Madhya Pradesh Panchayatraj Adhiniyam 1993

मध्यप्रदेश पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 के प्रमुख प्रावधान • अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति को उनकी प्रदेश में जनसंख्या के अनुपात में पद

आरक्षण की व्यवस्था है। • अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के 50 प्रतिशत से कम पदों के आरक्षण होने . पर अन्य पिछड़े वर्ग के लिये 25 प्रतिशत स्थानों के आरक्षण का प्रावधान है •तीनी स्तर की पंचायतों के कुल पदों में से 50 प्रतिशत स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित .

करने का प्रावधान है। अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों के लिये विशिष्ट उपबन्ध अधिनियम 1996 के प्रावधानों को प्रदेश के पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम में समाहित करने हेतु संशोधन किया जाकर इस अधिनियम के प्रावधान जोड़े गये है ।

• अनुसूचित क्षेत्र की सभी पंचायतों के प्रमुख के स्थान (अध्यक्ष, जिला एवं जनपद पंचायत तथा सरपंच, ग्राम पंचायत) अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिये आरक्षित किए गये हैं। अनुसूचित क्षेत्र की ग्राम सभा की बैठक की अध्यक्षता सरपंच, उपसरपंच या पंच द्वारा नहीं की जायेगी। बैठक में उपस्थित सदस्यों द्वारा अनुसूचित जनजाति के नामांकित व्यक्ति द्वारा अध्यक्षता किए जाने का प्रावधान किया गया है।

• ग्राम सभा की वर्ष में 4 बैठकें अनिवार्य की गई हैं।

• ग्राम सभा की बैठक के लिए कुल सदस्यों का 10 प्रतिशत या पाँच सौ सदस्य जो भी कम हो, से कोरम की पूर्ति का प्रावधान है। • ग्राम सभा में सामाजिक अंकेक्षण की व्यवस्था की गई है।

• ग्राम सभा को अनिवार्य एवं वैकल्पिक कर लगाने के अधिकार दिए गये हैं। • ग्राम सभा का प्रतिवर्ष बजट तैयार किये जाने की व्यवस्था है।

• ग्राम सभा में सामाजिक अंकेक्षण की व्यवस्था ग्राम सभा को सौंपे गये कार्यों के निपटारे हेतु दो स्थायी समिति एवं तदर्थ समिति गठित किए जाने का प्रावधान किया गया है। • ग्राम सभा क्षेत्र के विकास से संबंधित गाँव की दीर्घकालीन योजना बनाने का प्रावधान किया गया है।

• ग्राम पंचायत को बाजार फीस, बाजार में बेचे जाने वाले पशुओं के रजिस्ट्रीकरण पर फीस लगाने का अधिकार दिया गया है।

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