 129 – क. 129-ख)

आठ

अधिनियम की धारा 129 ख के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों के राजस्व ग्राम व वन ग्राम के भीतर भी एक या एक से अधिक ग्राम सभा का गठन किया जा सकता है यानि एक गांव के छोटे-छोटे गांवों या फलियों में ग्राम सभा का गठन किया जा सकता है। छोटे गांव में ग्राम समा गठित होगी या नहीं उस ग्राम सभा के सदस्यों पर निर्भर करेगा।

कोरम (धारा 129-ख-3)

अनुसूचित क्षेत्रों में कोरम ग्राम सभा की कुल सदस्य संख्या के एक दशमांश या 500 सदस्यों इसमें से जो भी कम हो।

ग्राम सभा की बैठक की अध्यक्षता (धारा 129- ख-4)

अनुसूचित क्षेत्रों की ग्राम सभा से जुड़े अधिनियम में सबसे विशेष तथ्य यह है कि अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत का कोई भी निर्वाचित प्रतिनिधि, सरपंच, उप सरपंच या पंच सभा की बैठक की अध्यक्षता नहीं कर सकता। उपस्थित सदस्यों में से अध्यक्ष कौन होगा इसका फ़ैसला सभी उपस्थित ग्राम सभा सदस्य साधारण बहुमत से करेगें। ग्रामसभा की अध्यक्षता बैठक में करेंगे। उपस्थित ग्राम सभा का कोई भी सामान्य सदस्य जो पंचायत पदाधिकारी न हो, कर सकता है।

महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज संस्थान, अधारताल, जबलपुर (म.प्र.)

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अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा के अधिकार

अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को सामान्य क्षेत्र की ग्राम सभा को मिले अधिकारों के साथ-साथ कई बहुत ज्यादा प्रभाव वाले अधिकार मिले हैं। ये अधिकार इस प्रकार हैं:

• ग्राम सभा को यह छूट है और उसका अधिकार यह भी है कि वह ग्राम पंचायत के किसी भी काम और जिम्मेदारी पर विचार करे तथा उस पर अपने गाँव की जरुरत के हिसाब से फैसला से।

• ग्राम सभा जो भी फैसला लेंगी वह पंचायत को मानना और लागू करना जरूरी है। यहाँ पर यह ध्यान रखना होगा कि कोई भी फैसला जिसमें धन और संसाधन लगते हैं उसे पंचायत तभी लागू कर पाएगी जब उसके पास पंचायत निधि में उतना पैसा हो ।

अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को यह अधिकार है कि वह अपने यहां के जनजातीय

समुदाय तथा व्यक्तियों की परम्परा, सांस्कृतिक पहचान तथा सामुदायिक साधनों को

सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए ताकि इन्हें सुरक्षित रखा जा सके।

• ग्राम सभा जनजातीय समुदाय (आदिवासी समुदाय) में आपसी झगड़ों तथा विवाद निपटाने के परम्परागत सामाजिक तरीकों को भी बचाएगी। इसका मतलब यह है कि ग्राम सभा आपसी विवाद व झगड़े की स्थिति में ग्राम सभा की बैठक में इन विषयों पर फैसला ले सकती है और यह फैसला दोनों पक्षों को मानना पड़ेगा।

जो भी पक्ष ग्राम सभा के इस फैसले से संतुष्ट नहीं है वह इसके खिलाफ जिला स्तर के न्यायालय में अपील कर सकता है। ग्राम सभा के फैसलों को कोई भी सरकारी अधिकारी बदल नहीं सकता।

• ग्राम सभा को अपनी सीमा के भीतर आने वाले जल, जंगल तथा जमीन का नियंत्रण करने की ताकत है। अतः ग्राम सभा अपनी स्थानीय परम्परा के अनुसार इन प्राकृतिक संसाधनों की देखभाल करेगी। प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन करते समय या इनसे जुड़े किसी भी विवाद का निपटारा करते समय ग्राम सभा यह ध्यान रखेगी कि उसके द्वारा किया गया फैसला संविधान की मूल भावना के खिलाफ न हो।

• ग्राम सभा अपनी सीमा के भीतर आने वाले सभी बाजारों और सभी प्रकार के पशु मेलों पर नियन्त्रण रखेगा। इसका मतलब यह हुआ कि ग्राम सभा यह तय कर सकेगी कि मेला कब कहाँ और कैसे लगेगा। बाजार में पशु बेचने पर कितना कर देना होगा, आदि। यहाँ भी ग्राम सभा के फैसलों पर कोई सरकारी अधिकारी दखल नहीं दे सकता।

• गांव में लागू की जाने वाली सभी प्रकार की योजनाओं जिसमें जनजातीय उपयोजना भी शामिल है पर ग्राम सभा का नियन्त्रण रहेगा। यानि ग्राम सभा ही यह तय करेगी कि कौन-सी योजना और उसके साधन ग्राम सभा में किस तरह से लागू होंगे। इन योजनाओं की धनराशि और खर्च पर किसी भी विभाग की जगह ग्राम सभा का अधिकार रहेगा।

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