महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम (Mgnerga)

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम मध्यप्रदेश

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यह योजना भारत सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 के तहत संचालित है। महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम केन्द्र सरकार का एक फ्लेगशिप कार्यक्रम है, जो देश के ग्रामीण क्षेत्रों में गृहस्थियों की आजीविका की सुरक्षा को प्रत्येक ऐसी गृहस्थी को जिसके व्यस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम सौ दिनों की गारंटीकृत मजदूरी उपलब्ध करना है। यह अधिनियम 5

सितम्बर 2005 को बना एवं 2 फरवरी 2006 को प्रथम चरण में देश को पिछड़े 200 जिलों मे लागू किया गया। इसके बाद 2007-08 में द्वितीय चरण में देश के 130 जिलों में तथा तीसरे चरण में देश के सम्पूर्ण जिलों में लागू किया गया।

इसी प्रकार यह अधिनियम मध्यप्रदेश के सभी जिलों में वर्तमान में लागू है तथा यह पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पंचायतीराज संस्थाओं के माध्यम से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा / महात्मा गांधी नरेगा) के रूप में कार्यरत है। यह योजना हमारे “काम के अधिकार की वास्तविकता बोधक है।

इस योजना के द्वारा मुख्यतः स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण एवं रोजगार के सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साधन बढ़े है सामाजिक एवं आर्थिक विकास हुआ है।

इससे सूखा, बनों का विनाश एवं मृदा अपरदन के कार्य कम हुये है सिंचाई क्षमता बढ़ने से आर्थिक विकास हुआ है और पिछले तीन दशकों से व्याप्त गरीबी में कमी आई है।

इस योजना में मुख्यतः जल सरंक्षण और जल संचय, सूखारोपी, भूमि सुधार एवं सिंचाई सुविधा पारंपरिक जल निकायों का नवीकरण, भूमि विकास, बाढ़ नियंत्रण संक्षण कार्य, सभी मौसमों में ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच की व्यवस्था एवं स्थाई परिसम्पत्तियों का निर्माण एवं रख रखाव शामिल है। महात्मा गांधी नरेगा का विभिन्न स्तरो पर ढांचा

महात्मा गांधी नरेगा के क्रियान्वयन के लिए देष के प्रत्येक स्तर पर अलग-अलग संस्थाएँ दायित्वों का निर्वहन करती है केन्द्र स्तर पर भारत शासन का ग्रामीण विकास विभाग प्रमुख विभाग है। राज्य स्तर पर मध्यप्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अन्तर्गत मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद का गठन किया गया है।

जिला स्तर पर कार्यक्रम अधिकारी जिला पंचायत, जनपद स्तर पर अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी जनपद पंचायत एवं ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत इसके क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार है। ग्राम सभा के समक्ष वार्षिक कार्ययोजना (Self Of Project) तैयार की जाती है जिसके आधार पर पूरे वर्ष कराये जाने वाले कार्यों की योजना बनाई जाती है।

कार्य करवाने के लिए मुख्य ऐजेन्सी संरपंच ग्राम पंचायत होता है तथा वह कार्य पूर्णता के लिए जिम्मेदार होता है। योजना का उदेश्य

• ग्रामीण क्षेत्र के परिवारों को अकुशल श्रम (मजदूरी करने के हेतु एक वित्तीय वर्ष में 100 दिवस का श्रम मूलक रोजगार उपलब्ध कराना।

• वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत वन भूमि पर हक प्रमाण पत्र धारक परिवारों को एवं आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में 150 दिवस का श्रम मूलक रोजगार उपलब्ध कराना। • ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों का सृजन करना।

योजना का क्रियान्वयन • इच्छुक परिवार को ग्राम पंचायत में पंजीयन उपरांत ग्राम पंचायत द्वारा जॉबकार्ड प्रदान किया

जावेगा। • जॉबकार्ड धारक द्वारा रोजगार का आवेदन करने पर 15 दिवस के अंदर रोजगार उपलब्ध कराया जायेगा।

• कोई भी ग्रामीण जॉबकार्ड धारी परिवार ग्राम पंचायत को रोजगार हेतु आवेदन दे सकता है अथवा नरेगा पोर्टल (http://nrega.nic.in) पर वर्कर लिंक पर जाकर सीधे रोजगार का आवेदन आनलाईन दर्ज कर सकता है। रोजगार की मांग दिनांक से 15 दिवस के अन्दर उसको कार्य आवंटन कर मस्टर रोल पर दर्ज किया जाने का प्रावधान है। समय पर रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ते की पात्रता है।

• कार्य मांगने वाले को आवेदन की पावती उपलब्ध कराई जावेगी। • योजना के तहत मजदूरी योजनांतर्गत वर्तमान में 204.00 रुपए प्रतिदिन मजदूरी (01 अप्रैल 2022 से)।

योजना के पात्र परिवार

ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले परिवारों के अकुशल श्रम (मजदूरी करने के इच्छुक वयस्क सदस्य |

हितग्राही मूलक कार्यों से लाभान्वित होने वाला पात्र वर्ग कार्य हेतु परिवारों के स्वामित्व वाली भूमि पर प्राथमिकता दी जाएगी, हितग्राही मूलक कार्यों के

लिये निम्नानुसार पात्रता होगी

क) अनुसूचित जाति के हितग्राही ख) अनुसूचित जनजाति के हितग्राही

ग) घुमन्तु जनजाति परिवार घ) गैर-अधिसूचित जनजातियां

ड) गरीबी रेखा से नीचे के परिवार

घ) महिला मुखिया के परिवार छ) शारीरिक रूप से विकलांग मुखिया परिवार

(ज) भूमि सुधार के लाभार्थी झ) इंदिरा आवास योजना के हितग्राही

ट) अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरागत वनवासी के तहत लाभार्थी ठ) वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 (2007 का 2)

ङ) उपरोक्त के तहत पात्र लाभार्थियों को लाभान्वित करने के बाद में परिभाषित के रूप में छोटे या

सीमांत किसान, कृषि ऋण माफी और ऋण राहत योजना के परिवार, इस शर्त पर कि ऐसे परिवारों के पास जॉबकार्ड होगा तथा कम से कम एक सदस्य अपने जमीन या घर पर शुरू की गई परियोजना पर काम करने को तैयार है।

जॉबकार्ड

‘योजना अंतर्गत रोजगार प्राप्त करने के लिए जॉबकार्ड होना अनिवार्य है जॉबकार्ड बनवाने के

लिये आवेदन कभी भी कर सकते हैं, जॉबकार्ड बनवाने हेतु ग्राम पंचायत में संबंधित परिवार मे मुखिया

को आवेदन करना होगा। आवेदन निःशुल्क है, आवेदन सादे कागज में परिवार के वयस्क सदस्यों के

विवरण के साथ निवास संबंधी आवश्यक प्रमाण पत्र देकर किया जाना होगा। निवास हेतु आवश्यक प्रमाण-पत्र जैसे- परिवार का बी.पी.एल राशन कार्ड,

प्रत्येक ग्रामीण परिवार जो उस संबंधित ग्राम पंचायत का निवासी हो। • जॉबकार्ड प्रत्येक परिवार

का बनाया जाता है व्यक्तिगत जॉबकार्ड नहीं बनाया जाता। जॉबकार्ड में नाम दर्ज परिवार के केवल वयस्क सदस्य का नाम दर्ज किया जाता है।

ग्राम पंचायत में संबंधित परिवार के मुखिया को आवेदन करना होगा। अगर ग्राम पंचायत आवेदन स्वीकार नहीं करती है, तो व्यक्ति जनपद में आवेदन कर सकता है और अगर इसके पश्चात भी आवेदन स्वीकार नहीं होने की स्थिति में पोस्ट के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है।

जॉबकार्ड ग्राम पंचायत द्वारा जारी किया जाता है। • जॉबकार्ड की वैधता 5 वर्ष के लिये होती है।

जॉबकार्ड पंजी का संधारण ग्राम पंचायत द्वारा किया जाता है। वयस्क सदस्यों के नाम जोड़ने व घटाने का अधिकार ग्राम पंचायत का होता है। .

मूल जाबकार्ड गुम हो जाने पर डुप्लीकेट जॉबकार्ड ग्राम पंचायत द्वारा जारी किया जाता है। परिवार के विघटन की स्थिति में संशोधित जॉबकार्ड जारी किया जाता है।

मांग आधारित रोजगार

रोजगार की मांगकर्त्ता को आवेदन फार्म 6 भरकर देना होगा।

आवेदन ग्राम रोजगार सहायक / ग्राम पंचायत सचिव / सरपंच/ वार्ड मेम्बर/ आगनवाडी कार्यकर्ता / मेट आदि को दिया जा सकता है। ग्राम पंचायत द्वारा आवेदक को पावती दी जायेगी।

आवेदन लिखित/ मौखिक / दूरभाष पर ऑनलाइन / नरेगा सॉफ्ट में दिया जा सकता है। ग्राम पंचायत द्वारा 15 दिवस में कार्य उपलब्ध कराना, कार्य नहीं होने पर आवेदन 3 दिवस में।

कार्यक्रम अधिकारी को उत्प्रेषित किया जाता है। ग्राम पंचायत द्वारा सामूहिक आवेदन भी स्वीकृत किये जायेंगे।

ग्राम पंचायत द्वारा एक बार में 14 दिनों का काम दिया जायेगा।

विशेष स्थिति (सूखा या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में) में 50 दिवस का अतिरिक्त अकुशल

रोजगार उपलब्ध कराया जायेगा।

योजना की विशिष्टता

आवेदक को 15 दिन के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराने पर बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान है। कार्यस्थल पर पीने के पानी, छाया स्थल, प्राथमिक चिकित्सा तथा श्रमिकों के 08 वर्ष से कम आयु

के न्यूनतम 05 या अधिक बच्चे होने पर झूलाघर की व्यवस्था होगी। कार्यस्थल पर दुर्घटना में घायल मजदूर की निःशुल्क चिकित्सा तथा मजदूर की मृत्यु अथवा

अस्थायी रूप से अपंग होने पर क्षतिपूर्ति के रूप में अधिकतम 75 हजार रुपये तक भुगतान का प्रावधान है। काम मांगने वाले को उसके निवास स्थान से 5 किमी के भीतर कार्यस्थल पर कार्य आवंटित किया जाता है। कार्य विकासखण्ड के भीतर निश्चित रूप से उपलब्ध कराया जाता है अगर श्रमिक को उसके निवास स्थल से 5 किमी की दूरी में कार्य आवंटित नहीं किया जाता है तो उसे यात्रा भत्ता प्राप्त करने की पात्रता होगी। मजदूरों को अतिरिक्त मजदूरी के रूप में मजदूरी दर का दस

प्रतिशत भुगतान किया जाएगा।

मजदूरी का भुगतान

महात्मा गांधी नरेगा के तहत समय पर मजदूरी भुगतान हेतु निम्न प्रावधान किए गये है • मजदूरी न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 प्रावधान के अनुसार।।

• मजदूरी का भुगतान टास्क रेट के आधार पर होगा। जितना काम उतना दाम

.

लिंग के आधार पर मजदूरी भुगतान में भेदभाव नही होगा ।

• मजदूरी का भुगतान मस्टर बंद होने के 15 दिवस के भीतर होगा अन्यथा 16 वे दिवस से देरी से

भुगतान का मुआवजा 0.05 प्रतिशत की दर से कुल राशि पर देना होगा। योजनांतर्गत वर्तमान में राशि रु. 204.00/- रुपए प्रतिदिन मजदूरी (01 अप्रैल 2022 से)।

मजदूर द्वारा मजदूरी की मांग की जाने पर ग्राम रोजगार सहायक द्वारा मनरेगा पोर्टल से ई-मस्टर

जनरेट करना।

प्रतिदिवस मजदूर की उपस्थिति एप्प (NMMS) में दर्ज करना। सप्ताह समाप्त होने पर ई-मस्टर में दर्ज मजदूरों की उपस्थिति मनरेगा पोर्टल में ग्राम रोजगार

सहायक द्वारा प्रविष्टि कराना। ग्राम रोजगार सहायक द्वारा ई-मस्टर की प्रविष्टि के उपरांत उपयंत्री द्वारा अधिकतम तीन दिवस में मस्टर में दर्ज कार्य का मूल्यांकन करना।

ग्राम पंचायत के सरपंच / सचिव द्वारा मस्टर का पास फार पेमेंट अंकित करना। समय पर जनपद के सहायक लेखाधिकारी एवं जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी

द्वारा फण्ड ट्रांसफर ऑर्डर (एफटीओ) जारी किया जाना।
• मजदूरी का भुगतान (e-fms-National electronic fund management system) एनईएफएसएस प्रणाली से सीधे मजदूर के खाते में पहुंचता है। महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत श्रमिक प्रबंधन कार्य प्रधान व वित्तीय प्रबंधन हेतु 01 अप्रैल 2013 से संपूर्ण प्रदेश में एक साथ इलेक्ट्रॉनिक फण्ड मैनेजमेंट सिस्टम (e-fms) लागू किया गया है। यह एक पारदर्शी व्यवस्था है।

बेरोजगारी भत्ता

महात्मा गाधी नरेगा की धारा 7 (1) के अनुसार “यदि आवेदक रोजगार के लिए रोजगार की मांग करता है और उसे आवेदन प्राप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर रोजगार प्रदान नहीं किया जाता है तो यह रोजगार की मांग करने के आवेदन या उस तारीख से जिस पर रोजगार की मांग की गई है, जो भी बाद में हो इसके अनुसार आवेदक दैनिक बेरोजगारी भत्ता का हकदार होगा।

दैनिक बेरोजगारी भत्ता कम से कम एक चौथाई की दर से होगा, वित्तीय वर्ष के दौरान पहले तीस दिनों के लिए मजदूरी पर और कम से कम चौधाई एवं वित्तीय वर्ष की शेष अवधि के लिए मजदूरी दर का आधा देय होगा। राज्य सरकार द्वारा बेरोजगारी भत्ते की दर निर्दिष्ट की जाती है, जो पहले तीस दिनों के लिए मजदूरी दर के एक चौथाई से कम नहीं हो और शेष वित्तीय वर्ष की अवधि के लिए मजदूरी दर के आधे से कम नहीं हो। बेरोजगारी भत्ते की गणना और भुगतान नरेगा सॉफ्ट के किया जाता है। चियान्वयन एजेंसी द्वारा दर्ज किए गए डेटा के आधार पर बेरोजगारी भत्ता प्रदान किया जाता है। यदि कोई बेरोजगारी भत्ता भुगतान किया गया है तो जॉब कार्ड में बेरोजगारी भत्ते की राशि की प्रविष्टि की जाती है।

कार्यस्थल पर अनिवार्य सुविधाएं मनरेगा अर्न्तगत कार्य स्थलो पर निम्नानुसार सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है।

• प्राथमिक उपचार के साधन • शुद्ध पीने का पानी

6 वर्ष से कम उम्र के वाले 5 या अधिक बच्चों की स्थिति में झूला घर • छाया की सुविधा उपलब्ध कराना होगा।

मजदूरी सामग्री अनुपात

महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत, “सभी कार्यों के लिए” ग्राम पंचायतों और अन्य विभागों द्वारा किये गये कार्यों के लिये कार्यान्वयन एजेंसियों, सामग्री घटक की लागत जिला स्तर पर कुशल और अर्धकुशल श्रमिकों की मजदूरी सहित 60:40 के अनुपात में होती है।

पेल्फ ऑफ प्रोजेक्ट

पुरे वर्ष कार्य की उपलब्धता के लिये शेल्फ ऑफ प्रोजेक्ट तैयार किया जाता है। इस हेतु शासन द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन करना होता है।

• शेल्फ ऑफ प्रोजेक्ट तैयार कर वरिष्ठ कार्यालय को देना होता है।

लेबर बजट

मनरेगा में पूरे वर्ष कार्य उपलब्ध कराने के लिये ग्राम पंचायतो द्वारा लेबर बजट बनाया जाता है

जिसमें

. कार्य की मांग की मात्रा (परिवारो की संख्या) एवं समय

सृजित श्रम दिवसों का अनुमान

अनुमानित व्यय

स्थानीय जरूरतों एवं संसाधनों की पहचान कर प्रारूप तैयार किया जाना । कार्यों को ग्राम सभा में अनिवार्य रूप से अनुमोदित किया जाना चाहिए। .

.
पंचायत को अपनी योजनाओं की रिपोर्ट जनपद को देनी होती है, जिससे उन्हें महात्मा गांधी नरेगा की वार्षिक योजना में विधिवत शामिल किया जाता है।

कार्य स्थल पर दुर्घटना क्षतिपूर्ति ● किसी व्यक्ति को कार्यस्थल पर कार्य के दौरान चोट लगने पर निःशुल्क इलाज

● अस्पताल में भर्ती होने पर दवा एवं चिकित्सक की व्यवस्था राज्य शासन द्वारा। ● अस्पताल में भर्ती रहने पर दैनिक भरते के रूप में मजदूरी का आधा भुगतान ।

• दुर्घटना के दौरान मृत्यु होने या स्थायी अपंगता होने पर आम आदमी बीमा योजना के प्रावधान लागू होना । कार्य के दौरान किसी बच्चे को चोट लगने पर निःशुल्क चिकित्सा तथा मृत्यु होने

पर स्वतत्वों का भुगतान राजा षासन द्वारा किया जाना।

रिकार्ड संधारण

मनरेगा योजनान्र्न्तगत निम्नानुसार रिकार्डो का संधारण ग्राम पंचायत द्वारा किया जाता है। 1. जॉबकार्ड वितरण पंजी

  1. ग्राम सभा बैठक एवं सामाजिक अंकेक्षण पंजी 3. कार्य की मांग एवं मजदूरी भुगतान पंजी
  2. कार्यों की पंजी 5. परिसम्पत्ति रजिस्टर
  3. शिकायत पंजी
  4. सामग्री पंजी

वित्तिय कार्यो के रजिस्टर अलग होंगे (कैश बुक, लेजर, स्टाक पंजी आदि)

रोजगार दिवस

एक निश्चित दिन को कार्य प्रारंभ होता है जिसे रोजगार दिवस कहा जाता है और उस सप्ताह को रोजगार सप्ताह” कहा जाता है। अब मनरेगा में उपस्थिति ई-मस्टर रोल पर दर्ज होती है और रोजगार सप्ताह समाप्त होने के 15 दिवस में मुगतान भी सीधे उनके बैंक / पोस्ट ऑफिस के खाते में जमा होता है।

जिला कार्यक्रम समन्वयक द्वारा सभी ग्राम पंचायतों में विशेष रूप से रोजगार दिवस का आयोजन कराया जाता है, मांग पंजीकरण के साधन के रूप में रोजगार दिवस का आयोजन किया जाता है।

अमिकों के अधिकार और शिकायतों का निवारण, ग्रामवासियों की अधूरी मांग को सही ढंग से दर्ज करने के लिए उपयुक्त आईईसी गतिविधियों का प्रभावी ढंग से उपयोग करते हुए रोजगार दिवस प्रभावी तरीके से बताया जाता है।

जीआरएस/मेट/ एसएचजी फेडरेशन के सदस्य रोजगार दिवस कार्यवाही का संचालन और अभिलेख तैयार करेंगे। जिला कार्यक्रम समन्वयक लिंक अधिकारियों को तैनात कर रोजगार दिवस के लिए निर्धारित दिनों पर निगरानी यात्राओं का संचालन करेगे।

रोजगार दिवस के दस्तावेज सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध रहेंगे और सामाजिक लेखा परीक्षा, और प्रासंगिक मापदंडों पर डेटा दर्ज किया जाएगा, नरेगा सॉफ्ट में इसकी निरंतर प्रविष्ठि की जावेगी।

रोजगार संवाद कार्यक्रम

• मध्यप्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रतिमाह एक नियत तिथि को ग्राम संवाद दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

ग्राम पंचायत में ग्राम संवाद दिवस के दिन ग्राम सभा का आयोजन किया जाता है। • कार्यक्रम का मूल उदेश्य ग्रामीणों को योजना का अधिक से अधिक लाभ दिलाना एवं योजना के क्रियान्वयन में आ रही दिक्कतों को दूर कर योजना को बेहतर कियान्वित कराना है।


• रोजगार संवाद दिवस के दिन योजना के क्रियान्वयन से संबंधित अधिकारी-कर्मचारी

उपस्थित रहकर ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही निराकरण कराना सुनिश्चित करते हैं।

कार्यक्रम में अन्य विभागों के क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा अपने विभाग की योजनाओं का

प्रचार-प्रसार किया जाता है।

सूचना, दिक्षा और संचार –

• मनरेगा के प्रमुख एवं योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिये सूचना, शिक्षा और संचार की गतिविधियां आयोजित की जाती है जैसे

• डिस्प्ले बोर्ड (जिसमे कार्य नाम एवं लागत, एजेंसी का नाम तथा कार्य पूर्ण होने की अवधि आदि

अंकित हो )

दीवार लेखन। फ्लेक्स / होर्डिंग

मुक्कड नाटक

.

. पाम्प्लेट | • प्रदर्शनी।

विचार मंच आदि।

मनरेगा कार्यो मे मशीनों का प्रयोग महात्मा गांधी नरेगा के कार्य जहाँ तक संभव हो, कार्यों का क्रियान्वयन शारीरिक श्रम का उपयोग करके निष्पादित किया जाए। ऐसे कार्य जो श्रम साध्य नहीं है वहां मशीनों का उपयोग किया जाएगा। इसमें निम्न गतिविधियों हो सकती हैं ऐसे कार्य करना जो शारीरिक श्रम द्वारा नहीं किए जा सकते,

कार्यों का स्थायित्व और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए मशीन का उपयोग किया जा

सकता है। मशीनरी के उपयोग के लिए डीपीसी या सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन मांगा लिया जाना चाहिए, मशीनों के संचालन के प्रत्येक मामले में विधिवत दस्तावेज संरक्षित होने चाहिए। संघनन (Compection) के लिए मशीनरी का उपयोग किया जा सकता है, अकुशल श्रम के लिए अलग SOR का उपयोग करने की अनुशंसा की गई है मैनुअल काम, जिसमें मशीनरी

के उपयोग से संघनन (Compection) किया जा सकता है। जहां मशीनों से कार्य किया गया हो उन कार्यों को विशेष रूप से सामाजिक लेखा परीक्षा

के लिए लिया जाना चाहिए। मशीनों के उपयोग और उनकी अनुमानित लागत के साथ-साथ उद्देश्य, जिन मशीनों का उपयोग किया गया है, उन्हें अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए। स्थानीय भाषा में कार्यस्थल डिस्प्ले बोर्ड लगा होना चाहिये।

कार्यान्वयन एजेंसियां

महात्मा गांधी नरेगा के कार्यों के लिये, कार्यान्वयन एजेंसी’ में निम्न शामिल हैं.

केंद्र सरकार या राज्य सरकार का कोई विभाग, जिला पंचायत, जनपद पंचायत, ग्राम पंचायत या पासन का कोई भी विभाग

स्व-सहायता समूह

इस योजना के तहत सरकार द्वारा किए गए किसी भी कार्य के कार्यान्वयन को शुरू करने के लिए राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त उपयोगकर्ता संघ / स्व सहायता समूह कार्यान्वयन एजेंसियां भी हो सकती हैं। कम से कम पचास प्रतिशत कार्य ग्राम पंचायतों को आवंटित किया जाएगा।

माप पुस्तिका

प्रत्येक कार्य की माप, माप पुस्तिका में इन्द्राज किया जाता है। माप पुस्तिका में माप अंकित करते समय माप दर्ज करने हेतु दिये गये निर्देषो अनुसार भाप प्रविष्ठि की जाती है। माप पुस्तिका सक्षम अधिकारी द्वारा जारी की जाती है, जिसमें कमद नम्बर होते है माप पुस्तिका में माप की जानकारी तकनीकी अधिकारी द्वारा प्रविष्ठि की जाती है माप पुस्तिका जारीकतों कार्यालय में जमा की जाती है। यह एक महत्वपूर्ण अभिलेख है।

मनरेगा के कार्यों की जिओ टेगिंग

मनरेगा योतनान्तंगत कराये गये कार्यों की जिओ टेगींग मुक्न मनरेगा मोबाईल एप्पलिकेशन के द्वारा की जाती है जिसके लिये प्रत्येक ग्राम पंचायत के ग्राम रोजगार सहायक (MGNREGA Spatial Enumerator) को यूजर आईडी एवं पासवर्ड प्रदान किया गया है जिससे जिओ टेगिंग की जाती है। मनरेगा अर्न्तगत कार्य स्थल पर कार्य प्रारंभ से पहले, कार्य के मध्य में एवं कार्य के अंत में फोटो अपलोड की जाती है।

मनरेगा भुवन एप्पलीकेशन

भारत सरकार ने ग्रामीण लोगों की आजीविका सुरक्षा बढ़ाने के लिए मनरेगा अधिनियमित किया है इसके तहत देश भर में जल संचयन, सूखा राहत, बाढ़ नियंत्रण गतिविधियों, स्वच्छता से संबंधित संपत्तियां बनाई जाती हैं तथा उनको भुवन मनरेगा पोर्टल में अपलोड किया जाता है।

जन मनरेगा एप्पलीकेषन

ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) ने 19 जून 2017 को जनमनरेगा मोबाइल एप्लिकेशन (CCMA) लॉन्च किया। जनमनरेगा जमीनी स्तर से सूचना के प्रवाह के लिए एक एक नागरिक केंद्रित एप्प है, जो नागरिकों को मनरेगा के सिस्टम से जोड़ता है। जिससे कोई भी व्यक्ति मनरेगा की जानकारी प्राप्त कर सकता है।

सुशासन की दिशा में एक पहल, जनमनरेगा सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक इंटरफेस है जनमनरेगा को ग्रामीण विकास मंत्रालय, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) और राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी, हैदराबाद) के सहयोग से विकसित किया गया है।

नरेगा सॉफ्टवेयर

Management Information System (MIS) / (NREGASoft)

(https://nrega.nic.in)

मनरेगा योजना की जानकारी एवं डाटा नरेगा सॉफ्टवेयर में प्रविष्ठ किया जाता है जिसमें

जाबकार्ड अद्यतन करना खाते फ्रीज करना

कार्य की मांग की एण्ट्री नरेगा सॉफ्ट में करना

कार्य का आवंटन करना

मस्टररोल पर उपस्थिती दर्ज करना

कार्य पंजीयन तथा तकनीकी एवं प्रषासनिक स्वीकृति

ई-मस्टररोल जारी करना वेज लिस्ट जनरेट करना

एफटीओ जनरेट करना

वेंडर पंजीयन करने की प्रक्रिया

सिक्योर साफ्टवेयर

SECURE-(Software for Estimate Calculation Using Rural Rates for

Employment) सिक्योर साफ्टवेयर तकनीकी स्वीकृति हेतु बनाया गया है जिसका उपयोग ग्राम पंचायत अर्न्तगत होने वाले कार्यों की तकनीकी स्वीकृति के लिये किया जाता है। इस साफ्टवेयर में ग्राम पंचायत ग्राम रोजगार सहायक द्वारा वर्क जनरेट करने के उपयंत्री एवं सहायक यंत्री द्वारा तकनीकी स्वीकृति प्रदान की जाती है त्यात जनपद पंचायत द्वारा प्रषासकीय स्वीकृति देकर कार्य प्रारंभ किया जाता है।

राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी सॉफ्टवेयर

National Mobile Monitoring Software (NMMS)

ग्रामीण विकास मंत्री द्वारा 21 मई 2021 को राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी सॉफ्टवेयर (NMMS) ऐप लॉन्च किया गया था। इस ऐप का उद्देश्य अधिक पारदर्शिता लाना और योजनाओं की उचित निगरानी सुनिश्चित करना है। NMMS ऐप महात्मा गांधी नरेगा कार्यस्थलों पर श्रमिकों की वास्तविक समय में उपस्थिति लेने के साथ-साथ जियो टैग की गई तस्वीर लेता है।

यह ऐप कार्यक्रम की निगरानी बढ़ाने में मदद करता है। नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग ऐप महात्मा गांधी नरेगा श्रमिकों के लिए सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए लागू है। इस सॉफ्टवेयर से दिन में दो बार उपस्थिति ली जाती है प्रथम एवं द्वितीय समय की उपस्थिति में 4 घंटे का अंतर होना चाहिए।

मेट

ग्राम पंचायतों में कार्य के सुगम संचालन के लिये गेट की व्यवस्था की गई है जिसके द्वारा कार्यस्थल पर श्रमिको को कार्य आवंटन एवं निगरानी की जाती है।

यह सुनिश्चित करना कि सभी सामी समय पर कार्य स्थल पर उपस्थित हो और केवल कार्यस्थल पर ही निर्धारित राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी सॉफ्टवेयर में उपस्थिति लेता है। मेट के द्वारा कार्यस्थल की सुविधा सुनिश्चित करना और श्रमिकों के जॉब कार्ड नियमित रूप से अपडेट किये जाते है। मेट को अर्धकुपल मजदूर की दरो से भुगतान किया जाता है।

फाईल ट्रैकिंग साफ्टवेयर

(UTTARA) Universal Transparent Tracking of Applications and Responses to Applications. मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद में आवेदकों द्वारा दिये गये पत्रों पर अविलंब कार्यवाही एवं प्रचलित फाइलों के ट्रैकिंग के लिए उत्तरा साफ्टवेयर का प्रयोग किया जाता है।

“उन्नति परियोजना

यह परियोजना “उन्नति महात्मा गांधी नरेगा अर्न्तगत कौशल उन्नत को बढावा देने के लिये तैयार की गई है। जिससे नरेगा श्रमिकों की आजीविका में सुधार हो, ताकि ये वर्तमान से आगे बढ़ सकें। उनकी महात्मा गांधी नरेगा से निर्भरता कम हो एवं वे पूर्ण रोजगार प्राप्त कर सके।

लोकपाल

मनरेगा अर्न्तगत समस्यों के निराकरण के लिये लोकपाल की पदस्थापना की गई है जो जिला स्तर पर मनरेगा से सम्बंधित समस्याओं का निराकरण करेंगे।

सामाजिक अंकेक्षण

सामाजिक अंकेक्षण ग्रामीण समाज (ग्राम सभा) द्वारा किया जाने वाला अंकेक्षण है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से कार्यक्रम / योजना एवं उनके क्रियान्वयन का मूल्यांकन प्रभाव एवं सत्यापन समाज द्वारा किया जाता है।


(लेखा-जोखा) सामाजिक अंकेक्षण मात्र लेखा या विकास योजनाओं में व्यय रात्रि के हिसाब-किताब तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से कार्यों की गुणवत्ता, सार्थकता व उपयोगिता ग्रामीण सहभागिता द्वारा निर्धारित की जाती है। योजनाओं से लोगों के जीवन स्तर में सुधार का आकलन किया जाता है।

महात्मा गांधी नरेगा एवं दीनदयाल अंत्योदय योजना का समन्वय दीनदयाल अंत्योदय योजना (डीएवाई-एनआरएलएम) के समन्वय से महात्मा गांधी

नरेगा के कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है। ग्राम स्तरीय स्व-सहायता समूह एवं क्लस्टर स्तरीय संगठनो के द्वारा मनरेगा के कार्यों का क्रियान्वयन किया जाता है।

जिसके अर्न्तगत महिला किसान सशक्तिकरण के तहत चिन्हित किसानों को सुविधा परियोजना (एमकेएसपी) और अन्य स्थायी कृषि आधारित कार्य किये जाते हैं। इसके अन्तर्गत खेत के तालाब, खोदे गए कुए और अन्य जल संचयन संरचनाएं, वर्मी/नाडेप खाद गड्ढे, मवेशी शेड, बकरी शेड, पोल्ट्री शेड, सुअर पेड़ आदि कार्य किये जाते हैं।

‘प्रिय मित्र’ पत्र से रोजगार की दस्तक हर ग्रामीण घर तक

MITR (Main Streaming is their right) महात्मा गांधी नरेगा के तहत हर जॉबकार्ड धारी को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिये प्रिय मित्र पत्र की पहल की गयी है।

इसके तहत प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम रोजगार सहायकों द्वारा मनरेगा के प्रगतिरत कार्यों के बारे में प्रतिमाह प्रिय मित्र पत्र देकर ग्रामीणों को बताया जा रहा है।

जिससे जॉबकार्डधारी परिवार को इस बात की जानकारी मिल सके कि ग्राम पंचायत में कौन-कौन से कार्य चल रहे हैं जिन पर जॉबकार्डधारी परिवार काम करने के लिए आ सकता है।

साथ ही उसे रोजाना मिलने वाली मजदूरी की दर ग्रामीण परिवार द्वारा साल में किये जाने वाले कार्य दिवस तथा मजदूरी पर मिलने वाली राशि आदि की जानकारी दी जा रही है।

हितैषी (HITESHI-Hitgrahi Enabled To Invest and Suggest Household for Implementation) महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत पात्र हितग्राही अपने खेत एवं आवासीय परिसर में मनरेगा की जिन उपयोजनाओं का लाभ लेना चाहते है. हितेषी आवेदन पत्र दे सकते हैं।

हितेषी आवेदन पत्र ग्राम पंचायत द्वारा ग्राम पंचायत के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को मुहैया कराये गये है। इस कार्यवाही से हितग्राहियों को अपने खेत एवं आवासीय परिसर में महात्मा गांधी नरेगा की उपयोजनाओं का लाभ लेना आसान हुआ हैं।

कोई भी पात्र हितग्राही हितग्राहीमूलक उपयोजनाओं का लाभ लेना चाहता हो, वह हितैषी आवेदन ग्राम पंचायत में दे सकता है, ग्राम पंचायत हितग्राही की पात्रता का परीक्षण कर उसे उपयोजना का कार्य करवाती है। मनरेगा योजनार्न्तगत किये जाने वाले अनुमेय कार्य — Permissibal Work

श्रेणी अ इस श्रेणी में लोकहित से संबंधित प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के कार्य प्रावधानित है जैसे

• जल संरक्षण और जल संचयन, भूजल में सुधार जैसे भूमिगत बांध, मिट्टी के बांध, स्टॉप डैम, पीने के पानी के स्रोतों सहित भूजल को रिचार्ज करने पर विशेष ध्यान देने वाले चेक डेम। • वाटरशेड प्रबंधन के कार्य जैसे कंटूर ट्रॅब, टेरेसिंग, कंटूर बंड, बोल्डर चेक, गेबियन स्ट्रक्चर

और स्प्रिंग शेड विकास

• सूक्ष्म और लघु सिंचाई कार्य और सिंचाई नहरों और नालों का निर्माण, नवीनीकरण और

रखरखाव। • सिंचाई टैंको और अन्य जल निकायों के विलवणीकरण और पुराने बावड़ियों के संरक्षण सहित पारंपरिक जल निकायों का नवीनीकरण ।

• आम और वन भूमि में वनरोपण, वृक्षारोपण और बागवानी, सड़क के किनारे, नहर के बांध तालाब के किनारे और तटीय क्षेत्रों में घरों को सूदखोरी का अधिकार प्रदान करना। • चारागाह विकास, बारहमासी घास जैसे साइलो आदि।


• सामान्य भूमि में भूमि विकास कार्य ।

• बांस रबड़ और नारियल के बागान आदि।

श्रेणीव सामुदायिक या व्यक्तिगत परिसम्पत्तियां निर्माण • कुएं खेत तालाब और अन्य पानी की संरचनाएं।

• भागवानी रेशम उत्पादन, वृक्षारोपण अन्य प्रकार के वृक्षारोपण और कृषि वानिकी के माध्यम से आजीविका में सुधार, परिवारों की परती/ बंजर भूमि का विकास।

• पशुधन को बढ़ावा देने के लिए मुनियादी ढांचे का निर्माण करना, जैसे कि पोल्ट्री

शेल्टर, बकरी आश्रय, सुअर पालन आश्रय, पशु आश्रय और मवेशियों के लिए चारा

कुछ। • सार्वजनिक भूमि पर मौसमी जल निकायों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण करना, जैसे मछली सुखाने वाले यार्ड, भंडारण सुविधाएं और मत्स्य पालन को बढ़ावा देना, जैव उर्वरक (एनएडीईपी, वर्मी कम्पोस्टिंग आदि)।

श्रेणीस सामुहिक अधोसंरचनात्मक परिसंपत्ति निर्माण

• जैव उर्वरक (एनएडीईपी और वर्मी कम्पोस्टिंग पिट्स) और कृषि उपज के लिए पक्के भंडारण सुविधाओं सहित कटाई के बाद की सुविधाओं के लिए आवश्यक टिकाऊ बुनियादी ढांचे का निर्माण करके कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए काम

करना। श्रेणी द ग्रामीण अधोसंरचना

• राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (2013) के प्रावधानों को लागू करने के लिए खाद्यान्न भंडारण संरचनाओं का निर्माण करना।

सरपंच के अधिकार एवं दायित्व

ग्राम पंचायत का सरपंच पंचायत मनरेगा अधिनियम के प्रावधानों को क्रियान्वित करने के लिये उसके द्वारा पारित प्रस्ताव एवं संकल्पों को राज्य शासन के समस्त निर्देशों तहत योजना को क्रियान्वित करने के लिये प्रत्यक्षतः उत्तरदायी होगा। इसके अतिरिक्त निम्न उत्तरदायित्व भी सरपंच का होगा कार्य योजना अनुसार प्रषासकीय स्वीकृति प्रदान करना।

समय-समय पर रोजगार दिवस आयोजित करके जागरूकता पैदा करना। महात्मा गांधी नरेगा के तहत सभी कमजोर परिवार और समुदाय को कार्य उपलब्ध कराना

जॉबकार्ड पंजीकरण की प्रक्रिया सुनिश्चित करना, जॉब कार्ड का वितरण आवेदकों को काम उपलब्ध कराना

ग्राम सभा की बैठकों और सामाजिक अंकेक्षण की सुविधा प्रदान करना

ग्राम में एकीकृत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन अभ्यास सुनिश्चित करना

कार्यों की योजना बनाना और निष्पादन करना प्रतिदिन कार्य स्थल की वीजिट करना

कार्यस्थल पर निर्धारित आवश्यक सुविधाओं की जांच करना समयानुसार भुगतान सुनिश्चित कराना

यह सुनिश्चित करना कि कार्य स्थल पर प्रत्येक व्यक्ति को ले आउट दिए गए हैं. श्रमिकों के समूह ताकि श्रमिकों को आवश्यक उत्पादन का पता चल सके.

प्रति दिन मजदूरी दर अर्जित करने के लिए दिया जाना यह सुनिश्चित करना कि सभी श्रमिक कार्यस्थल पर समय पर उपस्थित हों


केवल कार्यस्थल पर निर्धारित उपस्थिति रिकार्ड में उपस्थिति अंकित करनावा महात्मा गांधी नरेगा से संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण करना जॉबकार्ड नियमित अपडेट हो इसका परीक्षण करना।

चिकित्सा सहायता पेयजल और छाया, किसी भी साइट पर काम करने वाली महिलाओं के साथ छह साल से कम उम्र की 5 या अधिक बच्चे होने पर कार्यस्थल पर उनके लिये झूलाघर की सुविधा सुनिश्चित करना।

कार्य स्थल पर केच उपलब्ध कराना। ऐसे बच्चों की देखभाल के लिए नियुक्त अकुशल श्रमिक को पूर्ण मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित

करना। महात्मा गांधी के तहत सृजित संपत्तियों की जियो टैगिंग सुनिश्चित कराना।

ग्राम सभा के समस्त सदस्यों के द्वारा कार्य का व्यापक प्रचार प्रसार करवाना।

मनरेगा पोर्टल एवं एमआईएस एप्लीकेशन

कार्यक्रम की प्रभावी निगरानी के लिए कंप्यूटर आधारित निगरानी आवश्यक है। ऑनलाइन मॉनिटरिंग एवं डाटाएंट्री का कार्य मुख्य रूप से पंचायत स्तर पर संचालित होता है इसमें मुख्य स्टेक

होल्डर इस प्रकार है 1. हितग्राही

  1. पंचायत (ग्राम, जनपद, जिला पंचायत)

3 क्रियान्वयन एजेंसी (ग्राम पंचायत लाइन विभाग आदि )

4 कार्यक्रम अधिकारी

51 जिला समन्वय अधिकारी राज्य ग्रामीण विकास विभाग

ग्रामीण विकास विभाग भारत सरकार

ऑनलाइन मॉनिटरिंग प्रणाली को संचालित करने के लिए इंटरनेट एक्सप्लोरर पर क्लिक करें, पता http://nrega.nic.in साइट का मुख पृष्ठ प्रदर्शित किया जाएगा। प्रत्येक उपयोगकर्ता के लिए लिंक दिए गए हैं। उपयोगकर्ता केवल उनके संबंधित लिंक पर क्लिक करते हैं और डेटा प्रविष्टि और रिपोर्ट बनाना शुरू करते हैं, ग्राम पंचायत दिए गए आईडी पासवर्ड डालकर लोग इन कर सकते है

सिक्योर पोर्टल

THE MAUTUA GANDHI NATIONAL RAL ENORMENT GUARANTEE ACT 205

SECURE(Software for Estimate Calculation Using Rural rates for Employment SECURE (सॉफ्टवेयर रोजगार के लिए ग्रामीण दरों का उपयोग करके अनुमानित गणना के लिए)– महात्मा गांधी नरेगा (परियोजना सूचना और लागत (Estimate) का एक अनुकूलित सॉफ्टवेयर है, जिसका उपयोग महात्मा गांधी नरेगा में किया जाता है।

उद्देश्य


कार्यक्रम की प्रभावी निगरानी के लिए कंप्यूटर आधारित निगरानी आवश्यक है। कार्य का Estimate ऑनलाइन बनाया जाता है और यह इंटरनेट में उपलब्ध है, कभी भी और कहीं भी इसे एक्सेस किया जा सकता है। इसके अलावा कोई भी व्यक्ति कार्य Estimate की स्थिति देख सकता है। इसके अलावा रिपोटों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है।

NREGA Buff

BECURE

GP

DPC

SECURE

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम की उप योजनायें शान्तिधाम

समस्त ग्रामों में जहाँ अंतिम संस्कार हेतु समुचित व्यवस्था नहीं है, वहाँ श्मशान भूमि एवं कब्रिस्तान, भूमि पर पानी, छाया, प्लेटफार्म, स्वच्छ एवं पवित्र वातावरण बनाने हेतु कार्य करना ।

शान्तिधाम में समतलीकरण कार्य, वृक्षारोपण कार्य, पानी की समुचित व्यवस्था हेतु कुआं का निर्माण, कच्चे चबूतरे जोड़ने वाली सड़क का निर्माण तथा सुरक्षा की व्यवस्था हेतु सी.पी.टी. का निर्माण किया जा सकता है। शासकीय भूमि जहाँ ग्राम सभा का अनुमोदन प्राप्त हैं, जो विवादित नहीं है तथा राजस्व विभाग के सक्षम अधिकारी से आवंटित है। भूमि पर शान्तिधाम निर्माण कार्य किया जाना है।

हितैषी कपिलधारा योजना वर्षा आधारित एवं सिचाई सुविधा विहीन कृषि क्षेत्रों में वर्षा की अनियमितता अथवा कमी के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित हो, कृषि भूमि की सिंचाई हेतु पानी का कारगर स्त्रोत उपलब्ध कराने एवं कृषि उत्पादन में सुनिश्चितता तथा कृषकों की आजीविका में गुणात्मक सुधार हेतु सिंचाई सुविधा

उपलब्ध कराने हेतु कृषक की एक से ढाई एकड़ तक की निजी स्वामित्व वाली कृषि भूमि पर कुआं एक खेत तालाब का कार्य किया जाता है। नंदन फलोद्यान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनांतर्गत संचालित नंदन फलोद्यान उपयोजना

(हितग्राहीमूलक) के अंतर्गत पात्र हितग्राही की निजी भूमि पर उद्यानिकी प्रजाति का फलोद्यान विकसित करने का कार्य किया जाता है।

निर्मल वाटिका वृक्षों के विकास के लिये स्थानीय स्तर पर जैविक खाद का निर्माण एवं ग्रामीण क्षेत्र में अपशिष्ट पदार्थ का उचित निपटारे हेतु निर्मल वाटिका योजना बनाई गयी है। इसके अंतर्गत निम्नानुसार कार्य किये जा सकते हैं हितग्राही के घर की बाड़ी में कम से कम पांच बहु उपयोगी वृक्ष (नीम, आंवला,अमरूद, आम, केला, पपीता आदि) हितग्राही के घर में बनने वाले प्रत्येक शौचालय के साथ एक जोड़ा

लीचिंग पिट का निर्माण।

मीनाक्षी

मीनाक्षी उपयोजना के तहत अधिनियम के पात्र हितग्राही की निजी भूमि पर बने सिंचाई तालाब अथवा पोखर द्वारा सिंचाई के साथ ही मछली पालन और उत्पादन की अतिरिक्त गतिविधि आजीविका का सुदृढीकरण किया जाता है।

योजनांतर्गत निर्मित तालाबों में मत्स्य पालन हेतु सफर (Indian Major Carp) कतला, रोहू, मुगल प्रजातियों का पालन तथा निर्मित नर्सरियों में मत्स्यबीज उत्पादन आजीविका सुदृढीकरण करना उक्त प्रजातियों का मिश्रित मत्येखर बीज उत्पादन करना। उपयोजनांतर्गत पर्यावरणीय स्थिरता एवं पारिस्थितिकी संतुलन एवं हितग्राहियों के लिये आय संसाधन का सृजन करना। भूमि शिल्प

भूमि शिल्प उपयोजना कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए भूमि सुधार के कार्यों से संबंधित है। इसके तहत अनउपजाऊ भूमि को कृषि योग्य बनाने में सहायता प्रदान की जाती है। योजना में भूमि विकास के कार्य “जैसे समतलीकरण एवं मेड बंधान आदि कराये जाते है। रेशम

रेशम उपयोजना का उददेश्य है पर्यावरणीय स्थिरता एवं पारिस्थितिकी संतुलन एवं हितग्राहियों के लिये

आय संसाधन का सृजन करना रेशम उपयोजना निजी एवं शासकीय भूमि पर शहतूत प्रजाति के.

वृक्षारोपण कार्य को बहूउद्देशीय गतिविधि में शामिल कराने से संबंधित है।

इसमें प्रदेश के रेशम संचालनालय द्वारा रेशम उत्पादन हेतु अनुशंसित बैतूल, गुना, धार, रीवा सतना, शहडोल, उमरिया, सीधी देवास, झाबुआ, खण्डवा, खरगौन, बड़वानी, मण्डला, डिण्डोरी, सिवनी, बालाघाट, हरदा, छिन्दवाड़ा, कटनी, बुरहानपुर जिले शामिल किये गये हैं। सहस्त्र धारा

सिंचाई सुविधा का विस्तार सहस्त्र धारा उपयोजना के माध्यम से रूपाकित सिचाई क्षमता के पूर्ण उपयोग हेतु एम. एन.आर.ई.जी.एस. म.प्र. के अंतर्गत उपलब्ध धनराशि के माध्यम से सिचाई परियोजनाओं के कमाण्ड क्षेत्र को विकसित करना।

सिचाई परियोजनाओं के कमाण्ड क्षेत्र में वॉटरसोर्स तथा फील्ड चैनल विस्तार के कार्य एवं नहरों का मरम्मत कार्य किये जा सकते हैं। पात्रता : कमाण्ड क्षेत्र के अंतर्गत सभी ग्रामीणजन

निर्मलनीर इस उपयोजना का प्रमुख उददेश्य निस्तार एवं पीने के लिये स्वच्छ पानी की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित करना। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम की आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त स्थलों पर सामुदायिक उपयोग के लिये कुओं का निर्माण करना।

ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम में निस्तार व पीने के पानी के लिये पूर्व से मौजूद संरचनाओं जैसे कुएं, हैण्डपंप इत्यादि के जलसंरक्षण व भूजल संवर्धन हेतु संरचनाओं के कैचमेंट एरिया में संबंधित माइक्रो वॉटरशेड में कंटूरट्रेंच, परकोलेशन तालाब, नालाबंधान, कुओं रिचार्ज इत्यादि के कार्य कराया जाना।

नवनिर्मित तथा पूर्व से निर्मित कुओं एवं हैण्डपंप के आसपास गंदे पानी के निपटारे हेतु आवश्यक संरचनाओं तथा सोकपिट का निर्माण करना।

पात्रता : समस्त ग्रामीणजन | महात्मा गांधी नरेगा- नदी नालों पर श्रृंखलाबद्ध जल संरचनाओं का निर्माण (सामुदायिक विकास गतिविधि)

नदी नालों में बहते पानी को रोककर भूजलसंवर्धन का कार्य किया जाना है। इसक अंतर्गत निम्नानुसार कार्य किये जा स बोल्डर से नालाबधान, रॉक फिलडेम्, चेकडेम (ब) निस्तारण यिनबंधान, बेराज, स्टापडेम कमकॉजवे, पिकअप वियर आदि।

प्रदेश के सालानी के एवं माईनर के रखरखाव कार्य हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण लघु सिचाई तालाब एवं माईनर नहरों का रखरखाव रोजगार गारंटी स्कीम- म.प्र. के तहत प्रदेश के समस्त जिले जिसमे जल संसाधन विभाग की समस्त वृहद माध्यम एवं लघु सिचाई परियोजनाओं की माईनर नहरों के साथ कृषि।

ग्राम पंचायतों द्वारा निर्मित संरचनाको कमाण्ड क्षेत्र में स्थित नहरों का साधारण रखरखाव का कार्य। इसके अतिरिक्त जल संसाधन विभाग के लघु सिचाई तालाबों एवं कृषि तथा ग्राम पंचायतों द्वारा निर्मित तालाबों के बंधान का रखरखाव कार्य। ग्रामीण क्रीडांगन

ग्रामीण क्षेत्रों के खेलों के लिये आवश्यक सुविधायुक्त खेल मैदान के अभाव के कारण, खेलों में अपनी प्रतिमा को उच्च स्तर पर प्रदर्शित करने के लिये मिलने वाले अवसरों से वंचित न रहे. साथ ही ग्रामीणों को अतिरिक्त रोजगार के अवसर प्रदान करने हेतु खेल मैदानों का विकास।

शासकीय शिक्षण संस्थाओं के प्रांगण में खेल मैदान हेतु स्थल चयन का प्रस्ताव शिक्षण संस्था प्रमुख द्वारा क्रीड़ा अधिकारी के सहयोग से तैयार किया जायेगा।

ग्राम पंचायत अंतर्गत शासकीय भूमि खेल मैदानों का प्रस्ताव संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा कीडा अधिकारी के सहयोग से तैयार किया जावेगा। प्रस्तावित कार्य खेल मैदान विकसित करने हेतु समतलीकरण कार्य खेल मैदान के चारों ओर वृक्षारोपण कार्य, खेल मैदान के चारों ओर सुरक्षा हेतु सीपीटी / ड्राईबोल्डवर्स वॉल, सीपीटी से प्राप्त मिट्टी के द्वारा

दर्शकों के बैठने हेतु सम्पनुमा (गैलरी) का निर्माण।

कामधेनू

उद्देश्य- म.प्र. गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड के अंतर्गत जीवित पंजीकृत ग्रामीण क्षेत्र स्थित गौशालाएं, जिनमें कम से कम 100 पशु पिछले एक वर्ष से उपलब्ध रहे हों, ऐसी ग्रामीण क्षेत्रों की

गौशालाओं का विकास करना

कार्यों का चयन, कार्यों का चिन्हांकन सरपंच सचिव, पटवारी उपसंचालक पशु चिकित्सक द्वारा नामांकित प्रतिनिधि, उपयंत्री एवं गौशाला प्रबंधक के समन्वय से किया जावेगा। गौशाला प्रबंधक द्वारा निर्धारित प्रपत्र ग्राम पंचायत को आवेदन दिया जावेगा। ड्रायबोल्डर्सवॉल का निर्माण स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री से ही किया जाये वृक्षारोपण कार्य गौशाला के स्वामित्व की भूमि पर ही किया जा सकेगा।

चारागाह विकास का कार्य गौशाला के समीप स्थित शासकीय भूमि पर किया जा सकेगा। मजदूरी सामग्री अनुपात 60-40 की बाध्यता के कारण अन्य कार्य विधायक / अन्य शासकीय मद / गौशाला के अंशदान के अभिसरण से प्रस्तावित कार्य- ग्राम से गौशाला तक जी.एस.वी. स्तर का पहुंच मार्ग, सीपीटी / ड्राय बोल्डरवॉल,

पेयजल कूप/लघु सालाब, वृक्षारोपण, चारागाह विकास, गोबर की खाद तैयार करने हेतु खंती का निर्माण। शर्ते प्रस्तावित गौशाला का म.प्र. गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड के अंतर्गत जीवित पंजीकृत हो तथा जिनमें कम से कम 100 पशु पिछले एक वर्ष से उपलब्ध हों। 100 से 400 गायों हेतु गौशालाओं का निर्माण प्रस्तावित किया जा सकता है। शैलपर्ण

मनरेगा की इस उपयोजना का उद्देश्य वनस्पति विहीन पहाड़ियों व टीलों पर कंटूर ट्रेच. गली प्लग, बोल्डर चेक बनाकर मिट्टी का कटाव रोकना साथ ही कंटूर ट्रेंच में वर्षा का जल एकत्रित होने से मिट्टी की नमी का संरक्षण और भूजल संवर्धन किया जाना है।

मिट्टी व पानी के संरक्षण के उपरांत वनस्पति विहीन पहाड़ियों व टीलों पर जलाऊ लकड़ी व चारा उत्पादन वनस्पति का विकास करना और निचले क्षेत्रों में बाढ़ के विरूद्ध सुरक्षा व्यवस्था के प्रयास करना इस सामुदायिक विकास गतिविधि अंतर्गत छोटे छोटे डबरों का निर्माण नालों पर पत्थरों के अवरोधक (बोल्डर चेक) व पहाड़ी की तलहटी पर पशु अवरोधक खंती निर्माण आदि कार्य कराए जाते हैं। नर्मदा परिक्रमा पथ (सामुदायिक विकास योजना)


नर्मदा परिक्रमा पथ का उद्देश्य परिक्रमा करने वाले सामान्य जनों की कठिनाईयों को कम किया जा सके, तो दूसरी ओर नदी के पर्यावरण को सुधारने एवं क्षरण को कम करने में सहायता हो सके।

अतः महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत श्रमप्रधान कार्य के रूप में नर्मदा परिक्रमापथ के विकास किये. जाने का निर्णय राज्य शासन द्वारा लिया गया है। सड़क किनारे निजी खेत की मेढ़ व खेत में आवश्यकतानुसार फलदार व छायादार वृक्षारोपण की गतिविधियां संचालित की जा सकती है।

नर्मदा परिक्रमा मार्ग के क्षेत्र में आने वाले प्रदेश के 16 जिले अनूपपुर, डिण्डोरी, मण्डला, जबलपुर, नरसिंहपुर सिवनी, होशंगाबाद, रायसेन, सीहोर, हरदा, देवास, खण्डवा, खरगौन, बडवानी धारे एवं अलीराजपुर शामिल हैं। भूमि चयन/ नर्मदा नदी के तटीय क्षेत्र के अंतर्गत सम्मिलित ग्रामों में सामुदायिक, राजस्व भूमि, वन भूमि एवं निजी भूमि पर आंतरिक पथ निर्माण / पंचपरमेश्वर

ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामों की आंतरिक गलियों में कीचड़ से आवागमन में होने वाली परेशानी एवं ग्राम वासियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों से निजात दिलाने के लिये मनरेगा की राशि में अन्य मद की राशि के अभिसरण से आंतरिक मार्ग का निर्माण कराये जाने हेतु उपयोजना प्रारंभ की गई, जिसके तहत पक्की सीमेंट कांक्रीट सड़क एवं पक्की नालियों का निर्माण किया जायेगा।

आंतरिक पथ निर्माण में सीमेंट कांक्रीट से संबंधित निर्माण मद का शतप्रतिशत कार्य महात्मा गांधी नरेगा से निर्माण कराया जाना अनुमत नहीं होगा। इस निर्माण मद का कार्य अन्य योजनाओं के अभिसरण से ही संपन्न किया जायेगा।

इसके विकल्प निम्नानुसार है- पंचायत विभाग के मूलभूत अनुदान मद की राशि, स्टाम्प शुल्क की राशि, गौण खनिज मद में उपलब्ध कार्यों की राशि, अधोसंरचना सुधार कार्य हेतु उपलब्ध राशि, विधायक क्षेत्र विकास निधि की राशि, जन सहयोग की राशि, अन्या कोई उपलब्ध संसाधन अथवा समायोजन

स्थल चयन ग्रामों के आंतरिक मार्ग सामान्यतः जिनके दोनों तरफ मकान बने हो। सीमेंट कांक्रीट रोड कार्य हेतु चयन किये जा सकेंगे। किसी भी प्रकार के पहुंच मार्ग, मुख्य मार्ग एवं संपर्क मार्गो का निर्माण इस योजना में अनुमत नहीं होगा।

केवल ग्रामों के आबादी क्षेत्र में स्थित आंतरिक मार्ग ही इस उपयोजना में निर्मित होंगे। समाज के कमजोर वर्गों के आबादी क्षेत्र की और विशेष ध्यान देकर प्राथमिकता पर वहां कार्य कराया जायेगा। गोदाम निर्माण

अनाज भण्डारण हेतु सहकारिता विभाग के साथ कन्वर्जेन्स के माध्यम से गोदाम निर्माण किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित वितरण प्रणाली केन्द्रों पर सहकारिता विभाग द्वारा चयनित स्थल पर अनाज भण्डारण हेतु 100 मैट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम का निर्माण महात्मा गांधी नरेगा की शतप्रतिशत राशि से किया जाना है।

सामुदायिक टांका निर्माण / पानी की समस्या वाले ग्रामों में वर्षा जल के संचयन हेतु पानी की कमी के कारण ग्रामीणों को पेयजल, निस्तार, पशुओं व पेड पौधों के लिये पानी की

समस्या का सामना करना पड़ता है, इसको ध्यान में रखते हुए वर्षा से प्राप्त जल के संचयन हेतु (Community Water Harvesting Pond) (टांका निर्माण) का निर्णय लिया गया है।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जिले में भीषण जल संकट युक्त ग्राम चिन्हित किये जायेंगे। ग्राम की बसाहटों के पास सामुदायिक भूमि पर वर्षा जल संचयन हेतु टांका निर्माण किया जायेगा। कार्य पूर्ण करने की अवधि एक वर्ष होगी। रेल्वे भूमि पर मनरेगा से विकास कार्य

रेल्वे सड़क का संपर्कता प्रदान करने एवं रेलवे क्रासिंग हेतु एप्रोच रोड के दोनों ओर वृक्षारोपण तथा ब्लॉक प्लान्टेशन का कार्य रेलवे को क्रियान्वयन एजेंसी बनाया जा कर कराया जावेगा।

वृक्षारोपण कार्य के क्रियान्वयन तथा रखरखाव कार्य में पौध रक्षक / स्व सहायता समूहों की मदद ली जा सकेगी तथा इन्हें परियोजना अवधि समाप्त होने के उपरांत प्राप्त उत्पाद के उपभोग का अधिकार न्यूनलम 05 वर्ष हेतु दिया जाना अनिवार्य होगा कार्य गुणवत्ता की निगरानी हेतु रेलवे के मैदानी इंजीनियर्स द्वारा सहयोग किया जायेगा।

कार्य का संपादन अभिसरण के तहत किया जायेगा। प्रस्तावित कार्यस्थल का कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा/सहायक यंत्री मनरेगा एवं रेलवे के स्थानीय अभियंता के साथ संयुक्त

निरीक्षण कर जानकारी संकलित की जायेगी। गौशाला परियोजना पुनरीक्षण / मंदिर गौशाला दुग्ध उत्पादन हेतु
जहां पंचायती राज एवं वन विभाग की राशि से गौशाला निर्माण स्वीकृत नहीं है, उन स्थलों पर मनरेगा से यह कार्य अभिसरण राशि से किया जायेगा। इसके अंतर्गत गौशाला रोड, बछड़ा शेड और चौकीदार कक्ष, कार्यालय, भूसा गोदाम बीमार गाय रोड, गौकाष्ठ, ग्राउण्ड समतलीकरण, फेसिंग तथा नागरिक सूचना फलक, कम्पोस्ट यूनिट टयूबवेल पानी की टंकी निर्मित की जा सकती है।

नवीन गौशाला परियोजना गौशालाओं के विस्तार व शुद्धीकरण कार्य भी लिये जा सकते हैं। मंदिर गौशाला हेतु पुजारी / मंदिर समिति से लिखित सहमति प्राप्त करना होगी। 100 गौवंश हेतु समिति के पास न्यूनतम 1 एक अधिवादित भूमि उपलब्ध हो।

मियावाकी पद्धति से सघन सामुदायिक वृक्षारोपण भूमिहीन परिवारों को महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत सामुदायिक सघन वृक्षारोपण को कम अवधि में परिणाम व आजीविका मूलक बनाये जाने हेतु मियापाकी पद्धति को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप क्रियान्वायन किये जाने का निर्णय लिया गया है।

शासकीय सामुदायिक भूमि की उपलब्धता अनुसार विभिन्न आकार के जल स्त्रोतों के समीप स्थल चयन किया जाये। क्षेत्र चयन में मिट्टी की गहराई न्यूनतम 1 मीटर होना आवश्यक है। रोपण स्थल में स्थानीय प्रजातियों के पौधों का ही रोपण किया जाये।

परियोजना क्रियान्वयन हेतु अवधि 3 वर्ष उपरांत आगामी 5 वर्ष तक परियोजना से प्राप्त समस्त उत्पादों के कुल मूल्य की 10 प्रतिशत राशि ग्राम पंचायत के विकास मद में जमा करने की सहमति सुरक्षा अमिक / समूहों से प्राप्त की जाये। जैविक बागड़ से बाउण्ड्री निर्माण

सामुदायिक व सार्वजनिक परिसरों की सुरक्षा एवं ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुदृढीकरण हेतु जैविक बागड वृक्षारोपण परियोजना तैयार की गई है। इसके अंतर्गत जैविक बागड शासकीय स्कूलों, आंगनवाडी / पंचायत/सामुदायिक भवन, अनाज गोदाम, शासकीय मंदिर, तालाब के किनारे, शांतिधाम, खेल मैदान में लगाये जा सकते हैं।

सिचाई की सुविधायुक्त स्थलों का चयन किया जाये। संपत्ति रख रखावकर्ता से लिखित सहमति प्राप्त की जाये। कार्य स्थल पर वास्तविक लंबाई का आंकलन कर तद्नुरूप परियोजना स्वीकृत की जाये। सामुदायिक पोषण (जैविक) उद्यान

ग्रामीण बच्चों को वर्ष भर कुपोषण से बचाने के लिये विशेष आवश्यकता के अनुरूप हितग्राही मूलक व सामुदायिक पोषण उद्यान विकसित किये जाने हैं। राज्य आजीविका मिशन द्वारा लिये जाने वाले पोषण उद्यान विकास कार्य में मनरेगा अंतर्गत कार्य समूह में लिये जा सकते हैं।

इसके अलावा इस कार्य हेतु लक्षित वर्ग के पात्र हितग्राहियों की निजी भूमि पर सामुदायिक शासकीय भूमि पर शासन द्वारा संचालित स्कूल, आंगनबाड़ी केन्द्र, ग्राम पंचायत की भूमि को प्राथमिकता दी जायेगी। मियावाकी पद्धति से सघन निजी वृक्षारोपण SHG हेतु (अप्रैल 2020 )

आजीविका मिशन, तेजस्विनी, नाबार्ड के अंतर्गत SHG सदस्यों को जो मनरेगा अंतर्गत पात्र हितग्राही की श्रेणी में शामिल हैं तथा पशुपालन करते हैं, उन्हें मियावाकी पद्धति से निजी भूमि पर सघन वृक्षारोपण का लाभ दिया जा सकता है।

पात्र कृषक को निजी भूमि की उपलब्धता अनुसार विभिन्न आकार में जल स्त्रोतों के समीप स्थल चयन किया जायेगा। क्षेत्र चयन में मिट्टी की गहराई न्यूनतम 1 मी. तक उपलब्ध हो। चयनित स्थल की मिटटी की गुणवत्ता का विश्लेषण कर आवश्यक बायोमास ‘मिलाया जाये।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मनरेगा से किये जा सकने वाले कार्य मध्यप्रदेश में गत वर्षों में अतिवृष्टि के कारण बाढ़ की स्थिति निर्मित हुई है। जिसके फलस्वरूप जनजीवन एवं स्थानीय परिसंपत्तियों की व्यापक क्षति हुई है।

इन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में महात्मा गांधी नरेगा के तहत अनुमत कार्यों का क्रियान्वयन कर न केवल बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों का सुधार किया जा सकता है, अपितु भविष्य में बाढ़ की स्थितियों से भी निपटने की क्षमता विकसित की जा सकती है।

इसके साथ ही महात्मा गांधी नरेगा के अनुमत्य हितग्राही मूलक कार्यों के क्रियान्वयन से आजीविका उन्नयन भी किया जा सकता है। इस योजना के अंतर्गत इन सामुदायिक स्वरूप के कार्यो का क्रियान्वयन किया जा सकता है।

ग्राम पंचायत भवन / आंगनबाड़ी / अनाज भंडारगृह / किचिनशेड का सुधार एवं संधारण, चेकडेम / तालाब की मरम्मत, खेल मैदान की मरम्मत, स्कूल की. बाउण्ड्रीवाल की मरम्मत, ग्रामीण सड़क एवं पुल पुलिया की मरम्मत, ग्रामीण हाट की मरम्मत, शांतिधाम की मरम्मत, बाढ / डायवर्सन चैनल की मरम्मत, नहरों की मरम्मत, बाढ / डायवर्सन चैनल का

निर्माण, Water Logging (दलदली) वाले क्षेत्र से पानी की निकासी के लिये नाली निर्माण, Water Logging (दलदली वाले क्षेत्र में भूमि सुधार SHG संघ (फेडरेशन) भवन निर्माण

ग्राम पंचायत अंतर्गत आजीविका मिशन के तहत गठित स्वसहायता समूहों की कृषि आधारित व खाद्यान्न भंडारण संबंधी गतिविधियों को गति प्रदान करने के लिये तथा कृषि व अन्य उत्पादों के विक्रय के प्रचार-प्रसार हेतु SHG संघ भवन का निर्माण 10 लाख रूपये की राशि की सीमा में कराया जा सकता है।

भवन का निर्माण आवश्यकतानुसार एक ग्राम पंचायत कलस्टर की पंचायतों में स्वसहायता समूहों हेतु किया जा सकेगा। भवन निर्माण में 40-50 समूह सदस्यों की बैठक हेतु एक हॉल, एक छोटा कमरा तथा शौचालय, यूरिनल्स सम्मिलित होगा।

खाद्यान्न भण्डार चबूतरा

मनरेगा अंतर्गत खाद्यान्न उपार्जन /भण्डार हेतु पक्का चबूतरा निर्माण किया जा सकता है, जिसे स्थल की आवश्यकतानुसार या कृषकों की फसलों की जंगली जानवरों से सुरक्षा हेतु स्वतंत्र कार्य के रूप में स्वीकृत किया जायेगा।

स्थल की आवश्यकता व पत्थर बोल्डर स्थल के समीप उपलब्धता होने पर पशु अवरोधक दीवार का निर्माण अन्यथा की स्थिति में पशु अवरोधक खंती का निर्माण किया जा सकता है।

जय किसान उपयोजना से निजी कृषकों की बंजर व पड़त भूमि को कृषि योग्य बनाना मनरेगा क्रियान्वयन हेतु अनुमन्य कार्यों हेतु फार्म / फील्डबण्ड का निर्माण तथा बंजर पड़त भूमि का समतलीकरण / सही आकार देने का कार्य शामिल है।

उक्त के अनुक्रम में विभाग द्वारा मुख्यमंत्री जय किसान उपयोजना क्रियान्वयन किये जाने का निर्णय लिया गया है। पात्रहितग्राही – मनरेगा अंतर्गत लक्षित वर्ग के पात्र हितग्राही जिनके पास निजी स्वामित्व की बंजर पड़त

भूमि हो। वन अधिकार अधिनियम 2006 के हक प्रमाण पत्र धारक जिन्हें आवंटित भूमि बंजर व पड़त

हो। हितग्राही को एक वर्ष में अधिक तक एक हेक्टेयर भूमि पर लाभ दिया जा सकेगा, भूमि विवादित न

हो, जिनके पास सबसे कम बंजर व पड़त भूमि होगी उन्हें प्राथमिकता प्रदाय की जावेगी।

शासकीय शालाओं में बाउण्ड्रीवाल, पहुंच मार्ग, किचनशेड एवं खेल मैदान विकास प्रदेश के कई स्कूलों में बाउण्ड्रीवाल नहीं है, जिससे शालाओं में पठन पाठन एवं खेलकूद की गतिविधियां प्रभावित होती हैं। अतएव शासकीय शालाओं में बाउण्ड्रीवाल, पहुंच मार्ग, किचनशेड एवं खेल मैदान विकास हेतु निर्देश प्रसारित किये गये हैं।

EPS शालायें जिन में नामांकन अधिक है, का चयन पक्की बाउण्ड्रीवाल हेतु प्राथमिकता से किया जायेगा। शेष EPS शालाओंकाजोभागआबादी क्षेत्र से लगा होगा, वहां पक्की बाउण्ड्रीवाल तथा शेष भाग में जैविक बागड़ का प्रस्ताव है।

खेल मैदान व जैविक बागड़ के कार्य आवश्यकतानुसार सभी जगह लिये जा सकेंगे। एप्रोच व ग्रेवलरोड व पक्की बाउण्ड्रीवाल का निर्माण कार्य सामग्री मूलक है। अतः प्राथमिकता क्रम अनुसार इसका क्रियान्वयन किया जायेगा।”

ग्राम परिसंपत्ति संधारण योजना

मनरेगा योजना में अनुमत्य कार्यों में कुल 53 प्रकार के सामुदायिक कार्यो की मरम्मत व रखरखाव तथा 7 प्रकार के कार्यों के जीर्णोद्धार/नवीनीकरण का प्रावधान किया गया है। ग्राम परिसंपत्ति उपयोजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक पंजी का संधारण किया जायेगा। मरम्मत के कार्यों को त्रिस्तरीय

पंचायतीराज संस्थाओं के अनुमोदन उपरांत SOP में जोड़ा जायेगा। वन अधिकार धारी (FRA) / मनरेगा कार्यों का लाभ हेतु

वन अधिकार प्रमाण पत्र धारक हितग्राहियों की खेती की भूमि पर कपिल धारा कूप, मेढबंधान, खेत तालाब, खेत में फलोद्यान, खेत की मेड़ों पर वृक्षारोपण, वर्मीकम्पोस्ट पिट, तरल बायो खाद पिट, नाडेपपिट, पशु आश्रय के शेड, बकरी शेड, अजोलापिट, मुख्यमंत्री जय किसान उपयोजना तथा मियावाकी पद्धति से निजी भूमि पर सघन वृक्षारोपण का लाभ दिया जा सकता है मनरेगा अंतर्गत लक्षित वर्ग के पात्र हितग्राहियों को हितग्राही मूलक कार्यों का लाभ दिया जाना अनुमत है।

सुदूर ग्राम सम्पर्क एवं खेत सड़क योजना

ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम मजरे टोले जो प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना एवं मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत नहीं जोड़े जा सकते हैं. उनको जोड़ने के लिए तथा खेतों के समूहों को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए सड़क सम्पर्क उपलब्ध कराना हवं मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने की दृष्टि में सुदूर ग्राम सम्मार्क व खेव योजना प्रारम्भ की गई।

ग्राम सभा से अनुमोदन उपरांत जनपद / जिला पंचायत के अनुमोदन पर एस.ओ.पी. में सम्मिलित कार्य की तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति पर कार्य प्रारम्भ करना। ग्रामीण क्षेत्रों में उक्त योजना के अंतर्गत मिट्टी एवं ग्रेवल तथा पुल-पुलिया का निर्माण किया जाना है।

नवीन निर्देशों के अनुसार सुदूर ग्राम सम्पर्क एवं खेत सड़क योजना के कार्य हेतु विकास आयुक्त कार्यालय की पूर्व अनुमति अनिवार्य की गई है। मुख्यमंत्री हाट बाजार योजना

ग्रामीण उत्पादों के विक्रय की बेहतर व्यवस्था और ग्रामीण शिल्पियों तथा कारीगरों को कारोबार के लिए सुव्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री हाट बाजार योजना शुरू की गई है इस योजना में प्रदेश के 2000 से अधिक ऐसे बड़े ग्रामों में जहाँ परम्परागत हाट बाजार लगते है।

वहाँ रू 50 लाख की लागत से पकी दुकानों और बुनियादी सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा हर ग्राम पंचायत में ग्राम के मुख्य व्यवसायिक स्थल के आसपास स्व सहायता समूहों और कारीगरों एवं शिल्पियों के लिए 5-6 दुकानें निर्मित होगी।

रू 15 लाख तक की लागत राशि के लिए ग्राम पंचायत एवं रू 50 लाख तक की लागत राशि के निर्माण कार्यों के लिए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को निर्माण एजेंसी बनाया गया है।

इससे ग्रामीणों को अपने रोजमर्रा की जरूरतें साप्ताहिक हाट बाजार से पूरी कराने / आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने/उत्पादन के विपणन की सुविधा उपलब्ध होगी। अमृत सरोवर योजना

24 अप्रैल 2022 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा तालाबों को पुनर्जीवित करने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना का उद्देश्य पेयजल संकट को दूर करना तथा सिंचाई के लिए पर्याप्त जल की व्यवस्था करना एवं भूमिगत जल स्तर को बढ़ाना है।

अमृत सरोवर योजना के माध्यम से 15 अगस्त 2022 आजादी के अमृत महोत्सव तक देशभर में प्रत्येक जिले में 75-75 तालाबों का निर्माण किया जाएगा।

अमृत सरोवर मिशन के तहत नए तालाबों को खोदकर एवं पुराने तालाबों को पुनर्जीवित कर बड़े तथा गहरे तालाबों को बनाया जाएगा। इन तालाबों में पानी इकट्ठा करने के लिए नाली बनाकर जल लाया जाएगा।

जिससे यह तालाब वर्षा के पानी से लबालब भरे रहेंगे। अमृत सरोवर योजना के तहत तालाबों के संरक्षण के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा।

तालाबों का सौंदर्यीकरण कर उनमें वैरिकेडिंग करना, रोशनी की समुचित व्यवस्था करना, देखरेख करना, आकर्षक पर्यटन स्थल बनाना, उनके चारों तरफ छायादार वृक्ष लगाना इत्यादि भी इस योजना के माध्यम से किया जाएगा।

पुष्कर धरोहर समृद्धि अभियान मध्यप्रदेश सरकार ने तालाबों के महत्व को समझते हुए उन्हें ग्रामीण विकास की धुरी बनाने का फैसला

किया है। राज्य सरकार प्रदेश भर के गांवों में ऐसे पुराने तालाबों का पुनरुद्धार कर रही है, जो

अनुपयोगी हो गए थे। इनमें मछली पालन और सिघाडा उत्पादन जैसी आर्थिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। सरकार ने इसे पुष्कर धरोहर समृद्धि अभियान नाम दिया है। मध्यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने गांवों के आर्थिक विकास के लिए यह योजना तैयार की है।

राज्य भर में पुराने और अनुपयोगी हो चुके करीब 40,000 तालाबों की पहचान कर ली गई है। यह संख्या 50,000 तक पहुंचने का अनुमान है। पुनरुद्धार पर में प्रति तालाब पचास हजार से दो लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इनका काम मनरेगा के माध्यम से किया जाएगा।

उपयोग के आधार पर इन्हें तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में वे तालाब हैं जो केवल सिंचाई के काम आएंगे। दूसरे में मछली पालन और तीसरे में सिंघाडा उत्पादन किया जाएगा।

तालाबों का ज्यादा उपयोग सिंचाई के लिए किया जाएगा। अनुमान है कि इनसे करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर में सिचाई सुविधा मिल सकेंगी। ये ऐसे क्षेत्र होंगे जहां फिलहाल सिंचाई सुविधा नहीं है। तालाबों का उपयोग तय करने और उनका संचालन सहित सारे अधिकार पंचायतों के पास होंगे। पंचायतों ने तालाबों की पहचान करने के साथ ही संचालन करने वाले समूह भी तय कर लिए हैं।
तालाब हमेशा गांव के विकास की धुरी रहे थे, इसमें समुदाय के हितों के लिए गांव की पूजी, ज्ञान और कौशल की एक साथ लाने का प्रयास किया जा रहा है।

इसमें पुराने तालाबों को चुना गया और व्यक्ति के बजाय सामुदायिक विकास को पूरी बनाया गया। पुराने तालाब चुने जाने के पीछे कारण है कि वे सर्वश्रेष्ठ स्थान पर बनाए गए थे। अभियान के अंतर्गत कई जिलों में पुनरुद्धार का काम शुरू किया जा चुका है। इस अभियान से आर्थिक के गांवों के कुएं भी जिंदा हो जाएं।

देवारण्य योजना

देवारण्य योजना का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद के माध्यम से लोगों को स्वास्थ लाभ प्रदान करना और जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को रोजगार से जोड़ना है। मध्य प्रदेश में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने एवं उसके माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के आर्थिक उन्नयन के लिए मनरेगा के तहत देवारण्य योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों विशेषकर अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में पारिस्थितिकीय तंत्र के अनुसार अनुकूल क्षेत्रों की पहचान कर औषधीय पौधों की खेती प्रारम्भ की गई है। इसके लिए प्रदेश को जलवायु क्षेत्र पर आधारित 11 विशेष पादप उत्पादक क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।

योजना के तहत जिन औषधीय पौधों की खेती होनी है उनमें अश्वगंधा, कालमेघ, एलोवीरा, ईसबगोल, तुलसी, सफेद मूसली, स्टीविया, कोलियस, सर्पगंधा, निर्गुण्डी, गुलबकावली. शतावरी, अर्जुन, कुटकी, नागरमोथा, लेमनग्रास, चंदन एवं गिलोय शामिल हैं। किसानों को खेती के लिए प्रशिक्षण, क्षमतावर्धन सहित उत्पाद विक्रय में मदद दी जाएगी।

देवारण्य योजना से जनजाति बहुल क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ेंगे प्रदेश में देवारण्य योजना के माध्यम से आयुध औषधियों के उत्पादन की एक पूरी वैल्यू चेन का विकास किया जावेगा। इस कार्य में स्व सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। इस योजना से जनजाति वर्ग की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा एवं भविष्य में मध्यप्रदेश में वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा।

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