PESA Gram Sabha

अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम पंचायत

अनुसूचित क्षेत्र में पंचायत में स्थानों का आरक्षण

पाँचवी अनुसूची वाले क्षेत्र में आने वाली पंचायतों में (धारा 120-ड) 1 अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए पंचायत में कुल आरक्षण गाँव में उनकी जनसंख्या के प्रतिशत के अनुसार होगा । अनुसूचित जनजातियों के लिए कम-से-कम आरक्षित रहेंगे । आधे स्थान 2

3 अनुसूचित क्षेत्र की सभी पंचायतों के सरपंच का पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित रहेगा

पांचवी अनुसूची वाले क्षेत्रों में आने वाली ग्राम पंचायतें, ग्रामसभा के अधीन काम करेंगी। इसका मतलब यह है कि पंचायत के सभी फैसले ग्राम समा से अनुमोदित होना जरुरी है। ध्यान देने वाली बात यह है कि सामान्य क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों के –

• सभी अधिकार

• स्थाई समितियाँ

• निर्णय प्रक्रिया

अनुसूचित क्षेत्रों की पंचायतों में भी लागू होगी। इन अधिकारों और जिम्मेदारियों के साथ-साथ इन क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों को निम्न विशेष अधिकार भी है :

ग्राम पंचायत के कृत्य

प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्र यानि पाँचवी अनुसूची में आने वाली ग्राम पंचायतों के लिए पंचायत अधिनियम में यह स्पष्ट किया गया है कि अनुसूचित क्षेत्रों की ग्राम पंचायतें ग्राम सभा के नियन्त्रण तथा निर्देश में अपने सभी काम करेगी। इन कामों में प्रमुख काम इस प्रकार हैं :

गाँव के बाजारों तथा मेलों का प्रबंध करना । गाँव के बाजार में लगने वाला पशु मेला चाहे वह किसी भी नाम से लगे, उसका प्रबंध करना। • गाँव के विकास के लिए लागू की जाने वाली सभी योजनाओं पर और इस योजना के आय

तथा खर्च पर नियन्त्रण रखना।


• जनजातीय उपयोजना के स्रोत व खर्चे पर नियन्त्रण रखना। नियन्त्रण और प्रबंधन का मतलब यह है कि सभी योजनाओं पर ग्राम सभा में विचार होगा और जिस तरह से भी ग्राम सभा इन योजनाओं को लागू करना तय करेगी, ग्राम पंचायत वैसा ही करेगी। अतः यह भी हो सकता है कि इसके लिए योजना ऊपर से भेजे गए निर्देशों को जरूरत के हिसाब से बदल लिया जाये।

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