gram Sabha

ग्राम सभा

मध्यप्रदेशपंचायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 में गांव में ग्राम सभा को संवैधानिक ईकाई बनाया गया है। इस अधिनियम में संशोधन करके 26 जनवरी 2001 को “ग्राम स्वराज” जोड़ा गया। जिसमें ग्राम सभा को महत्वपूर्ण दर्जा दिया गया है। ग्राम समालोकतंत्र की यह ईकाई है, जहां से “जनता के द्वारा जनता का राज की अवधारणा को मूर्त रूप मिला है। गांव में क्या हो और कैसे हो, यह गांव खुद तय करे, यह दूसरों पर निर्भर नहीं रहे। गांव में रहने वाले हर वर्ग के मतदाताओं खासकर महिलाओं और की ग्राम सभा की बैठक में उपस्थिति एवं निर्णय में भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिये, ताकि गांव के आर्थिक विकास एवं सामाजिक न्याय की स्थापना में उनकी भागीदारी भी हो सके।

म०प्र०पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 5 (क) के अनुसार ग्राम सभा :

• यह एक नियमित निकाय है। जिसका मतलब है, कि यह कानून के द्वारा मान्य संस्था है।

• इसकी अपनी सील (मुद्रा) होगी। सील किसी कार्यालय की पहचान होती है।

• यह अपने नाम से लोगों और संस्थाओं पर मुकदमा चला सकती है तथा ग्राम सभा के खिलाफ भी मुकदमा चलाया जा सकता है।

• इसका अपना शास्वत्व उत्तराधिकार होगा। इसका मतलब है कि अगर पंच, सरपंच बदल भी जायें

तो भी ग्राम सभा बनी रहेगी।

• यह अपने नाम से सम्पत्ति खरीद सकती है और बेच सकती है। • यह अपने नाम पर लोगों से और संस्थाओं से अनुबन्ध (करार) कर सकती है।

ग्राम सभा का गठन:

प्रत्येक राजस्व और बन ग्राम के लिए अलग-अलग ग्राम सभा कागठन किया गया है। गांव के सभी मतदाता उस गांव की ग्राम सभा के सदस्य होंगे ध्यान रहे कि ग्राम पंचायत की भौगोलिक सीमा में आने वाले सभी गांवों में एक-एक ग्राम सभा होगी। मतलब एक ग्राम पंचायत में एक या एक से अधिक ग्राम सभा गठित होंगी।

महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज संस्थान, अधारताल, जबलपुर (म.प्र.)
ग्राम सभा की बैठक:- अधिनियम अनुसार प्रत्येक ग्राम सभा की वर्ष में कम से कम सात बैठकें होनी जरूरी हैं। ग्राम सभा की चार बैठकों के लिए चार माह जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर चार विशेष दिवस तय किये गए हैं।

इन सात बैठकों के अलावा यदि धाम सभा को जरुरी लगता है, तो यह और बैठक भी बुला सकती है। बैठकों की व्यवस्था करने के लिए जिले का कलेक्टर एक शासकीय अधिकारी या कर्मचारी नियुक्त करेगा, जिसकी जिम्मेदारी होगी कि वह

ग्राम सभा की बैठक का एजेण्टा तैयार करें।

बैठक की चारीख, समय, यथा स्थान की सूचना सभी सदस्यों को दें। यह सुनिश्चित करे कि ग्राम सभा की बैठक नियमों के हिसाब से थे।

ग्राम सभा की वार्षिक बैठक वित्तीय वर्ष खत्म होने के कम से कम तीन महीने पहले बुलाई जायेगी यदि ग्राम सभा के सदस्य चाहें तो यह भी ग्राम सभा की बैठक बुला सकते हैं, इसके लिए

• यदि सरपंच या कुल सदस्य संख्या के 10 प्रतिशत या 50 सदस्य जो भी दोनों में से कम हो के द्वारा लिखित रूप से मांग करनी होगी।

• लिखित आवेदन पंचायत सचिव को दिया जायेगा। • सचिव को आवेदन मिलने के 7 दिन के अन्दर बैठक बुलाना अनिवार्य होगा।

ग्राम सभा की संयुक्त बैठक

हर ग्राम सभा को अपने गांव के संबंध में फैसले लेने का अधिकार है लेकिन किन्हीं दो ग्राम सभाओं के मध्य यदि कोई विवादित विषय है तो संबंधित ग्राम सभाओं की संयुक्त बैठक में उसका निपटारा किया जायेगा।

ग्राम सभा बैठक की सूचना एवं कोरम:

ग्राम सभा बैठक की सूचना सभी सदस्यों को देना जरूरी है।

बैठक की सूचना कम से कम 7 दिन पहले देना जरूरी है (आपात स्थिति में

बैठक तीन दिन की सूचना पर भी बुलवाई जा सकती है)

सूचना में चैतक का स्थान, तारीख, समय, तथा एजेण्डा (बैठक में किन-किन पर चर्चा होगी) शामिल होगे।

• ग्राम सभा की बैठक का कोरम (बैठक तभी हो सकती है जब कम से कम उतने सदस्य उपस्थित हो) कुल सदस्यों का 10 प्रतिशत या 500 जो दोनो में कम हो होगा मान्य किया जायेगा। • ग्राम सभा की बैठक में सभी विषयों को कार्यवाही रजिस्टर में लिखा जायेगा।

• जो भी ग्राम सभा की बैठक की अध्यक्षता कर रहा है उसके द्वारा कार्यवाही रजिस्टर में हस्ताक्षर कर कार्यवाही विवरण की पुष्टि की जायेगी।

पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 6 (4) के अनुसार ग्राम सभा की बैठक की अध्यक्षता सरपंच करेगा। सरपंच की अनुपस्थिति में उपसरपंच बैठक की अध्यक्षता करेगा। यदि दोनों उपस्थित नहीं है तो उपस्थित सदस्यों में से किसी एक सदस्य को बहुमत से अध्यक्ष चुना जायेगा।

अनुसूची क्षेत्र की ग्राम सभा की अध्यन सरपंच, उपसरपंच या पंच नहीं करेगा कि ग्राम सभा में से श्री नामित व्यक्ति जो अनुसूचित जनजाति का हो वही अध्यक्षता करेगा

या याद संधान समक अजगर किया जाना है उस ग्राम सभा की अध्यक्षता आप नया ओपना के किसालयन से जुड़ा कोई व्यक्ति नही अंग स्वर प्रसव सदस्यों में से किसी अन्य व्यक्ति को जिसे ग्राम सभा नामित

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ग्राम सभा में लिये जाने वाले निर्णय:

मण उवसम्मति से दिये जायेगे और हिंदी निर्भय र भाषा में विचार देमी wwerach and a weird bassi Ginta

मप्र पर पापती संजाति जैसे आती है. में उसे जगानी गम गमा

बैंक तक स्थगित किया जायेगा || व्यादि जगही बैठक में भी आपसी सहमति नही देन नती है की उस पर महल

ग्राम सभा की सेवा में महिलाओं व अन्य मंचित तबकों की उपस्थिति एवं निर्णयों में भागीदारी के सको इनके लिए जो भी गम हो सके वह किये जाना चाहिये। महिलाओं व अन्य अकि सवल की गुटकों एवं उनकी समस्याड़ी पर पथमिकता से चर्चा हो सके इस बात का भी विशेष ध्यान रखा जाना माहिये।

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ग्राम सभा के निर्णय के खिलाफ अपील:

• ग्राम सभा के निर्णय से यदि कोई सदस्य सहमत नहीं है तो वह निर्णय के खिलाफ अपील समिति

में अपील कर सकता है। • ग्राम सभा के निर्णय के खिलाफ अपील समिति में उस जनपद के जनपद अध्यक्ष, उस क्षेत्र का जनपद पंचायत का सदस्य और विकासखंड अधिकारी सदस्य होगें। जनपद सदस्य इस अपील समिति के अध्यक्ष होगें।

• ग्राम सभा के निर्णय के खिलाफ 30 दिन के अंदर अपील की जा सकती है। • अपील लिखित में की जायेगी, अपील करने का कारण स्पष्ट करना होगा तथा अपील के साथ निर्णय की प्रति लगाना जरूरी है।

• अपील समिति तथ्यों का परीक्षण करने के लिये ग्राम सभा के उस निर्णय से जुड़े सभी दस्तावेज प्राप्त करेगी।

• अपील समिति सभी पक्षों की बात सुनेगी।

• जिस निर्णय के खिलाफ अपील की गयी है उसके लागू करने पर अपील समिति जब तक फैसला

न हो रोक लगा सकती है। • अपील समिति कानून एवं नियमों के अनुसार ही फैसला करेगी।

• अपील समिति अपने फैसले में या तो ग्राम सभा के निर्णय को परिवर्तित कर सकती है या उसे

मान्य कर सकती है या आंशिक रूप से भी मान्य कर सकती है। • अपील समिति का फैसला अंतिम होगा व सभी पक्षों को मान्य होगा।

ग्राम सभा के अधिकार एवं जिम्मेदारियां:

म०प्र० पंचायत एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा-7 में ग्राम सभा की शक्तियों एवं जिम्मेदारियों को बताया गया है।

ग्राम समा

ग्राम पंचायत द्वारा किये जाने वाले काम की जिम्मेदारी

विभागों व उनके कर्मचारियों पर नियंत्रण

प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण

गांव के सर्वागीण विकास जिम्मेदारी

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असे मत लख्ख भरारी मेलापक लिए इगलिस को महमद उम

(

नए बागा कोई भी पर्यबधी दिली एसएस में निकल लिया है छत पर स्वय

साम उम बाजी रटक में जो भी फैसला देवी एवं लप कराना राम मनस्तस्यात काम र अत सरपंच तथा मंदिर पूरी तरह से एक सन, के अधीन काम करे। पहला कार्यमन के सामाजिक वलक्षण का काम प्राप्त उजाला करता है।

• ग्राम सभा अपनी सीमा में आने वाले सभी हाट बाजारों और पशु मेलों पर नियंत्रण रखेगी। ग्राम सभा यह तय करेगी कि बाजार में पशु बेचने पर उसका कितना कर देना होगा।

ग्राम सभा की स्थाई समितियां:

म०प्र० पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 के अनुसार ग्राम सभा के कार्यों को कियान्वित करने के लिए दो स्थाई समिति 1. ग्राम निर्माण समिति 2 ग्राम विकास समिति का गठन किया गया है।

ग्राम सभा अपने काम तथा जरुरत के अनुसार तदर्थ समितियोंका गठन भी कर सकेगी।

तदर्थ समिति का अर्थ है विशेष कार्य के लिए विशेष समिति का गठन करना कार्य के पूर्ण हो जाने के उपरांत यह समिति अपने आप ही समाप्त हो जाती है।

  1. ग्राम निर्माण समिति ग्राम पंचायत के सहायक अभिकरण की तरह काम करेगी।
  2. ग्राम निर्माण समिति पन्द्रह लाख रुपये तक के सारे निर्माण कार्य तथा ग्राम सभा और ग्राम पंचायत द्वारा सौपें गये सभी कार्यों को करेगी। 3. ग्राम निर्माण और ग्राम विकास समिति पूरे गांव के विकास के लिये एक योजना तैयार करेगी और

इसे ग्राम सभा के अनुमोदन के लिये प्रस्तुत करेगी। 4. ग्राम निर्माण समिति व ग्राम विकास समिति का पदेन अध्यक्ष ग्राम पंचायत का सरपंच होगा।

  1. ग्राम निर्माण समिति व ग्राम विकास समिति का पदेन सचिव ग्राम पंचायत का सचिव होगा।
  1. प्रत्येक समिति ग्राम सभा के प्रति उतरदायी व जबाबदार
  2. समिति भी सभा के नियंत्रण में काम करेगी।

होंगी तथा उसके नियंत्रण व निगरानी में 3. समिति का गठन किया गया है, जो ग्राम सभा के अधीन काम करेगी।

१. विभागों ने भी गांव स्तर पर तदर्थ समितियां बनायी है उन सब पर भी ग्राम सभा का नियंत्रण स्थायी समितियों के अतिरिक्त ग्राम सभा किसी निश्चित समयावधि में कार्य पूरा करने के लिये एक या एक से अधिक तदर्थ समितियों का गठन कर सकेगी। इन समितियों में सदस्य शामिल होने समिति को सौंपे गये कार्य करने में रुचि रखते हैं। समिति कार्य की समापन रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा कार्य के मूल्यांकन के बाद में नहीं रहेगी।

ग्राम सभा द्वारा सामाजिक अंकेक्षण

ग्राम पंचायत को प्राप्त होने वाली राशि से वित्तीय वर्ष में लिये जाने वाले कार्यों की वार्षिक कार्ययोजना तैयार की जायेगी। सर्वप्रथम ग्राम पंचायत की बैठक में वार्षिक कार्य योजना के प्रस्तावों को पारित करा कर ग्राम सभा से उसका अनुमोदन अनिवार्य है। ग्राम सभा से अनुमोदित वार्षिक कार्ययोजना में ही भविष्य में निर्माण कार्य ग्राम पंचायत द्वारा किये जायेगें। ग्राम पंचायत यदि वार्षिक कार्य योजना में कोई परिवर्तन करना चाहे तो उसके प्रस्ताव पर परिवर्तित कार्यों की सूची का अनुमोदन अगली ग्राम सभा में कराना आवश्यक होगा। इसके पश्चात् ही ग्राम सभा / ग्राम पंचायत परिवर्तित कार्य ले सकेंगी। निर्माण कार्य प्रारम्भ करने के पूर्व निर्माण कार्य का प्राक्कलन अपने स्तर पर तैयार करना होगा। निर्माण कार्य के प्राक्कर में मजदूरी सामग्रियों की अनुमानित मात्रा का उल्लेख होगा। प्राक्कलन निर्माण एवं विकास समिति द्वारा तैयार किया जायेगा। ग्राम पंचायत से संलग्न ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के उपयंत्री की मदद भी श्री जाना होगी। निर्माण कार्य का प्राक्कलन ग्राम पंचायत की बैठक में अनुमोदित करवाया जावेगा।

सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया

अधिनियम के प्रावधानों के अन्तर्गत शासन द्वारा निर्धारित दिनांकों में ग्राम सभा को आहूत करने का दायित्व सरपंच का है। उन तिथियों में यथा स्थान पर ग्राम सभा की बैठक आयोजित हों एवं जिसमें निर्धारित कोरम की पूर्ति होना आवश्यक है। ग्राम सभा में सरपंच द्वारा निर्माणाधीन एवं पूर्ण किये गये कार्यों संपूर्ण ब्यौरे प्रस्तुत किये जायेंगे। निर्माणाधीन कार्यों के बारे में प्रगति का विवरण, जिसमें कार्य स्वीकृति का दिनांक, प्राक्कलन अनुसार धनराशि व्यय की गई धनराशि, भौतिक प्रगति, तब तक लगी सामग्री का उल्लेख सामग्री क्रय की दर, उस पर सामग्रीवार व्यय मजदूरी पर व्यय, गुणवत्ता आदि शामिल होगा, ग्राम सभा को दी जायेगी। दो ग्राम सभाओं के बीच की अवधि का प्रतिवेदन एवं कार्य पूर्ण होने पर प्रतिवेदनएवं कार्य पूर्ण होने पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जावेगा। मूल दस्तावेज ग्राम सभा में किसी को सौंपे नहीं जायेगें। आवश्यकता होने पर पढ़ कर सुनाये जायेगें अभिलेख की सुरक्षा का दायित्व सरपंच का होगा। ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत कार्य का ब्यौरा या तो ग्राम सभा द्वारा अनुमोदित कर दिया जावेगा या आपत्ति होने पर अनुमोदन नहीं होने की अवस्था में लिखित सूचना अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को भेजी जावेगी। इस सूचना में वह सभी बिन्दु सम्मिलित किये जायेंगें जिन पर ग्राम सभा जाँच करवाना चाहे। यह सूचना ग्राम सभा में उपस्थित पंचायत सचिव या किसी अन्य शासकीय कर्मचारी या स्वयं आपत्तिकर्त्ताओं द्वारा दी जा सकती है। विभाग द्वारा करवाने जा रहे कार्यों का विवरण विभाग द्वारा अधिकृत अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा।

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