Gram Panchayat : ग्राम पंचायत विकास योजना कैसे बनाये (GPDP)

Gram Panchayat : भारत के 73वें संविधान संशोधन अधिनियम के प्रभावी होने के बाद कुछ ग्राम पंचायतों द्वारा विकास की भूमिका का निर्वहन प्रभावी ढंग से किया गया है। लेकिन ज्यादातर ग्राम पंचायतों द्वारा अपनी तात्कालिक आवश्यकता के अनुसार विकास एवं जन कल्याणी कार्य लिये जाते रहे है। ग्राम पंचायत विकास योजना कैसे बनाये (GPDP) अब तक किसी एक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संसाधनों का आंकलन कर वार्षिक कार्य की योजना तैयार नहीं की जाती थी।

ग्राम पंचायत विकास योजना को एक व्यवस्थित तरीके से ग्राम में उपलब्ध संसाधनों और प्राथमिकताओं के मध्य व्यवहारिक तौर से सामजस्य कर तैयार किये गये अभिलेख को उस क्षेत्र विशेष के लिये विकास योजना के रूप में पारिभाषित किया जा सकता है।

Gram Panchayat : ग्राम पंचायत विकास योजना कैसे बनाये (GPDP)

ग्राम पंचायत विकास योजना को एक व्यवस्थित तरीके से जहाँ एक और संसाधनों का प्रभावी उपयोग नहीं हो पाया है वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत के समग्र विकास को भी लक्षित नहीं किया जा सका है। प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में संसाधनों और प्राथमिकताओं के व्यवहारिक सामजस्य के लिए ग्राम पंचायत ही मूल इकाई है इसलिए इस प्रक्रिया को ग्राम पंचायत विकास योजना के नाम से संबोधित किया गया है।

Gram Panchayat : ग्राम पंचायत विकास योजना के मुख्य बिंदु

  • “ग्राम पंचायत की योजना, ग्राम पंचायत के लिये हो , और ग्राम पंचायत के द्वारा हो “
  • इसके द्वारा संसाधनों के उपयोग की एक तार्किक, पारदर्शी एवं उत्तरदायित्वपूर्ण व्यवस्था स्थापित की जा सकती है।
  • संसाधनों को लोगों की आवश्यकतानुसार उपयोग किया जा सकता है साथ ही वर्तमान योजनाओं में
  • लोगों की आवश्यकताओं का समाधान भी खोजा जा सकता है।
  • ग्राम पंचायत में निवासरत पृथक-पृथक समूहों की विशिष्ट आवश्यकताओं को आसानी से चिन्हित किया जाकर उनका भी समाधान हो सकेगा।
  • आमजन के ज्ञान, अनुभव और बुद्धिमत्ता का उपयोग किया जा सकता है।
  • किस आवश्यकता या कार्य को किस प्रकार से पूर्ण किया जा सकता है इसका सफल समाधान प्राप्त हो सकता है अर्थात् योजनाओं और संसाधनों के मध्य आवश्यकता आधारित कनवर्जेस किया जा सकता है।
  • संसाधनों के समुचित उपयोग को सुनिश्चित कर पंचायत की अर्थव्यवस्था एवं क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
  • लोगों में शासन और विकास की समझ विकसित होगी अर्थात ग्राम पंचायत में वास्तविक रूप से विकास की अवधारणा, चर्चा एवं निर्णयों का आधार बन सकेगी। पंचायत स्तरीय जन प्रतिनिधियों में विकास की प्रक्रिया की व्यवहारिक समझ विकसित होगी।
  • पंचायत में अपने स्थानीय विकास मॉडल विकसित होंगे साथ ही स्थानीय नवाचारों को पहचान मिलेगी। प्रत्येक नागरिक को जोड़ा जा सकेगा। निर्णयों में उनकी सहभागिता बढ़ेगी। निर्णयों का पालन प्रभावी
  • ढंग से हो सकेगा।
  • ग्राम पंचायत का उत्तरदायित्व तथा जिम्मेदारियां तय हो सकेंगी। ग्राम पंचायतें और अच्छे प्रदर्शन के लिये तत्पर रहेंगी।
  • विकास योजना ग्राम पंचायत की समस्त आवश्यकताओं पर केन्द्रित होगी जिससे ग्राम पंचायत को निरंतर दायित्वबोध रहेगा।

Gram Panchayat : ग्राम पंचायत विकास योजना क्यों ?

  1. ग्राम पंचायत को स्थानीय शासन के रूप में स्थापित करना।
  2. जनता की प्राथमिकता एवं आवश्यकताओं को जानकर उन्हें एक योजना के रूप में सम्मिलित करना।
  3. विकास के स्थानीय मुद्दों को चिन्हित करना ।
  4. मांग आधारित स्त्रोत अभिसरण को प्रोत्साहित करना।
  5. समस्याओं के समाधान हेतु जनसमुदाय में आत्मविश्वास निर्मित करना ।
  6. प्राकृतिक स्त्रोतों एवं स्थानीय स्त्रोतों को अधिक प्रभावी तरीके से उपयोग करना।
  7. विभिन्न समूहों की विभिन्न आश्यकताओं पर कार्य करना।
  8. ग्राम सभा को क्रियाशील बनाना।
  9. प्रभावी शासन को प्रोत्साहित करना।
  10. मुद्रा के मूल्यांकन को निश्चित करना।

Gram Panchayat : योजना का उद्देश्य

  • ग्राम पंचायत विकास योजना का उद्देश्य मात्र अवसंरचना विकास करने के अलावा, गाँव में और उसकी जनता के मन में कतिपय नैतिक भावनाएं उत्पन्न करना है ताकि वे अन्य लोगों के लिए सहयोगी बन सकें।
  • ग्राम पंचायतों का समग्र एवं समेकित विकासकरने के लिए , केवल अधोसंरचनात्मक विकास ही नहीं बल्कि सामाजिक, आर्थिक एवं वैयक्तिक विकास को भी सम्मिलित करना है।
  • निर्णय लेने की प्रक्रिया का विकेन्द्रीकरण के साथ समुदाय को निर्णय लेने हेतु सक्षम बनाना ।
  • ग्राम पंचायत स्तर पर आवश्यकताओं का चिन्ही करण कर प्राथमिकी करण करना।
  • ग्राम पंचायत विकास योजना का उद्देश्य सहयोगी नियोजन एवं संसाधनों के अभिसरण को बढ़ावा दिया जाना ।
  • ग्राम पंचायत विकास योजना में अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों यथा निर्धनों की आजीविका, निर्धनता एवं सामाजिक सुरक्षा को प्रमुखता से सम्मिलित करते हुए अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति के कल्याण को प्राथमिकता दी जानी है।
  • ग्राम पंचायतें “स्थानीय सरकार” के रूप में स्वयं को स्थापित कर सकेंगी ।
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