Gram Panchayat kya he

ग्राम पंचायत

73 व संविधान संशोधन द्वारा एक गांव से अधिक गांवों को मिलाकर कम से कम 1000 की आबादी पर एक ग्राम पंचायत की स्थापना की गई है। यानी गांव के विकास तथा उसमें रहने वाले सभी लोगों की भलाई के सभी काम करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की ही है। अर्थात यदि हम इस पर गौर से विचार करें तो हम पायेंगे कि पंचायत क्षेत्र में जो भी काम किये जाने है पंचायत की ही जिम्मेदारी है. इनमें क्षेत्र और उसमें रहने वाले लोग तथा सरकार द्वारा संचालित की जाने वाली योजनाएं भी शामिल है

यात पंचायत के निर्वाचित सदस्यों का मिलाकर मनी एम प्रमााव को अस्थाई

ग्राम पंचायत की संरचना

कम से कम एक हजार की आबादी पर एक ग्राम पंचायत के गठन का प्रावधान किया गया है। • ग्राम पंचायत में एक हजार की आबादी के मान से कम से कम 10 वार्ड एवं अधिक आबादी पर अधिक से अधिक 20 वार्ड के गठन का प्रावधान है।

• ग्राम पंचायत के सरपंच का निर्वाचन सीधे जनता द्वारा किए जाने का प्रावधान किया गया है।

• उपसरपंच का निर्वाचन पंच में से किया जाता है। • सरपंच एवं उपसरपंच के निर्वाचन के पश्चात एक माह की अवधि में ग्राम पंचायत के प्रथम सम्मेलन

का आयोजन किया जाता है। • इस सम्मेलन की तिथि से आगामी पाँच वर्षों के लिए ग्राम पंचायत की अवधि गिनी जाती है ।

• ग्राम पंचायत के सामान्य निर्वाचन के पश्चात किन्हीं कारणों से रिक्त हुए पदों का निर्वाचन राज्य निर्वाचन आयोग व्दारा प्रति छः माह की अवधि में कराया जाता है, किन्तु ग्राम पंचायत के समय का साढे चार वर्ष का समय समाप्त होने पर ग्राम पंचायत में रिक्त हुए स्थान के लिए उपनिर्वाचन नहीं किया जाता है।

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•ग्राम के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव उसके निर्वाचन की ढाई वर्ष की अवधि में नहीं लाया जा सकता है। ढाई वर्ष की अवधि के पश्चात अविश्वास प्रस्ताव लाया जा

सकता है।

• ग्राम पंचायत ने तीन स्थायी समितियों के गठन का प्रावधान है ।

ग्राम पंचायत के कार्य संचालन की व्यवस्था

हर ग्राम पंचायत स्तर पर कार्य संचालन के लिये ग्राम पंचायत सचिव तथा एक ग्राम रोजगार सहायक नियुक्त है। ग्राम रोजगार सहायक संविदा पर नियुक्त कम्प्यूटर शिक्षित युवक है और इन्हें सहायक सचिव का दर्जा भी दिया गया है। हर 10 ग्राम पंचायत पर कार्य समन्वय के लिये पंचायत समन्वयक है। इसके साथ ही हर ग्राम पंचायतों पर निर्माण कार्यों में तकनीकी सहायता के लिये संविदा पर उपयंत्री भी नियुक्त किये गये हैं। ये उपयंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा या मनरेगा की ओर से नियुक्त हैं। शीघ्र ही प्रत्येक पर एक लेखापाल (एकाउन्टेंट) की नियुक्ति होगी। ग्राम पंचायत सरपंच इस अमले की मदद से कल्याणकारी कार्यक्रमों और योजनाओं को अच्छी तरह सम्पन्न कर सकेंगे।

ग्राम पंचायत की बैठक

पंचायत अधिनियम के प्रावधान अनुसार ग्राम पंचायत की प्रत्येक माह बैठक आयोजित होना चाहिये ।

इसकी जिम्मेवारी सरपंच एवं सचिव की है।

• बैठक संस्थाओं के फेफड़े में ताजी हवा भरने का काम करती है। • बैठकें ही लोगों में संवाद शुरू करती है।

● बैठकें ही लोगों और समूहों को फैसले तक पहुंचाने का काम करती है।

पंचायत के बनने का फायदा यह है कि गांव के लोग ग्रामीण विकास से जुड़े बहुत से विषय और कार्यक्रमों को अपनी इच्छा, जरूरत और सोच के अनुसार लागू कर सकते हैं। पंचायत की बैठकों द्वारा ही इन विषयों और कार्यक्रमों के बारे में फैसले लिये जा सकते हैं। पंचायत की बैठक, पंचायत के सदस्यों को मौका देती है कि वे अपनी पंचायत को अपनी राय बतायें और सामूहिक निर्णय लेने में मदद करें। इस तरह पंचायत राज व्यवस्था के माध्यम से यह लोकतांत्रिक प्रणाली गांव-गांव तक पहुंचेगी। बैठक में नहीं जाने पर सदस्य एक आदमी या राजतंत्र जैसी व्यवस्था को मजबूत करते हैं।

पंचायत व्यवस्था में दिये गये अधिकार और ताकत का उपयोग तभी होता है जब हम बैठकों में जाते हैं, बैठक का महत्व समझते हैं और बैठक से जुड़ी प्रक्रिया को अपनाते हैं।

ग्राम पंचायत बेलगांव में एक साथ कई काम शुरू हुए जैसे खरन्जा बनवाना, भवन का निर्माण, पांच नये हैण्डपम्प पूरा गांव यह सोचकर खुश हो रहा था कि अब उनके गांव की दशा बदल जाएगी। एक दिन के काम के बाद गांव को यह लगा कि काम ठीक से नहीं हो रहा है। पहले तो गांव में मिस्त्री और ठेकेदार से बात की। उन्होंने नहीं सुना तो सचिव से बोले सचिव ने कहा कि वह कुछ नहीं कर सकता आप लोग तो सरपंच से ही बात करो। गांव के आम आदमी के साथ-साथ पंच भी बड़े निराश हुए जब सरपंच ने बोला कि काम ठीक-ठाक हो रहा है। पंचों ने तय किया कि वे इस बात को अगली तारीख को होने वाली बैठक में उठायेंगे।

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बैठक के दिन मोहन लाल ने निर्माण कार्य पर चर्चा का मुद्दा चाया कर रहे ने बोला कि तुमने पहले सूचना नहीं दी इसलिए यह विषय इस बैठक में नहीं उठा सकता। सभी सदस्य गुप हो गये अगली बैठक अगले महीने की 12 तारीख को शुरू मोहनलाल ने फिर से मुद्दा उठाया। सरपंच ने फिर बोला आप मुद्दा नहीं उठा सकते। पूछने पर बताया कि आप लिखित रूप से सूचना नहीं दी है। मोहन लाल और बाकी पंचों के हल्ला मचाया तो बैठक के सभापति या सरपंच ने बैठक स्थगित कर दो अब सारे पंच पंचायत राज व्यवस्था और सरकार को कोस रहे थे और बोल रहे थे कि इससे अच्छा तो इस्तीफा दे दो।

बैठक की महत्ता को समझते हुए हमने ग्राम पंचायतों की बैठक और उससे जुड़े कानून को स्पष्ट किया है। पंचायत की पहली बैठक और कार्यकाल

सरपंच, पंच तथा उप सरपंच के चुनाव के बाद इनके नामों का प्रकाशन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा किया जाएगा। नागों के प्रकाशन के तीस दिन के भीतर पंचायत की पहली बैठक बुलायी जाएगी। पहली बैठक के दिन से ही पंचायत व उसके पदाधिकारियों का कार्यकाल शुरू होगा जो अगले पांच साल तक चलेगा।

पंचायत की बैठक कौन बुलाएगा

• धारा 44 (4) के अनुसार सरपंच की जिम्मेदारी है कि यह महीने में कम से कम एक बार बैठक बुलायेंगे। • अगर सरपंच बैठक बुलाने में असफल रहते हैं तो सचिव को यह अधिकार होगा कि वह पिछली बैठक के 25 दिन बीतते ही अगली बैठक की सूचना जारी कर दे।

धारा 44 (6) के अनुसार यदि पंचायत के 50 प्रतिशत से अधिक (आधे से एक ज्यादा सदस्य पंचायत की बैठक बुलाने की मांग करते हैं सरपंच इस लिखित मांग के 7 दिन के भीतर पंचायत की बैठक बुलाएगें। अगर सरपंच यह बैठक बुलाने में असफल रहते हैं तो जिन सदस्यों ने लिखित मांग की है उन्हें अपने आप यह अधिकार मिल जाएगा कि वह बैठक बुला लें। इस बैठक की सूचना सचिव जारी करेगा।

• पंचायत की बैठक कहां होगी, किस तारीख को होगी और समय क्या होगा यह तय करना पंचायत के सरपंच (जिला और जनपद के लिए अध्यक्ष) की जिम्मेदारी है। • पंचायत की बैठक से जुड़ी सूचनाएं सदस्यों को देने की जिम्मेदारी पंचागत सचिव (जिला और जनपद में मुख्य कार्यपालन अधिकारी) की है। बैठक के स्थान, तारीख और चर्चा के विषय की सूचना सचिव,

सदस्यों को बैठक से सात दिन पहले देंगें।

बैठक का संचालन कौन करेगा

• महिला आरक्षित पदों पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को स्वयं ही उस बैठक का संचालन करना होगा अन्य कोई भी (पति एवं अन्य परिजन) उनके स्थान पर बैठकों में भाग नहीं ले सकेंगे। (मध्यप्रदेश शासन पं. एवं ग्रा.वि.वि. मंत्रालय, 462/178 / 2015/22-पी-2 भोपाल दिनांक 28.04.2015) भोपाल पत्र कमांक

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बैठक का कोरम

● की बैठक में हुए सदस्यों में से अगर आधे सदस्य आये तो कोरम पूरा होगा। अगर आधे सदस्य नहीं आते है तो पीठासीन अधिकारी बैठक को स्थगित कर देंगे।

यह स्थापित बैठक जब दुबारा बुलायी जायेगी तब कोरम का पूरा होना जरूरी नहीं है, लेकिन इस ठक में चर्चा उन्हीं बातों पर होगी जो पहले बैठक हेतु तब से मतलब यह कि कोई नया विषय चर्चा के लिए नहीं लिया जायेगा।

बैठक की कार्यसूची

पंचायत कि बैठक की कार्यसूची पंचायत के सचिव पंचायत के सरपंच की सलाह से तैयार करेगें। इस कार्यसूची में अगर जनपद पंचायत, जिला पंचायत या कलेक्टर ने कोई विषय भेजा है तो उसे भी शामिल करेंगे।

बैठक में बोलना

पंचायत की बैठक में उसके सभी सदस्यों को बोलने और मत देने का अधिकार होगा। पंचायत की बैठक में बोलते समय संतुलित और संयमित व्यवहार जरूरी है। बैठक में बोलते समय यह ध्यान रखना जस्ती है कि

• किसी भी न्यायालय में विचाराधीन विषय पर नहीं बोलेंगे ● पंचायत के काम-काज और उससे सम्बद्ध व्यक्ति के काम तथा जिम्मेदारी से जुड़े विषय पर ही

बातचीत होगी। • किसी भी स्तर की पंचायत राज्य के विधानमण्डल (विधानसभा) और संसद की कार्यवाही या संकल्प से

जुड़े किसी भी विषय पर संतापकारी (अपशब्द, व्यंग्यात्मक बात या गरिमा कम करने वाली बात) का इस्तेमाल नहीं करेंगे। • ऐसे शब्द जिनसे किसी को भी मानहानि होती हो उन शब्दों का प्रयोग व उच्चरण नहीं करेंगे।

• पंचायत के काम-काज को प्रभावित नहीं कर सकते।

• सभापति ही यह तय करेंगे कि कब कौन बोलेगा सभापति जिस भी सदस्य को बोलेंगे वह सदस्य अपने स्थान पर चुपचाप बैठ जायेगा।

बैठक में बैठना

बैठक में कौन कहां बैठेगा यह तय करना समापति का अधिकार है। हो सकता है कि अभी सब लोग खाली स्थान और जगह पर बैठ जाएं लेकिन समापति स्थान बदल सकते हैं। सभापति यह तय करेंगे कि सचिव की सीट कौन सी होगी, उपसरपंच की सीट कौन सी होगी और बाकी सदस्य कहां बैठेंगे।

बैठक में व्यवस्था भंग होने का दोष

पंचायत के किसी भी सदस्य और पदाधिकारी पर व्यवस्था भंग करने का दोष नीचे बतायी गयी परिस्थितियों में लगाया जा सकता है।

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भाषा
अगर आपतिजनक भाषा या संतापकारी (शब्दगरिक करने शब्दों का उपयोग किया है और यह उन शब्दों को लेने को तैयार नहीं है और न

रहे हैं।

बैठक के संचालन में जानबूझकर गड़बड़ी पैदा करते हैं। की बात या आदेश नहीं मानते।

सभापति सभापति जब सदस्य को अपने स्थान पर बैठने को बोले तो उनकी बात न मानने

पररा

सदस्यों को अधिकार है कि वे – पंचायत के काम करने में गड़बड़ी

धन के दुरूपयोग

. पंचायत क्षेत्र की जरूरत पर सभापति का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं और जरूरी सुझाव दे सकते

है। बैठक में फैसला

पंचायत की बैठक में सभी सदस्य मिलकर फैसला लेंगे और जा भी प्रस्ताव पास होगा वह पंचायत का निर्णय माना जाएगा न कि सदस्य का फैसला।

फैसला तीन बातों का है –

सभापति द्वारा किसी सदस्य के भाग लेने से रोकने पर पंचायत के सदस्यों द्वारा चर्चा के लिए रखे गए संकल्पों और ध्यानाकर्षण पर

पंचायत के प्रशासन और योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर पंचायत का फैसला वोट डालकर या मत विभाजन से होगा। किस विषय पर कब मत विभाजन से यह सभापति तय करेंगे। पंचायत का अंतिम निर्णय साधारण बहुमत से होगा (मतलब 20 में से 11 सदस्य जिस बात के पक्ष में

बोलेंगे वही फैसला होगा )

बैठक की अध्यक्षता कौन करेगा

बैठक की अध्यक्षता सरपंच करेंगे। अगर सरपंच नहीं है तो उपसरपंच अध्यक्षता करेंगे अगर उपसरपंच भी नहीं है तो पंच आपस में किसी एक सदस्य को उक्त दिवस की बैठक के लिए सभापति मनोनीत करेंगे।

सभापति या अध्यक्ष की शक्ति

पंचायत की बैठक की अध्यक्षता कर रहे सभापति को कुछ विशेष अधिकार दिये गये हैं। जो इस

प्रकार है

  1. अगर सभापति को यह लगता है कि बैठक में जिस विषय पर चर्चा हो रही है उस पर जो निर्णय होगा उससे किसी सदस्य को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से धन मिल सकता है तो वह उस सदस्य को बैठक में मतदान या चर्चा से रोक सकता है। अगर सभापति किसी को मत देने से रोकते हैं तो यह सदस्य इसका विरोध कर सकता है और यह बात सभापित बैठक में रखेंगे। बैठक में उपस्थित सदस्य यह

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करें कि सभापति ने जो किया है, यह सही है या गलत इस बारे बारे मे जो फैसला लेंगे यह अंतिम होगा। जब इस विषय पर वोट पड़े तो वह सदस्य जिसके बारे में चर्चा हो रही है, इससे नोट नहीं दे पायेगा। 2. पंचा सदस्य पंचायत से जुड़े किसी भी विषय पर चर्चा के लिये संकल्प प्रस्तुत कर सकते है। यह संकाय चर्चा के लिये रखा जायेगा या नहीं यह बात सभापति तय करेंगे। सभापति का फैसला अंतिम

होया सभापति ही सदस्यों द्वारा दिए गए संकल्प पर उन्हें बोलने और चर्चा शुरू करने की अनुमति

देंगे। सदस्य को यह अधिकार होगा कि यह अपना नाम बुलाए जाने पर संकल्प सबके सामने रखे या

उसे से

  1. सदस्य का संकल्प चर्चा के लिये स्वीकार किया जाए या नहीं यह तय करना सभापति का अधिकार है।

तय करते समय सभापति यह ध्यान देंगे कि संकल्प पंचायत अधिनियम और उससे जुड़े नियमों का उल्लंघन तो नहीं कर रहा। सभापति का फैसला अंतिम होगा। 4. सम्मपति सदस्य को व्यवस्था भंग करने के आरोप में बैठक से बाहर निकाल सकते

  1. सभापति बैठक में अव्यवस्था होने पर उसे स्थगित कर सकते हैं।
  2. कार्यवाही पुस्तिका में दस्तखत करेंगे।

पंचायतों के सदस्यों के अधिकार

पंचायत की बैठक में लोकतंत्र और समानता के आधार पर बातचीत हो तथा फैसला लिया जाए यह सुनिश्चित करने के लिए ही सदस्यों को बहुत से अधिकार दिए गए हैं। सदस्यों का एक बड़ा अधिकार है बैठकों की सात दिन पहले जानकारी और यह भी पता चलना कि बैठक में मुद्दा क्या है। इसके साथ ही सदस्यों को अपनी बात रखने के लिए भी संकल्प और ध्यानाकर्षण की व्यवस्था है। ध्यानाकर्षण हमने नीचे समझाया है।

ध्यानाकर्षण

ध्यानाकर्षण यानि किसी खास विषय पर पंचायत का ध्यान केन्द्रित करना या लगाना। कई बार ऐसा हो सकता है कि पंचायत अपनी रोज की जिम्मेदारी में कुछ बात या महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा न कर पाए ऐसी स्थिति में पंचायत का कोई भी सदस्य सम्बन्धित विषय या बात पर चर्चा करने के लिए पंचायत का ध्यान आकृष्ट (खींच कर सकता है।

ध्यानाकर्षण भी दो तरह के होंगे –

• किसी भी विषय पर चर्चा करने के लिए • कोई जानकारी मांगने के लिए

ध्यानाकर्षण की सूचना

दोनों तरह के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव को सूचना पंचायत की बैठक से कम से कम पांच दिन पहले सदस्य द्वारा लिखित रूप से दी जाएगी। जिस विषय पर जानकारी मांगने के लिए ध्यानाकर्षण दिया गया है उस विषय पर पंचायत की बैठक में चर्चा नहीं होगी। सदस्य को सिर्फ जानकारी दी जाएगी।

संकल्प क्या है

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हैं।
पंचायत के सदस्य अपने काम-काज के लिये उतने ही जिम्मेदार है जितना कि का सरपंच/अध्यक्ष या दूसरा कोई सदस्य पंचायत सदस्य के रूप में कई बार यह महसूस हो सकता है कि पंचायत अपनी कुछ जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभा पा रहा था का प्रशासन ठीक से नहीं रहा है या पंचायत की बैठके ठीक से नहीं हो रही है। ऐसीयत का कोई भी सदस्य पंचायत के प्रशासन तथा जिम्मेदारी से जुड़े विषय पर अपनी का प्रस्ताव रख सकता है। इसी को संकल्प कहा जाता है। संकल्प पूरी पंचायत के सामने रखा जाएगा और पथ के बाद पूरी पंचायत का संकल्प बनेगा तथा इस संकल्प को लागू करने की जिम्मेदारी पंचायत की और उसके कर्मचारियों की होगी।

संकल्प का प्रारूप

संकल्प की भाषा समझ में आने वाली होनी चाहिए। संकल्प में पंचायत के प्रशासन तथा काम से जुड़े किसी विषय को उठाना चाहिए। संकल्प बनाते समय किसी तर्क, किसी अनुमान, व्यंग्यात्मक बात या अपमानजनक शब्द नहीं होना चाहिए और न ही किसी व्यक्ति की निजी जिन्दगी या अतीत से जुड़ा विषय होना चाहिए।

संकल्प पर फैसला

सभापति को यह तय करना है कि वे कई संकल्पों पर एक साथ मतदान करवाएंगे या हर संकल्प के लिए अलग-अलग मतदान करवा कर फैसला करवाएंगे। फैसला साधारण बहुमत से होगा।

संकल्प पर चर्चा

किसी भी संकल्प पर होने वाली चर्चा खाली संकल्प तक ही सीमित रहेगी। चर्चा में संकल्प के बाहर का या कोई दूसरा नया विषय नहीं उठाया जायेगा। संकल्प की सूचना

हम यह पहले ही साफ कर चुके हैं कि संकल्प का प्रयोग किसी को नीचा दिखाने या उसका अपमान करने के लिए नहीं किया जा सकता। अपने संकल्प की सूचना लिखित रूप से पंचायत के सचिव, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जनपद और जिला के लिए) या सरपंच/अध्यक्ष को बैठक से पांच दिन पहले दी जा सकती है।

संकल्प पर प्रस्तावक के दस्तखत होना जरूरी है। संकल्प की सूचना के साथ-साथ संकल्प की प्रतिलिपि भी देनी होगी। .

यदि सभापति चाहे तो विशेष कारणों के आधार पर पांच दिन से कम समय में भी संकल्प प्रस्तुत करने की अनुमति दे सकते हैं।

बैठक की कार्यवाही पुस्तिका

हर पंचायत की एक कार्यवाही पुस्तिका होगी। उपस्थित सदस्यों के नाम

उपस्थित सरकारी अधिकारियों के नाम (रिपोर्ट)

पंचायत की सभी कार्यवाही का कार्यवृत्त (रिपोर्ट)

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पंचायत में रखे गए संकल्प के पक्ष या विपक्ष में वोट देने वाले या तटस्थ रहने वाले सदस्यों के

नाम होगे।

पंचायत बैठक की यह कार्यवाही बैठक खत्म होने के दस दिन बाद, बैठक में आये सभी सदस्यों को दिखायी जाएगी। हर की कार्यवाही रिपोर्ट पर उस दिन बैठक की अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति के दस्तखत

कार्यवाही देवनागरी (हिन्दी) में लिखी जायेगी और सदस्य जब भी इस कार्यवाही पुस्तिका को देखना चाहे यह खुली रहेगी। (कार्यालय समय के भीतर) बैठक की कार्यवाही की एक प्रतिलिपि 15 दिन के भीतर जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन

अधिकारी को भेजी जाएगी।

बैठक न बुलाने पर

अगर पंचायत के सरपंच धारा-44 की उपधारा (4) व (6) के अनुसार बैठक तीन बार बुलाने में असमर्थ रहते हैं तो –

ग्राम पंचायत के सचिव

• विहित प्राधिकारी को रिपोर्ट देंगे। विहित प्राधिकारी पंचायत एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा-40 और इससे जुड़े दूसरे नियमों के अनुसार उचित कार्यवाही करेंगे।

ग्राम पंचायत के कार्य

  1. ग्राम पंचायत क्षेत्र की साफ-सफाई एवं स्वच्छता बनाये रखना । 12. गांव में लोगों को साफ पीने का पानी

घरलब्ध कराना।

  1. गांव की सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर प्रकाश की व्यवस्था करना।
  2. रोजगार तथा आजीविका के साधन उपलब्ध कराना।
  3. सभी जरूरतमंद लोगों को आवास उपलब्ध कराना।
  4. ग्राम पंचायत की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं
  • देखभाल करना ।
  1. ग्राम विकास की योजना बनाना तथा उसे पूरा करना।
  2. क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों की देखभाल करना और उनके दुरुपयोग
  3. सायद राई एवं दुमयाओं को रोकना । 11. महिला एवं वंचित वर्गों के साथ भेदभाव

को समाप्त करना ।

  1. ग्रामीण सड़कों एवं सार्वजनिक भवनों का निर्माण कराना।
  2. अच्छी शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना।

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“दिव्यांग एवं निराश्रितों को सहायता उपलब्ध कराना।

14 गांव से पलायन को रोकना।

  1. राम पंचायत द्वारा स्वयं की आपके संसाधनों को बचाना।

16 ग्राम पंचायत क्षेत्र में लगने वाले बाजारों। एवं मला की व्यवस्था करना। असामाजिक तत्वों पर नियंत्रण कर शांति

व्यवस्था बनाये रखना।

  1. दैनिक खेती को प्रोत्साहित करना। 20फर्णा की बैंकल्पिक साधनों के उपयोग की

केन्द्र राधा राज्य शासन की योजनाओं को

222 गतिको लढ़ने वालों की भागीदारी बढ़ाना।

  1. पचायत की सम्पत्ति पर से अतिक्रमण
  2. ई-साक्षरता को प्रोत्साहन देना।

हमने को अधिकार

ग्राम पंचायत की स्थायी समितियां

अधिनियम की धारा 46 (1) के अनुसार ग्राम पंचायत अपने काम को पूरा करने के लिए तीन प्रकार की समितियां बनायेगी। जिसमें

  1. कोई भी व्यक्ति एक समय में दो से अधिक समितियों का सदस्य नहीं होगा।

ग्राम पंचायत की स्थायी समितियां

सामान्य प्रशासन समिति

निर्माण एवं विकास समिति

शिक्षा, स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण समिति ।

इन समितियों का कार्यकाल पंचायत के कार्यकाल के बराबर होगा।

बुलाये गये सम्मेलन में पंचों के बीच में से चार सदस्य समिति के लिए चुने जायेंगे और सरपंच/उपसरपंच भी समिति के पदेन सदस्य होंगे। ग्राम पंचायत सचिव ही स्थायी समितियों का सचिव होगा।

  1. समितियों की बैठक हर माह सभापति बुलायेगा। 2. समय एवं स्थान पहले से सुनिश्चित करना होगा।
  2. बैठक की जगह एवं समय की सूचना बैठक से 3 दिन पहले समिति सदस्यों को देना होगा।
  3. आधे सदस्यों के रहने पर बैठक मान्य होगी।

स्थायी समितियाँ- (1) प्रत्येक ग्राम पंचायत अपने पंचों में से निम्नलिखित स्थायी समितियों का गठन कर सकेगी सामान्य प्रशासन समिति ग्राम पंचायत के प्रशासन की स्थापना और सेवाओं, ग्राम पंचायत क्षेत्र में निर्माण का अनुमोदन, बजट, लेखे, कराधान तथा अन्य वित्तीय विषय, भूमि विकास तथा संरक्षण,

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खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राजस्व बीस सूत्रीय कार्यक्रम और ग्राम पंचायत को सममुदशित किये गये तथा किसी अन्य समिति को आटत न किए गए समस्त अन्य विषयः

(ख) निर्माण तथा विकास समिति ग्राम पंचायत के क्षेत्र में योजना प्रबन्धन, कार्यान्वयन तथा सभी निर्माण कार्यों का पर्यवेक्षण अभिन्यास ले-आउट की योजना, बजट तथा कार्यान्वयन, सभी प्रकार की स्कीने और कार्यक्रम संचार में सुधार, ग्राम कुटीर तथा खादी उद्यागों के विकास पर विशेष जोर विशेषत महिला तथा बच्चों के लिये उधान और उपवन (पार्क), भविष्य में निर्माण हेतु अपनी स्वयं की परियोजनाओं का प्रस्ताव ग्रामीण विद्युतीकरण वन, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, डेयरी, कृषि तथा जल संसाधन

0 शिवार, स्वास्थ्य तथा समाज कल्याण समिति- ग्राम पंचायत क्षेत्र में के सभी विद्यालयों के निरीक्षण, प्रत्येक भास की 8 तारीख तक पूवर्तवत मास के दौरान शिक्षकों की उपस्थिति का प्रमाणन अनौपचारिक शिक्षा की प्रोन्नति तथा सहायता, प्रौढ़ शिक्षा जिसमें आई.सी.डी.एस. आंगनबाड़ी तथा बालवाड़ी तथा सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, टीकाकरण तथा परिवार नियोजन कार्यक्रम सहित सभी कल्याण स्कीमों को प्रोत्साहन और निरीक्षण तथा ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण स्कीम तथा स्वास्थ्य केन्द्रों का निरीक्षण तथा उनकी उपस्थिति का प्रमाणन, सामाजिक रूपाण पिछड़े तथा समाज के विकलांग वर्गों तथा लोगों के लिये कल्याण स्कीमों का निर्माण तथा कार्यान्वयन तथा ग्राम पंचायत क्षेत्र में आरोग्यता तथा स्वच्छता, महिला एवं बाल विकास, समाजा कल्याण अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य पिछड़े वर्गों के लिये तथा उन लोगों के लिए जो गरीबी रेखा से नीचे हैं, विकास तथा विशेष कार्यक्रम, मत्स्यपालन, खेलकूद तथा श्रम।”

प्रत्येक समिति में चार सदस्य होंगे जो इस प्रयोजन के लिये ग्राम पंचायत द्वारा विशिष्टतः

नियंत्रण और प्रबंधन का मतलब यह है कि सभी योजनाओं पर ग्रामसभा में विचार होगा और जिस तरह से भी ग्रामसभा इन योजनाओं को लागू करना तय करेगी, ग्राम पंचायत वैसा ही करेगी। अतः यह भी हो सकता है इसके लिए योजना के ऊपर से भेजे गए निर्देशों को जरूरत के हिसाब से बदल लिया जाए।

महात्मा गांधी राज्य एवं संस्थाता, जबलपुर (म.प्र.)

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