NRLM (एन. आर. एल. एम.)

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एन.आर.एल.एम.) केन्द्र द्वारा पोषित एक महत्वपूर्ण योजना है जो कि गोवा तथा पांडूचेरी के अलावा सभी राज्यों में कियान्वित की जा रही है। जून 2011 में एन.आर.एल.एम. को प्रारम्भ किया गया। एन.आर.एल.एम. का मुख्य उद्देश्य है कि 2024-25 तक देश के प्रत्येक ग्रामीण गरीब परिवारों को कम से कम एक महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ जायें।

एनआरएलएम की मुख्य विशेषता निम्नलिखित है

1. वर्ष 2024-25 तक Phase manner में ग्रामीण गरीब परिवारों की कम से कम एक महिला स्वयं सहायता समूह के नेटवर्क से अवश्य जुड़ी हो।

2.गांव स्तर व क्लस्टर स्तर पर एसएचजी फेडरेशन- ग्राम स्तर पर स्वयं सहायता समूह के ग्राम संगठन व क्लस्टर स्तर पर ग्राम संगठनों का क्लस्टर फेडरेशन का निर्माण। 

3.ग्राम तथा क्लस्टर स्तर पर समूहों व समूह संगठनों के क्षमतावर्धन के लिए क्षमतावृद्धि प्रशिक्षणों का निरंतर व सघन आयोजन।

4. प्रत्येक स्वयं सहायता समूह को उनके अपने फण्ड में वृद्धि के लिए रिवाल्विंग फण्ड ।

5. पात्र ग्राम स्तरीय संगठनों को सामुदायिक स्तर पर गरीब परिवारों की खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण सुरक्षा व अन्य प्राथमिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वंचितताशमन कोष (वीएलएफ) का प्रावधान है।

6. योग्य क्लस्टर स्तर संघ के लिए सामुदायिक निवेशन सहायता राशि का प्रावधान है जिसको ग्राम संगठन व स्वयं सहायता समूह उत्पादन व उपयोग हेतु आवश्यक तथा ऋण पूर्ति के लिए प्रयोग में ले सकते हैं।

तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति

तकनीकी उवं प्रशासनिक स्वीकृतियां ग्राम पंचायत विकास योजना का भाग होंगी। ग्राम सभा पंचायत विकास अंतिम रूप से अनुमोदित ग्राम पंचायत विकास योजना के निर्माण संबंधी भाग को तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति हेतु सक्षम प्रधिकारी को प्रेषित किया जावेगा।

तकनीकी स्वीकृति

सर्वप्रथम संबंधित ग्राम पंचायत के उपयंत्री द्वारा स्थल का भ्रमण कर ग्राम सभा द्वारा चिन्हित कार्यों के प्राक्कलन तैयार किये जायेंगे। प्राक्कलन तैयार कर तकनीकी स्वीकृति जारी करने वाले सक्षम अधिकारी को प्रेषित किये जायेंगे।

एक से अधिक योजनाओं एवं मदों में होने वाले कार्यों के प्राक्कलन में कार्य में उपयोग होने वाली समस्त निधियों को योजनावार पृथक-पृथक दर्शाया जाना होगा। ग्राम पंचायत की वार्षिक कार्य योजना के सामुदायिक कार्य की स्थिति में 125 प्रतिशत हितग्राही मूलक कार्यों की स्थिति में 150 प्रतिशत तक कार्य लिये जावेंगे।

तकनीकि स्वीकृति जारी करने के संबंध में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी निर्देश प्रभावी रहेंगे।

रख रखाव एवं मरम्मत कार्य के प्राक्कलन हेतु वर्तमान में प्रभावी नियमों के अनुसार सक्षम तकनीकी अधिकारी के द्वारा तैयार किये जाकर तद्नुसार सक्षम स्वीकृति जारी की जावेगी।

प्रशासनिक स्वीकृति कार्य एजेंसी

मध्यप्रदेश शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पत्र कमांक एफ2-5/2013/22/प. 1 भोपाल दिनांक 26 फरवरी 2013 अनुसार राशि 15 लाख तक के कार्यों को संपादित करने के लिये ग्राम पंचायतें सक्षम होंगी। इससे अधिक के कार्यों के कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी आदि कार्य ऐजेंसी द्वारा संपादित किये जायेगें। 

पर्यवेक्षण, मूल्यांकन एवं सत्यापन

प्रत्येक निर्माण कार्य एवं प्रारंभ के समय प्रत्येक मूल्यांकन के समय तथा कार्य पूर्ण होने के पश्चात जियोटेग फोटो लेकर पंचायत दर्पण पोर्टल पर उस कार्य के साथ अपलोड करना अनिवार्य होगा। संबंधित ग्राम पंचायत के पंचायत समन्व्य अधिकारी, खण्ड पंचायत अधिकारी तथा मुख्य कार्यपालन

अधिकारी जनपद पंचायत द्वारा कार्यों का निरंतर पर्यवेक्षण किया जोवगा। प्रत्येक निर्माण कार्य का मूल्यांकन संबंधित उपयंत्री द्वारा प्राक्कलन में किये गये प्रावधानों के परिप्रेक्ष्य में स्थल पर संपादित हुये कार्य का भौतिक निरीक्षण कर समय-समय किया जावेगा ।

प्रत्येक कार्य को माप पुस्तिका में दर्ज करना होगा, माप पुस्तिका की स्केन प्रति पंचायत दर्पण पर कार्य के साथ उपलोड करना होगी।

प्रत्येक कार्य का सत्यापन सहायक यंत्री या अनुविभागीय अधिकारी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा द्वारा किया जावेगा।

कार्यों के मूल्यांकन एवं सत्यापन के संबंध में पंचायत एवं ग्रामीण विकास द्वारा समय-समय पर जारी निर्देश पूर्ववत प्रभावी रहेंगे।

गुणवत्ता नियंत्रण

कार्य की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही को मान्य नहीं किया जावेगा। स्तरहीन गुणवत्ता पाये जाने की स्थिति में कार्य एजेंसी के साथ-साथ तकनीकी पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारी भी उत्तरदायी होंगे।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा पंच परमेश्वर योजना में सीमेंट-कांक्रीट निर्माण कार्य में गुणवत्ता नियंत्रण हेतु जारी समस्त निर्देश पूर्ववत प्रभावी रहेंगे।

सीमेट कांक्रीट के अतिरिक्त अन्य ऐसे कार्य जिनके संबंध में पूर्व से निर्देश जारी हैं वह प्रभावी रहेंगे। अन्य कार्यों के संबंध में सुझावात्मक डिजाइन, ड्राइंग तथा गुणवत्ता हेतु मापदण्ड राज्य स्तर से तैयार कर जारी किये जायेंगे। जिनका पालन अनिवार्य होगा।

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