ग्राम सभा

प्रदेश का ग्रामीण क्षेत्र राजस्व ग्रामों और वन ग्राम की मौलिक इकाई में बेटा हुआ है। पंचायती राज के संदर्भ में राज्यपाल ने इन्हीं राजस्व ग्राम और वन ग्राम की सीमा को ग्राम के रूप में घोषित तथा परिभाषित किया है। ग्राम सभा पंचायती राज की आधारभूत इकाई है।

ग्राम सभा प्रत्येक राजस्व ग्राम या वन ग्राम में उस गांव के वयस्क मतदाताओं को मिलाकर गठित की गई है। यानि गांव का प्रत्येक मतदाता ग्रामसभा का सदस्य होगा। यहाँ ध्यान रखने वाली बात यह है कि प्रदेश अधिनियम के अनुरूप हर राजस्व ग्राम या वन ग्राम के लिए एक अलग ग्राम सभा गठित होगी यानि एक ग्राम पंचायत की भौगोलिक सीमा में आने वाले प्रत्येक राजस्व ग्रामों में एक-एक ग्राम सभा होगी।

अतः एक ग्राम पंचायत में एक या एक से ज्यादा ग्राम सभाएं गठित होंगी। ग्राम पंचायत में तीन राजस्व/वन ग्राम हैं तो उस पंचायत में तीन ग्राम सभाओं का गठन होगा।

ग्राम सभा के उद्देश्य

ग्राम पंचायत विकास योजना के बारे में स्थानीय लोगों को जानकारी प्रदान करना।

ग्राम पंचायत विकास योजना समिति और कार्यकारी समूह से मंजूरी प्रदान प्राप्त करना ।

विकास के मुद्दों पर चर्चा करना।

ग्राम सभा का कोरम पूरा होने पर विभिन्न विकास के विषयों पर चर्चा करना।

गाँव के आर्थिक विकास से जुड़ी योजनाओं या स्कीमों को पहचानें तथा उनके क्रियान्वयन के लिए सिद्धांत बनाए ।

गाँव में गरीबी उन्मूलन से जुड़े कार्यक्रमों के लिए हिताधिकारियों को पहचानना तथा उनका चुनाव कराना ।

हितग्राहीमूलक सभी स्कीम तथा कार्यक्रमों का नियंत्रण और इनकी मॉनिटरिंग करेंगे। साथ ही यह भी देखेंगे कि गाँव में जितने भी कार्यक्रम और योजनाएँ चल रही हैं उनके उचित क्रियान्वयन के साथ-साथ यह भी ध्यान देंगे कि इन स्कीमों और कार्यक्रम के लाभ समुदाय में समानता बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।

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