Gram Panchayat Income

ग्राम पंचायत की आय के स्त्रोत

आता बजट बनाने से पहले यह जानका है? प्राप्त होने वाली राशि का अनुमान का अनुमान लगाया जाता है। यह स्पष्ट है कि सरकार द्वारा लोगों के लिए संचालित की जाती है। उनमें से कई योजनाओं का क्रियान्वयन ग्राम पंचायतों द्वारा किया जाता है जैसे, सामाजिक सुरक्षा और किन काम के लिए देश मनरेगा, आदि।

इनके लिए सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों को राशि दी जाती है। अतः बजट बनाने के लिए यह जानना जरूरी है कि वर्ष में सरकार द्वारा पंचायत को किन-किन योजनाओं में कितनी राशि दी जाएगी।

जब हम पंचायत को मिलने वाली राशि से उसे होने वाले आय के बारे में विचार करते हैं तो पाते है कि पंचायत को तीन प्रमुख स्रोतों से आय होती है. एक सरकार से विभिन्न योजनाओं के लिए प्राप्त दूसरी वित्त आयोग के अंतर्गत प्राप्त राशि और तीसरी पंचायत के अपने स्रोतों से आय

बिल आयोग की राधि

भोजवाजी मह

केन्द्रीय

राज्य

दिल्ल डायोग राशि

वित्त आयोग की राशि

सरकार

योजनाएं

राज्य की योजनाएं

अनिवार्य करों से आय

वैकल्पिक करों से आय

रिसोर्स एनवलप (राशियों की प्राप्तियाँ)

जैसा कि हम ऊपर दिये गए फ्लो चार्ट के माध्यम से देख पा रहे हैं कि ग्राम पंचायत के पास आमदनी के भिन्न-भिन्न स्रोत होते हैं। इसलिए पंचायत जब अपनी कार्ययोजना बनाती है तब उसे अपने सभी प्राप्तियों का सही-सही ज्ञान और आंकलन होना बहुत आवश्यक हैं।

इसीलिए आज जब ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत विकास योजना बनाने की बात होती हैं तो पंचायत को प्राप्त होने वाली समस्त राशियों (वित्तीय संसाधनों) के साथ-साथ अन्य संसाधनों जैसे मानव संसाधन, सामुदायिक संसाधन, प्राकृतिक संसाधन आदि भी एक ग्राम पंचायत के विकास और प्रगति में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं।

अगर उसका एक व्यवस्थित और सुनियोजित ढंग से इस्तेमाल करें। अतः ग्राम पंचायत की प्लानिंग और बजटिंग के समय उसकी सभी संभावित संसाधनों को एकसाई (एक साथ) आंकलन करके एक लिखित प्रारूप में तैयार करना। जिसके आधार पर पंचायत अपने संसाधनों (रसोर्स) का आंकलन कर सकती है, उसे रिसोर्स एनवलप कहते है।

वित्त आयोग की अनुशंसा और मिलने वाली राशि

केन्द्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के बंटवारे के लिए दिशा निर्देश सुझाने हेतु केन्द्रीय वित्त आयोग का गठन किया जाता है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 280 में यह प्रावधान है कि राष्ट्रपति द्वारा हर पांच साल में या आवश्यकता पड़ने पर उससे पहले एक वित्त आयोग का गठन किया जाएगा।

वित्त आयोग द्वारा यह अनुशंसा की जाती है कि कितने संसाधन केन्द्र सरकार के पास होंगे तथा कितने संसाधन राज्य सरकारों और कितने संसाधन स्थानीय स्वशासन यानी पंचायत एवं नगरीय निकायों को आवंटित किए जाएंगे। अभी तक भारत में 15 वित्त आयोग गठित किए जा चुके हैं 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा 2021 में लागू की गई थी. जो 2025 तक चलेगी।

संलग्न आदेश

पंचायत राज व्यवस्था की स्थापना के पीछे सबसे बड़ा उद्देश्य यह रहा है कि ग्राम स्तर पर लोग खुद अपने विकास तथा सामाजिक बदलाव की जिम्मेदारी लें।

ऐसा संविधान की भावना के अनुसार हो इसलिए मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993″ में बहुत अगर पंचायत तथा ग्राम सभा के पास अर्थिक संसाधन नहीं होंगे तो या तो वे कोई भी काम नहीं कर पाएंगे या फिर पैसा व साधन देने वाली संस्था के दिशा-निर्देश पर चलने के लिए मजबूर होंगे।

इसलिए यह जरूरी है कि पंचायतें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो। अतः हमें यह समझना होगा कि पंचायत की आय के स्रोत क्या-क्या हैं और इस संबंध में प्रदेश पंचायत राज अधिनियम में क्या व्यवस्था है ?

राज्य वित्त आयोग

संविधान के अनुच्छेद 243 ( आई ) (वाय) तथा मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग अधिनियम के अनुसार राज्य वित्त आयोग का गठन किया गया है। राज्य वित्त आयोग द्वारा राज्य के वित्तीय संसाधन राज्य एवं पंचायतों व नगरीय निकायों को आवंटित किए जाने के लिए अनुशंसा की जाती है।

वर्तमान में मध्यप्रदेश में तृतीय राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा के अनुसार राशि आवंटित की जाती है। प्रदेश सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर आवंटित राशि से ग्राम पंचायतों द्वारा निम्नलिखित कार्य करवाए जा सकते हैं।

  1. स्वास्थ्य एवं सफाई सार्वजनिक सड़कों, संडासों, नालियों तथा स्वछता के अन्य स्थानों का निर्माण एवं संधारण ।
  2. पेयजल व्यवस्था सार्वजनिक कुओं, तालाबों का निर्माण, मरम्मत एवं घरेलू उपयोग (पानी, नहाने धोने) हेतु जल प्रदाय, पशुओं के पीने के लिए जल प्रदाय हेतु जल स्रोतों का निर्माण एवं संरक्षण।
  3. आवागमन के साधनों का विकास ग्रामीण सड़कों, पुलियों/पुलों, बांधों का निर्माण एवं संरक्षण।
  4. सार्वजनिक स्थलों एवं भवनों का निर्माण सार्वजनिक उपयोग के स्थानों तथा भवनों का निर्माण एवं संरक्षण।
  1. आंतरिक संरचना का सुधार गांवों के अंदर की गलियों चौराहों का सुधार, निर्माण तथा मरम्मत जिसमें खड़ंजा का प्रयोग एवं कांकीट का निर्माण भी शामिल है ।
  2. प्रकाश व्यवस्था ग्रामीण सार्वजनिक स्थानों मार्गों पर पंचायत की ओर से प्रकाश की व्यवस्था करना, विशेषकर गैर-परम्परागत ऊर्जा प्रयोग को बढ़ावा देना।
  3. भू-जल संरक्षण एवं पुर्नभरण : गांवो में भू-सतह में जल का संरक्षण एवं भू-गर्भीय जल को रिर्चाज करने हेतु प्रोत्साहन एवं विकास के लिए योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन।
  4. हरित ग्राम पंचायत की अवधारणा का विकास ग्राम पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत वृक्षों तथा वनों का संरक्षण एवं विकास करना तथा खाली पड़े सार्वजनिक क्षेत्रों में वृक्षारोपण का सार्वजनिक एवं वैयक्तिक कार्यक्रम चलाना।

जिला पंचायत राज निधि :

दायतराज अधिनियम की धारा 76 के अनुसार – जिला स्तर पर जिला पंचायत

राज निधि के नाम से एक पृथक निधि जो इसमें इसके पश्चात उक्त निधि के नाम से निर्दिष्ट है) गठित की जायेगी और उसे ऐसी रीति में जैसे कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए चलाया जाएगा।

(2) धारा 77 की उपधारा (2) के अधीन विकारा कर और उसके साथ ऐसे अन्य कर फीस तथा अन्य प्राप्तियां जैसे कि राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए के आया उसमें से ऐसे संग्रहरण प्रभारों की, जैसे कि समय-समय राज्य सरकार द्वारा अवधारित की जाए करने के पश्चात उक्त निधि में जमा किये जाएंगे।]

रकम का पंचायतों के बीच संवितरण (पारा 76-क.) –

किसी जनपद पंचायत के क्षेत्र से धारा 77 की उपधारा (3) के अधीन उगाहा गया विकास कर जनपद पंचायत और उस जनपद पंचायत के भीतर की ग्राम पंचायतों को ऐसे अनुपात में तथा ऐसी रीति में, जैसी कि विहित किया जाए. अंतरित किया जाएगा। यह अतिरिक्त स्टॉम्प शुल्क से संबंधित रकम [जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत] को सहायता अनुदान के

रूप में ऐसे नियमों के अधीन रहते हुये जैसे कि इस निमित्त बनाये जाएं. दी जाएगी। में जमा की गयी धारा 78 की उपधारा (2) के अधीन विनिर्दिष्ट किये गए अन्य करों शुल्कों, पथकरों कीस तथा प्राप्तियों से संबंधित रकम पंचायतों के बीच. ऐसी रीति में जैसे कि विहित की जाए. संवितरित की जाएगी।

बैजनाड़ी से प्राप्त अनुदान

केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा कई विकास योजनाएं संचालित की जाती है। गांव स्तर पर इन योजनाओं का क्रियान्वयन ग्राम पंचायत द्वारा किया जाता है। इसके लिए सरकार द्वारा ग्राम पंचायतो को राशि आवंटित की जाती है। अतः यहां सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत दी जाने वाली अनुदान राशि की जानकारी दी गई है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाया जाता है। इस रोजगार के माध्यम से कई विकास कार्य ग्राम पंचायतों में करवाए जा सकते हैं।

भारत सरकार द्वारा जारी नए दिशा निर्देशों के अनुसार मनरेगा की राशि से अब निम्नलिखित कार्य करवाए जा सकते हैं, इन कार्यों से लोगों को रोजगार मिलने के साथ ही गांव में आजीविका विकास हेतु संसाधनों का निर्माण होगा और लोगों की आजीविका में भी सुधार होगा। मनरेगा के अंतर्गत निम्नलिखित कार्य किए जा सकते हैं:

जल संवर्धन एवं संरक्षण के कार्य जैसे खेतों में पलाएं कदूर ट्रेच छोटे वजन आदि।

सूबे की शेलथान (वर्गीकरण एवं पौवा रोपण सहित) के कार्य । 3. सिचाई, नहर निर्माण साहको एंव लघु सिंचाई दायेो सहित)

इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत समावित हिस्सादिय उप भूमि सुधार के हितग्राही अपवा अजा/अजजा के व्यक्तियों द्वारा पारित भूली के लिये सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना। 5. परम्परागत जल स्रोत संरचनाओं का पुनरुद्वार (तालाबों से गाँव निकालने साहिल)।

भूमि विकास के कार्य ।

बाढ़ नियंत्रण एवं जल निकासी संबंधी कार्य । ६. बारहमासी ग्रामीण पहुंचमार्ग का निर्माण।

केन्द्र शासन द्वारा राज्य शासन के परामर्श से अधति अन्य कार्य।

मनरेगा के अंतर्गत कई उप योजनाओं का क्रियान्वयन भी किया जाता है जिनमें कपिलधारा उप योजना, नंदन फलोद्यान उपयोजना, भूमि शिल्प उपयोजना, रेशम उपयोजना, वन्या उपयोजना, निर्मल वाटिका उपयोजना, निर्मल नीर उपयोजना प्रमुख है। इन योजनाओं के अंतर्गत विभिन्न हितग्राही मूलक कार्य किए जाते हैं।

मनरेगा के अंतर्गत किए जाने वाले निर्माण कार्यों में कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा मजदूरी में खर्च करना जरूरी है। यानी सामग्री में 40 प्रतिशत से अधिक राशि खर्च नहीं की जा सकती है। मनरेगा के अंतर्गत प्रत्येक जॉब कार्ड धारी को वर्ष में 100 दिन का रोजगार न्यूनतम मजदूरी की दर पर दिया जाता है।

अन्य मदों से बदलने वाली लशि

ऊपर दी गई योजनाओं में ग्राम पंचायतों को सरकार से नियमित रूप से राशि मिलती है। यानी इसके लिए हर साल बजट तैयार किया जाता है और उसके आधार पर राशि मिलती है। किन्तु कुछ मद ऐसे हैं, जिनसे नियमित रूप से पंचायतों को राशि नहीं मिलती, बल्कि जिस पंचायत से मांग आती है उस पंचायत की मांग पर विचार करके राशि आवंटित की जाती है। इसके अंतर्गत विधायक निधि, सांसद निधि, जनपद एवं जिला पंचायत के परफारमेंस फंड से किसी खास काम के लिए राशि प्राप्त की जा सकती है।

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विधायक और सांसद निधि

विधायकों और संसद सदस्यों को अपने-अपने क्षेत्र में विकास कार्यों को स्वीकृत करने का अधिकार है। विधायक और संसद सदस्य क्षेत्र में भ्रमण के दौरान जो समस्याएं देखते हैं या लोग उनसे जो मांग करते हैं, उन मांगों को उचित पाए जाने पर वे उस काम की घोषणा करते हैं।

किन्तु उनके द्वारा सिर्फ घोषणा कर दिए जाने मात्र से ही काम नहीं हो जाता, बल्कि इसके लिए हर जिले में एक जिला योजना मण्डल है, जिसके सचिव जिला कलेक्टर होते हैं। विधायक एवं संसद सदस्य अपने मद से जो काम करवाना चाहते है, उसे लिखित में जिला योजना मंडल को देते हैं। जिला योजना मंडल द्वारा उस काम के लिए राशि आवंटित की जाती है।

कैसे प्राप्त करें विधायक एवं सांसद निधि?

विधायक एवं सांसद निधि से कोई काम करवाने के लिए आमतौर पर लोग अपने विधायक व सांसद रो मौखिक मांग करते हैं। कई बार मौखिक मांग करना ज्यादा असरकारक नहीं होता, क्योंकि उससे उस काम की जरूरत के बारे में उन्हें पता नहीं चलता है। अतः अपने विधायक एवं सांसद से लिखित में एवं पूरी जानकारी देकर मांग करना बेहतर होता है। इसके लिए यह प्रक्रिया अपनाई जा सकती है

• सबसे पहले उस काम का चयन करें, जो विधायक एवं सांसद निधि से करवाया जाना है। उस काम की जरूरत एवं प्राथमिकता का आकलन करें। यानी यह देखें कि उस काम से किन्हें व कितने लोगों को लाभ होगा? यह काम न होने से कौन लोग किस हद तक परेशान है? इसके लिए चाहे तो एक सर्वेक्षण कर सकते हैं। इस तरह उस काम की जरूरत को एक रिपोर्ट के रूप में लिखें।

• इसके बाद यह देखें कि उस काम में कितना खर्च होगा। खर्च के इस अनुमान को “स्टीगेट”

कहा जाता है। स्टीमेट संबंधित व्यक्तियों द्वारा बनाया जाता है। जैसे यदि आप बिजली का

कनेक्शन या डीपी लगवाना चाहते हैं तो उसका स्टीमेट विद्युत मंडल के कर्मचारी बनाएंगे। यदि

आप कोई निर्माण कार्य करवाना चाहते है तो उसका स्टीमेट जनपद पंचायत के इंजीनियर या

जिला ग्रामीण अभियांत्रिकी विभाग के इंजीनियर बनाएंगे। उस काम के बारे में ग्रामसभा में प्रस्ताव रखकर पारित करवाएं।

ग्राम पंचायत द्वारा संबंधित विभाग के अधिकारी को स्टीमेट बनाने के लिए लिखित में आवेदन दें।

स्टीमेट बनाने के बाद संबंधित विभाग से उसकी प्रति प्राप्त करें। • तब विधायक या सांसद महोदय के नाम एक आवेदन तैयार करें, जिसमें उस समस्या के बारे में विस्तार से लिखें।

इस आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज लगाएं: ० समस्या प्रभावित लोगों की संख्या और उसके बारे में किए गए आकलन की रिपोर्ट।

० स्टीमेट की प्रति।”

• ग्रामसभा द्वारा पारित प्रस्ताव की प्रति ।

• उपरोक्त आवेदन विधायक व संसिद महोदय को दें।

गांव में प्राप्त होने वाली अन्य राशि

ऊपर दी गई राशि ग्राम पंचायत को प्राप्त होती है और उसके लिए ग्राम पंचायत अपना वार्षिक बजट बनाती है। जबकि कुछ राशियां ऐसी भी हैं जो ग्राम पंचायत के बजाय ग्राम स्तरीय समितियों को कुछ खास विषय पर काम करने के लिए आवंटित की जाती हैं। इन राशियों को खर्च करने का फैसला संबंधित समितियां लेती हैं, किन्तु ग्रामसभा में उसकी जानकारी देना एवं उसका अनुमोदन करवाना जरूरी है।

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  1. ग्राम स्वास्थ्य निधि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत स्वस्थ ग्राम तदर्थ समिति को गांव में स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण संबंधी कार्यों के लिए हर साल 10 हजार रूपए की राशि आवंटित की जाती है। यह राशि ग्राम स्वास्थ्य निधि के बैंक खाते में जमा करवाई जाती है।
  2. इस खाते का संचालन समिति के अध्यक्ष एवं आशा कार्यकर्ता के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाता है। यह राशि गांव में स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण संबंधी किसी भी कार्य या गतिविधि पर खर्च की जा सकती है। 2. सर्व शिक्षा अभियान सर्व शिक्षा अभियान द्वारा स्कूलों के लिए विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत राशि

आवंटित की जाती है। यह राशि प्रत्येक शाला की शाला प्रबंधन समिति के बैंक खाते में जमा होती है। इस खाते का संचालन शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं सचिव (प्रधानाध्यापक) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाता है।

शाला प्रबंधन समिति को मिलने वाली प्रमुख राशियां इस प्रकार है शिक्षण सामग्री (टीएलएम) क्रय करने के लिए प्रत्येक प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला में प्रति शिक्षक 500 रूपए प्रति वर्ष आवंटित किए जाते हैं। इस राशि से शिक्षक जरूरी शिक्षण सामग्री खरीद सकते हैं। .

• प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में प्रत्येक विद्यार्थियों को गणवेश के लिए प्रतिवर्ष प्रति विद्यार्थी 400

रूपए की राशि आवंटित की जाती है। यह राशि शाला प्रबंधन समिति द्वारा विद्यार्थियों के पालकों के

नाम चैक द्वारा प्रदान की जाती है।

. मेन्टेनेन्स राशि भवन रखरखाव के लिए प्राथमिक शाला में हर साल 5000 रूपए तथा माध्यमिक शाला में हर साल 10000 रूपए की राशि आवंटित की जाती है। यह राशि भवन मरम्मत, पुताई आदि के लिए खर्च की जाती है।

. कन्टेन्जेंसी राशि कन्टेन्जेंसी के रूप में प्राथमिक शाला में हर साल 5000 रूपए तथा माध्यमिक शाला को हर साल 7,500 रूपए की राशि आवंटित की जाती है। इस राशि को टाट पट्टी, चाक, डस्टर, स्टेशनरी आदि पर खर्च किया जा सकता है।

स्वयं के साधन से होने वाली आय

ग्राम पंचायत अगर आत्मनिर्भर बनना चाहती है, और गांव के लोग यह सोचते हैं, कि गांव के विकास की योजना बनाते वक्त बाहरी लोग रोक-टोक की जगह सहयोग दें या मदद करें तो यह जरूरी है कि ग्राम पंचायत के आमदनी के स्रोत बढ़ें।

मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 के अनुसार पंचायत निम्न स्रोतों से अपनी आय बढ़ा सकती है

• स्वयं के आय के साधन विकसित करके

.

कर लगाकर दान तथा चंदा

• जुर्माना

• बैंक या अन्य संस्थानों से धन उधार लेकर

• गौण खनिज व अन्य प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी व व्यापार से • भूराजस्व का हिस्सा

पिछले पांच साल के कार्यकाल में पंचायतें अपने स्रोत विकसित नहीं कर पायी हैं और इस कारण पंचायतों की बाहरी साधनों और सरकार पर निर्भरता बढ़ी है।

बाहरी स्रोतों से होने वाली आय

ग्राम पंचायत को अपने स्वयं के स्रोतों के अलावा बाहर के निम्न स्रोतों से भी आय प्राप्त होती है –

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केन्द्र सरकार से विभिन्न योजनाओं तथा कार्यक्रमों के लिए प्राप्त होने वाले

राज्य सरकार से आर्थिक विकास व समाज कल्याण की योजनाओं के लिए प्राप्त होने वाले अनुदान राज्य वित्त आयोग की सिफारिश के आधार पर ग्राम पंचायत को दिया जाने वाला ध विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा ग्रामपंचायत क्षेत्र में किए जा रहे कामों पर होने वाले खर्च अन्य गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा पंचायत को दिया जाने वाला सं

. सांसद तथा विधायक निधि से प्राप्त होने वाला धन जनपद पंचायत तथा जिला पंचायत से विभिन्न योजनाओं और कार्यों के लिए प्राप्त होने वाला पन प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 49 के अनुसार अब पंचायतें सरकारी विभागों के द्वारा गांव में किए जाने वाले सभी वर्षों पर नियन्त्रण रख सकती है)

पंचायत निधि

पंचायत को जो संसाधन प्राप्त हो रहे हैं वह कहीं रहेंगे ताकि उस पर पूरी पंचायत का नियन्त्रण हो और जरूरत पड़ने पर ग्राम सभा के सदस्य भी इन साधनों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें। पंचायत में संसाधनों को एक व्यवस्था के अनुसार रखने के लिए मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 66(1) के अनुसार

प्रत्येक पंचायत एक पंचायत निधि की स्थापना करेगी और पंचायत को मिलने वाली सभी राशि इसी

निधि का भाग होगी।

• ग्राम पंचायत की पंचायत निधि पंचायत के पास के सरकारी खजाने या उपखजाने या डाकघर या सरकारी बैंक या किसी अनुसूचित बैंक की शाखा में रखी जाएगी। पंचायत निधि में रखा गया धन पंचायत की सम्पत्ति होगी और पंचायत इस धनराशि को ग्राम सभा से मंजूर योजनाओं और गतिविधियों को लागू करने में खर्च करेगी। ग्राम पंचायत हर ग्रामसभा की बैठक

में पंचायत निधि से निकाले गए धन उसके खर्च का कारण और निधि में शेष बधी राशि का विवरण

बताएगी।

ग्राम पंचायत निधि से

• पंचायत के सरपंच और सचिव के संयुक्त दस्तखत से पैसा निकाला जाएगा।

• पंचायत निधि से पैसा तभी निकाला जाएगा जब पंचायत ने उस काम के लिए प्रस्ताव पास किया हो। पंचायत द्वारा लगाए जाने वाले कर

देश में केन्द्र तथा राज्य सरकारों की आमदनी का सबसे बड़ा स्रोत इनके द्वारा लगाए जाने वाला कर है। मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 में ग्राम पंचायत की अपनी आय स्थिति मजबूत करने के लिए ग्राम पंचायत द्वारा दो तरह के कर लगाने की व्यवस्था है।

मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 के अन्तर्गत अब ग्राम पंचायत अपने गाँव की सीमा के भीतर रहने वाले निवासियों पर दो प्रकार के कर लगाएगी।

ग्राम पंचायत व्दारा लगाये जाने वाले कर

  1. अनिवार्य या जरूरी कर

• बाजार फीस

• बाजार में बेचे जाने वाले पशुओं की रजिस्ट्रीकरण फीस

महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज संस्थान अधारताल, जबलपुर (म.प्र.)

  1. वैकल्पिक कर या ऐसे कर जो ग्राम पंचायत चाहे तो लगा सकती है

• बैलगाडी, साईकिल या रिक्शों पर कर

• जलकर

• जन निकास फीस

• मोटर मानों से भिन्न यान पर फीस

अनिवार्य या जरूरी कर दे कर है जो पंचायत को लगाना जरूरी है। वैकल्पिक कर पंचायत के विवेक पर निर्भर करता है। अनिवार्य या जरुरी कर की व्यवस्था इस प्रकार हैं

ग्राम पंचायत कर कैसे लगाएगी ?

ग्राम पंचायत द्वारा लगाए जाने वाले किसी भी कर के लिए यह प्रक्रिया तय की गई है

• जिस चीज पर (जैसे मकान, बिजली, पानी, संडास आदि) कर लगाना है उसके लिए कर की एक दर तय करके ग्राम पंचायत उसे लगाने का संकल्प पास करेगी।

इस संकल्प को लिख कर ग्राम पंचायत सार्वजनिक स्थान पर चिपकायेगी और डोंडी पिटवाकर सूचना करवाएगी। • ग्राम पंचायत के सदस्य इस सूचना के एक महीने की समय-सीमा के भीतर अपने सुझाव तथा

आपत्ति

लिखित रूप में ग्राम पंचायत को दे सकते हैं। • ग्राम पंचायत एक माह की सीमा के बाद सभी आपत्तियों तथा सुझावों पर विचार करके कर तथा कर

की दर को तय करेगी जो ग्राम पंचायत द्वारा तय की गयी समय-सीमा से प्रभावी होगा (समय से जुड़ा नियम नीचे स्पष्ट किया गया है) • कर की इस दर की सूचना डोंडी पिटवा कर दी जाएगी तथा इसे लिखवाकर चिपकाया भी जाएगा

कर कब से प्रभावी होगा ?

कर से जुड़े नियम 4 के अनुसार कर सामान्य तौर पर हर वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक के लिए प्रभावी होगा। अगर यह कर 1 अप्रैल से प्रभावी नहीं होता है तो यह

• 1 जुलाई को खत्म होने वाली तिमाही या • 1 अक्टूबर को खत्म होने वाली तिमाही

1 जनवरी को खत्म होने वाली तिमाही 1 अप्रेल को खत्म होने वाली तिमाही

के लिए लागू होगा और इसके बाद वह 31 मार्च तक खत्म होने वाले साल के लिए लागू होगा। इन नियमों के अधीन करों की प्रस्तावित दर अनुसूची 1 और 2 में दी गयी है जो इस प्रकार है :

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पंचायत क्षेत्र के भीतर कोई वृत्ति या व्यापार करने वाले या आजीविका कमाने वाले व्यक्तियों पर कर की दर

ग्राम पंचायत द्वारा लगाए जाने का निर

कर का नाम सम्पत्ति कर

निजी शौचालयों की सफाई पर कर

प्रकाश कर

व्यापार-व्यवसाय, कलात्मक कार्य एवं आजीविका पर कर

आम पंचायत के अधीन किसी भवन के उपयोग पर फीस

  1. पशुओं के देचने पर फोन

कर का विवरण मकानों और भूमि पर सम्पत्ति कर राशि मकान और भूमि के मूल्य के आधार पर तय की जाती

निजी शौचालयों की सफाई करवाने के लिए यह कर। यह कर सभी लगाया जा सकता है, जब ग्राम पंचायत उन शौचालयों की सफाई की व्यवस्था करती हो।

यदि ग्राम पंचायत द्वारा गांव में प्रकाश की व्यवस्था की गई हो, तो ग्राम पंचायत प्रकाश कर लगा सकती है।

नियम 10 के अनुसार ऐसे धार्मिक स्थलों तथा दिया जाएगा। छात्रावास पर प्रकाश कर नहीं लगाया जाएगा. जिससे उसके मालिक को कोई किराया प्राप्त

नहीं होता है। ग्राम पंचायत क्षेत्र के भीतर कोई व्यवसाय करते हों. या कलात्मक कार्य (कारीगरी) करते हो या व्यापार या आजीविका चलाते हों तो उस पर दिया जाता है।

ग्राम पंचायत व्यवसाय कर लगा सकती है। यदि कोई ग्राम पंचायत के किसी भवन में अपने व्यापार-व्यवसाय के लिए सामान रखते हैं या ग्राम पंचायत की किसी भी सम्पत्ति का उपयोग करते हैं तो ग्राम पंचायत उस पर फीस ले सकती है।

यदि ग्राम पंचायत के अंतर्गत किसी बाजार या स्थान पर पशुओं की बिक्री की जाती है तो ग्राम पंचायत पशुओं के रजिस्ट्रेशन पर फीस ले सकती है।

● किसके द्वारा दिया जाता है यह कर भवन व भूमि के मालिक द्वारा दिया जाता है।

निजी शौचालयों के मालिक या किराएदार द्वारा दिया जाता है। (यानी शौचालयों का उपयोग करने वाले व्यक्ति द्वारा दिया जाता है।)

ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित मकान मालिकों या उसमें निवास करने वाले परिवार के मुखिया द्वारा

यह कर व्यापार-व्यवसाय या कारीगरी करने वाले व्यक्ति द्वारा

ग्राम पंचायत के नवन या सम्पत्ति का व्यापारिक उपयोग करने वाले व्यक्ति द्वारा यह फीरा दी जाती है।

यह फीस पशुओं को खरीदने वाले द्वारा दी जाएगी।

पंचायतराज संस्थान, अधारताल, जबलपुर (म.प्र.)

ग्राम पंचायत द्वारा लिए जाने वाले अनिवार्य करों की दर •मध्यप्रदेश ग्राम पंचायत अनिवार्य कर तथा फीस (शर्त तथा अपवाद) नियम 1996 के अनुसार

कर का विवरण

अधिकतम

न्यूनतम

सम्पत्ति कर

5000 रूपए से 12000 रुपए 100 रुपए पर 20 पैसा।

100 रुपए पर 30 पैसा।

मूलय के भवन व भूमि पर

12000 रूपए से अधिक मूल्य 500 रूपए पर 1 रूपया के भवन व भूमि पर

500 रूपए पर 1.50 रुपया।

ग्राम पंचायत

क्षेत्र में व्यापार-व्यवसाय, कारीगरी एवं आजीविका पर कर

11000 से 15000 रुपए

100 रुपए

200 रुपए

वार्षिक आय पर

300 रूपए

15001 से 20000 रूपए वार्षिक आय पर

150 रूपए

400 रूपए

20001 से 30000 रूपए | वार्षिक आय पर

200 रूपए

600 रूपए

50001 से 40000 रूपए वार्षिक आय पर

300 रूपए

40001 से 50000 रूपए वार्षिक आय पर

450 रूपए

900 रूपए

50001 या इससे अधिक

650 रूपए

1400 रूपए

| वार्षिक आय पर

ग्राम पंचायत के किसी भवन के व्यावसायिक उपयोग पर फीस

उपयोग किए जा रहे भवन के आकार के अनुसार फीस

30 पैसे प्रतिदिन प्रति वर्ग मीटर या 8 रूपए प्रतिमाह प्रति वर्ग मीटर की दर

50 पैसे प्रतिदिन प्रति वर्ग मीटर या 14 रूपए प्रतिमाह प्रति वर्ग मीटर की दर से

| से

रखे गए सामान के अनुसार

25 पैसे प्रति टोकरी या 50 पैसे प्रति

50 पैसे प्रति टोकरी या 1

रूपया प्रति

फीस

थैला। पशुओं की बिक्री पर रजिस्ट्रेशन फीस

थैला ।

सूअर, बकरा, बकरी, गया,

3 रूपए

120 रूपए

बछड़ा

भैसा, बैल, गाय, घोड़ा, घोड़ी

5 रुपए

25 रूपए

मेरा हाथी, ऊट

10 रूपए

30 रुपाए

महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज संस्थान, अधारताल, जबलपुर (म.प्र.)
वैकल्पिक कर

“वैकल्पिक कर के लिए प्रदेश सरकार द्वारा नियम बनाए गए हैं। जिसे “मध्यप्रदेश ग्राम पंचायत वैकल्पिक कर तथा फीस (शर्त तथा अपवाद) नियम 1906 कहा जाता है। इसके अनुसार ग्रामसभा द्वारा वैकल्पिक कर लगाने के बाद ग्राम पंचायत की बैठक में उस पर विचार किया जाता है

ग्राम पंचायत द्वारा लगाए जाने वाले वैकल्पिक कर मध्यप्रदेश ग्राम पंचायत वैकल्पिक कर था फीस (शत सभी अपवाद) नियम 1996 के अनुसार

कर और उसका विवरण

सवारी के काम आने वाले पशुओं के मालिकों

पर कर

कुत्तों और सुअर पालने वाली पर कर गसराय, धर्मशालाओं आदि के उपयोग के लिए।

कर

राशि 10 रूपए प्रति वर्ष

2 रूपए प्रतिवर्ष

• बरामद पर 50 पैसे प्रतिदिन ।

3 ग 3 मीटर या इससे छोटे कमरे पर 2 रूपए प्रतिदिन ।

3 ग 3 मीटर से बड़े कमरे पर 4 रुपए प्रतििदन ।

फर्नीचर युक्त कमरे पर 8 रूपए प्रतिदिन

शिविर भूमि 3 ग 3 मीटर तक कोई कर नहीं। • शिविर भूमि 3 ग 3 से अधिक पर 30 पैसे प्रतिदिन

जलकर नलों से जल की व्यवस्था के लिए।

2 रूपए प्रति पशु

नल-जल व्यवस्था के संचालन एवं रखरखाव पर होने वाले खर्च

जल निकासी – जिन पंचायतों में जल निकासी

पद्धति आरंभ की गई है।

ग्राम पंचायत क्षेत्र में खरीददार, दलाल, आदिवया, तौलने वाले या मापने वाले के रूप में | आजीविका चलाने वाले व्यक्तियों द्वारा देय ।

सामान्य खरीददार, दलाल या आढ़तिया पर 25 रूपए प्रति

वर्ष ।

अन्य वस्तुओं के दलाल के लिए 10 रुपए प्रति वर्ष । तौलने एवं मापने वाले के लिए 5 रुपए प्रतिवर्ष ।

ग्राम पंचायत क्षेत्र में प्रवेश करने वाले पाहनों के 5 रुपए प्रति दिन प्रति वाहन।

मालिकों पर कर (मोटर को छोड़कर) सार्वजनिक शौचालय के निर्माण, रखरखाव

कूड़ा करकट की सफाई के लिए

बस स्टैण्ड, तांगा स्टैण्ड के लिए फीस

किसी सार्वजनिक सड़क या स्थान पर कोई अस्थाई निर्माण करने या किसी निर्माण का कोई भाग आगे बढ़ाने या उसका अस्थाई रूप से

उपयोग करने के लिए फीस ग्राम पंचायत की अनुमति से चरागाह में पशुओं

चराने के लिए फीस

एवं 5 रूपए प्रति घर प्रति माह

20 रूपए प्रति वर्ष 2 रूपए प्रतिवर्ग मीटर प्रतिदिन ।

20 रूपए प्रति पशु प्रति वर्ष

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