ग्राम पंचायत का बजट | Gram Panchayat Budget

ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत द्वारा हर साल मिलने वाली धनराशि और उससे किए जाने वाले कामों का अनुमान लगाया जाता है, जिसे ग्राम पंचायत का बजट अनुमान” कहते हैं।

ग्राम पंचायत का बजट

पंचायतें अपने क्षेत्र में जो काम करती है. उनके बारे में साल में एक बार योजना बनाकर उनका बजट तय किया जाता है और उसके अनुसार सालभर काम किया जाता है। जो पंचायत इस काम को सावधानी से अच्छी तरह सोच-विचार कर पूरा कर लेती है. यह सालभर में कई समस्याओं को हल कर सकती है।

इसके लिए पंचायत को दो प्रमुख बातों पर विचार करना होता है. एक उसे अगले साल के लिए कितनी धनराशि प्राप्त होगी और दूसरा उस धनराशि से वह क्या-क्या काम करवा सकती है? इसे एक निश्चित प्ररूप में लिखा जाता है। बस, यही पंचायत का बजट अनुमान है।

पंचायत राज की तीनों इकाइयों (ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत) द्वारा नियमित रूप से वार्षिक बजट बनाया जाता है, जो 1 अप्रैल से लागू होता है तथा 31 मार्च तक चलता है।

क्यों जरूरी है पंचायत का बजट ?

पंचायत राज की तीनों इकाइयों ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत के लिए बजट बनाना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इससे :

  1. पंचायत को अपनी आर्थिक स्थिति पता चल जाती है।
  2. पिछले वर्ष में प्राप्त आय एवं किए गए व्यय की वास्तविक स्थिति की जानकारी होती है।
  3. आगामी वर्ष में होने वाली आय एवं किए जाने वाले व्यय के बारे में पता चल जाता है।
  4. कर लगाने में मदद मिलती है।
  5. पंचायत को कर लगाने की जरूरत की पहचान होती है।
  6. किसी खास एवं जरूरी काम के लिए राशि जुटाने में आसानी हो जाती है।
  7. सामुदायिक विकास की नई योजनाएं बनाने में आसानी होती है।
  8. योजनाओं का निर्माण एवं उसके क्रियान्वयन का मूल्यांकन करना आसान हो जाता है।

पंचायत बजट व वित्तीय व्यवस्था संबंधी संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधान

भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 (आई) एवं 243 (जे) में पंचायत के वित्तीय प्रावधान दिए गए हैं।

  • राज्य द्वारा हर पांच साल के लिए राज्य वित्त आयोग का गठन किया जाएगा, जो राज्य को टैक्स, टोल टैक्स, एवं अन्य प्रकार की फीस से होने वाली आय पंचायतों को आवंटित किए जाने के बारे में अनुशंसा करेगा-अनुच्छेद 243(आई)(ए)(1)।
  • राज्य वित्त आयोग पंचायतों की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए अनुशंसा करेगा – अनुच्छेद 243(3)(ए)(2)।
  • राज्य का यह अधिकार है कि यह पंचायतों के आय-व्यय एवं हिसाब-किताब के ऑडिट के लिए नियम बनाएं अनुच्छेद 243 (जे)।
  • प्रत्येक राज्य में जिला स्तर पर पंचायतों एवं नगरीय निकायों द्वारा तैयार किए गए बजट को समेकित करने और पूरे जिले का बजट व योजना प्रारूप बनाने के लिए जिला योजना समिति का गठन किया जाएगा अनुच्छेद 243 (झेड डी) (1) ।

कानूनी प्रावधान

मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम में बजट संबंधी कानूनी प्रावधान दिए हैं गए है, जिसके अनुसार:

  1. प्रत्येक ग्रामसभा द्वारा हर साल आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अपना बजट बनाना जरूरी है (धारा ज) ग्रामसभा द्वारा बजट बनाने की प्रक्रिया “म.प्र. ग्रामसभा (बजट अनुमान) नियम 2001 में दी गई है।
  2. पंचायत राज व्यवस्था के अंतर्गत तीनों इकाइयों (ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत) द्वारा हर साल आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अपना बजट बनाना जरूरी है और इसी बजट के अनुसार आगामी वर्ष में आय व्यय किया जाएगा धारा 73(1)।
  3. ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत का बजट बनाने की प्रक्रिया के लिए सरकार द्वारा नियम जारी किए गए हैं। ये नियम हैं मध्यप्रदेश ग्राम पंचायत (बजट अनुमान) नियम 1997, मध्यप्रदेश जनपद पंचायत (बजट अनुमान) नियम 1997 एवं मध्यप्रदेश जिला पंचायत (बजट अनुमान), नियम 1997 प्रस्तुत किताब में इन्हीं नियमों के आधार पर बजट बनाने की प्रक्रिया समझाई गई है।

बजट के मुख्य आयाम

किसी भी बजट के दो मुख्य आयाम होते है, एक प्राप्तियां और दूसरा व्यय ।

प्राप्तियां बजट का सबसे महत्वपूर्ण आयाम है । प्राप्तियां का मतलब प्राप्त होने वाली राशि या आय से हैं। पंचायत की सभी तीनों इकाइयों द्वारा अपना बजट बनाते समय यह देखा जाता है कि उनके आय के स्त्रोत क्या हैं और किन स्त्रोतों से आगामी वर्ष में कितनी आय होगी।

व्यय बजट का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण आयाम है । इसका अंतर्गत यह देखा जाता है कि आगामी वर्ष में किन-किन कार्यों पर कितना खर्च होगा। बजट में आमतौर पर उतना ही खर्च या व्यय रखा जाता हैं जितना आय प्राप्त होगी। उसे बजट में कभी उसी कार्य के खर्च में दिखाया जाता है।

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