Gram Panchayat Budget Make

कैसे बनायें ग्राम पंचायत का बजट

पिछले अध्याय में हमने जाना कि पंचायत को कहां-कहां से धनराशि मिलती है? आईए. अब हम बनाते हैं ग्राम पंचायत का बजट ग्राम पंचायत का सालाना बजट बनाने की पहली सीढ़ी है, ग्राम सभा का बजट बनाना। पंचायत राज अधिनियम के अनुसार ग्रामसभा एक संवैधानिक इकाई है और उसके फैसले को अंतिम एवं महत्वपूर्ण माना जाता है। ग्रामसभा का बजट बनाने तथा गांव में विकास कार्यों की जिम्मेदारी लोगों को बांटने के लिए गांव स्तर पर ग्रामसभा की स्थाई समितियां बनाई गई है। इनमें ग्राम विकास समिति को ग्रामसभा के सालाना बजट बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अतः ग्राम विकास समिति द्वारा हर साल आगामी वर्ष के लिए ग्रामसभा का बजट अनुमान तैयार किया जाता है और उसे ग्रामसभा की बैठक में रखा जाता है।

बजट के लिए प्राप्त होने वाली राशि का अनुमान लगाना जरूरी है। अगले वर्ष कितनी राशि प्राप्त होगी, इसका अनुमान पिछले दो वर्षों में प्राप्त राशि का औसत निकालकर लगाया जा सकता है।

प्राप्तियों का अनुमान लगाने के बाद खर्च का अनुमान भी पिछले वर्ष के खर्च को देखकर लगाया जा सकता है। कुछ नियमित खर्च वेतन, बिजली बिल, मरम्मत, कोई नए काम करवाना, योजनाओं का क्रियान्वयन व्यय, आदि अनुमानित खर्च में रखे जाते हैं।

ग्रामसभा का बजट अनुमान

इस तरह बनाए ग्रामसभा का बजट अनुमान

ग्राम विकास समिति के सदस्य बैठक कर गांव की समस्याओं की सूची तथा अगले साल के लिए जरूरी कामों की सूची बनाएं।

• इसके बाद यह देखें कि अगले साल ग्रामसभा को किन-किन सोतों से कितनी राशि प्राप्त होगी। तथा ग्रामकोण में कितनी राशि प्राप्त होगी।

यह देखे कि ग्रामसभा को विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत कितनी राशि प्राप्त होगी और उनसे नियमों के अनुसार कौन-कौन से काम करवाए जा सकते हैं। • अब यह देखें कि गांव की प्रमुख समस्याओं या जरूरतों को किन-किन योजनाओं के तहत हल

किया जा सकता है। • इस तरह प्राप्तियों और व्यय का विवरण निर्धारित प्ररूप में लिखकर ग्राम विकास समिति द्वारा उसे ग्रामसभा में पढ़कर सुनाया जाता है। जहां उस पर चर्चा करके अंतिम फैसला लिया जाता

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• इस तरह ग्रामसभा के अनुमोदन के बाद ग्रामसभा का वार्षिक बजट अनुमान तैयार होता है।

• यह बजट अनुमान ग्राम पंचायत की सामान्य प्रशासन समिति को दिया जाता है।

ग्राम सभा का बजट बनाने के लिए सबसे पहले ग्राम विकास समिति द्वारा यह देखा जाता है कि गांव में आगामी वर्ष में किन-किन कामों की जरूरत पड़ सकती है? लोगों की समस्याएं क्या हैं, और उन्हें हल करने के लिए क्या करना पड़ेगा? साल भर में मिलने वाली राशि से कौन-कौन सी समस्याएं हल की जा सकती हैं, उनमें से कौन सी समस्या सबसे पहले हल करना जरूरी है तथा ग्रामवासियों की शिक्षा.

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रोजगार एवं आजीविका विकास के लिए क्या किया जा सकता है? इन सब सवालों पर विचार करके ग्राम विकास समिति ग्रामसभा का बजट अनुमान तैयार करती है। विकास समिति द्वारा तैयार किए गए बजट अनुमान पर ग्रामसभा में चर्चा होती है। ग्रामसभा के सदस्य

तो सर्वसम्मिति से उसमें कोई काम जोड़ सकते है या हटा सकते हैं। ग्रामसभा द्वारा अनुमोदित होने

के बाद ग्रामसभा का बजट अनुमान अंतिम रूप लेता है और इसके बाद उसे ग्राम पंचायत की सामान्य

प्रशासन समिति को भेजा जाता है।

ग्रामसभा का बजट अनुमान तैयार करते समय इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है ● किस योजना में कितनी राशि प्राप्त होगी, इसका अनुमान लगाने में सावधानी रखना चाहिए यानी वह वास्तव में सही होना चाहिए। उसमें अनुमान से अधिक राशि नहीं रखें।

● किस योजना में कितनी राशि मिलेगी, इसका अनुमान पिछले दो वर्षों में प्राप्त राशि के औसत पर लगाएं। • स्थाई खर्च जैसे भाड़ा, भत्ते, वेतन आदि के मद में मिलने वाली वास्तविक राशि ही लिखें।

आकस्मिक खर्च के लिए अनुमान पिछले दो सालों में हुए आकस्मिक खर्च के आधार पर लिखें। केन्द्र सरकार राज्य सरकार, जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत के लिए जो राशि जिस काम या ●

योजना के लिए दी जाती है, उसे उसी में खर्च किया जाएगा। • यदि ग्रामसभा द्वारा कोई राशि उधार प्राप्त की गई है तो उसके मूलधन और ब्याज को चुकाने की

गुजाईश भी बजट में रखी जानी चाहिए। • यदि बजट वर्ष के आंकड़ों और पिछले वर्ष के आंकड़ों में 10 प्रतिशत से अधिक की घट-बढ़ हो तो उसे स्पष्ट करें।

• अन्नकोष वस्तुकोष, श्रमकोष में मिलने वाली सहायता या नगद सहायता का हिसाब-किताब लिखित में

रखा जाना चाहिए।

• अधूरे निर्माण कार्यों को पूरा करने के लिए बजट में पर्याप्त राशि रखें।

• बजट अनुमान में राशि को सौ के निकटतम गुणांक में लिखे, जैसे 640 को 600 या 660 को 7001 • बजट के मदों में रखी गई राशि पूरी तरह उचित है, इसे स्पष्ट करने के लिए अलग से एक नोट लिखें।

अनुपूरक बजट क्या है?

कई बार ऐसे जरूरी काम आ जाते हैं, जो वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट अनुमान में नहीं होते हैं, किन्तु ग्रामवासियों के जीवन के लिए वे जरूरी होते हैं। उन्हें वार्षिक बजट अनुमान में शामिल करने के लिए जो बजट बनाया जाता है, उसे अनुपूरक बजट कहा जाता है। अनुपूरक बजट ग्राम विकास समिति बनाकर ग्रामसभा में प्रस्तुत करेगी। ग्रामसभा में उस पर चर्चा होगी तथा ग्रामसभा द्वारा उस पर फैसला लिया जाएगा।

पुनर्विनियोग क्या है?

पुनर्विनियोग का मतलब है, एक काम के लिए रखी गई राशि को दूसरे काम के लिए उपयोग करना। आमतौर पर ऐसा करना नियमों के विरुद्ध माना जाता है किन्तु यदि किसी परिस्थिति में इसकी आवश्यकता हो तो उसके लिए संबंधित अधिकारी की अनुमति लेना जरूरी है। मध्यप्रदेश ग्रामसभा (बजट) अनुमान) नियम 2001 के नियम 9 के अनुसार संबंधित अधिकारी की अनुमति के बगैर पुर्नविनियोग नहीं पुनर्विनियोग का प्रस्ताव ग्रामसभा में प्रस्तुत करेगी। ग्रामसभा में यह प्रस्ताव पारित होने के 15 दिनों के अंदर उसकी सूचना ग्राम पंचायत को दी जाएगी।

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बजट शीर्ष क्या है?

बजट में प्राप्तियों और खर्च के विषय को “बजट शीर्ष” कहा जाता है। ग्राम सभा के बजट एवं पंचायतों के बजट के लिए सरकार द्वारा बजट शीर्ष तय किए गए है। किसी भी आय-व्यय को उससे संबंधित बजट शीर्ष में ही लिखा जाता है। “मध्यप्रदेश ग्रामसभा (बजट अनुमान) नियम 2001” के नियम 13 के अनुसार सरकार के अनुमोदन के बिना बजट शीर्ष की सूची में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता। ग्रामसभा के बजट शीर्ष प्ररूप में दिए गए है (देखें परिशिष्ट 3)।

| मध्यप्रदेश ग्रामरमा (बजट अनुमान) नियम 2001 के अनुसार बजट बनाने संबंधी प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं ग्रामसभा की अन्य स्थाई समितियों द्वारा आगामी वर्ष के लिए कार्ययोजना ग्राम विकास समिति को प्रस्तुत की जाएगी। ग्राम विकास समिति उन कार्ययोजनाओं के आधार पर पूरे गांव का बजट अनुमान तैयार कर ग्रामसभा में प्रस्तुत करेगी (नियम 3) ग्रामसभा में बजट अनुमान पर चर्चा की जाएगी। ग्रामसभा द्वारा बजट अनुमान का अनुमोदन करने के बाद उसे मान्य माना जाएगा (नियम 4)।

बजट तैयार करने और ग्रामसभा द्वारा अनुमोदन के लिए समय-सीमा तय की गई है, जो इस प्रकार

• विभिन्न स्थाई समितियों द्वारा कार्ययोजना तैयार कर ग्राम विकास समिति को प्रस्तुत की जाएगी

हर साल 31 दिसम्बर तक।

ग्राम विकास समिति द्वारा बजट अनुमान तैयार किया जाएगा – हर साल 7 जनवरी तक। ग्रामसभा द्वारा बजट अनुमोदन के प्रारूप पर विचार किया जाएगा, उसका परीक्षण किया जाएगा। और उसका अनुमोदन किया जाएगा हर साल जनवरी माह के अंतिम दिन से पहले। (नियम

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बजट मंजूर होने से यह नहीं समझा जाएगा कि उसे व्यय करने का अधिकार मिल गया है (नियम 7)। यदि किसी काम मे आवंटित होने वाली राशि से अधिक राशि रखी गई हो तो यह उल्लेख किया जाना चाहिए कि बाकी राशि किस स्रोत से प्राप्त की जाएगी। यदि उस व्यय के लिए किसी प्रशासनिक अधिकारी की मंजूरी की जरूरत हो तो उस व्यय को करने से पहले उसकी मंजूरी प्राप्त की जाएगी (नियम ) 1

विभिन्न व्यय और आय के लिए प्रस्तावित समस्त प्रावधान अनुमोदित बजट शीर्ष के अनुसार ही रखे जाएंगे (नियम 12)।

सरकार के अनुमोदन के बिना बजट शीर्ष की सूची में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा और वे ही शीर्ष ग्रामसभा द्वारा रखे गए सभी लेखाओं (एकाउंट्स) में उपयोग किए जाएंगे ( नियम 13)।

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ग्रामसभा और ग्राम पंचायत का बजट बनाने की प्रक्रिया

एक अनुमान

विकास

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नाम विकास

समिति 2

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with mg यत की वार्षिक योजना बनाई

विकास

समिति 3

द्वारा तैयार

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ग्राम पंचायत का बजट अनुमान

ग्रामसभा द्वारा पारित बजट अनुमान ग्राम पंचायत की सामान्य प्रशासन समिति को प्रस्तुत किया जाता है। समिति द्वारा उसके आधार पर ग्राम पंचायत का वार्षिक बजट अनुमान तैयार किया जाता है। ग्राम पंचायत का बजट अनुमान तैयार करने की प्रक्रिया “मध्यप्रदेश ग्राम पंचायत (बजट अनुमान) नियम 1997 में दी गई है। इसके अनुसार अधिनियम के अंतर्गत गठित विभिन्न स्थाई समितियां आगामी वर्ष के लिए अपनी कार्ययोजना और बजट सामान्य प्रशासन समिति को प्रस्तुत करेंगी। साथ ही जनपद और जिला पंचायत भी ग्राम पंचायत को सौंपे गए कार्यों के लिए विभिन्न मदों में उपलब्ध कराई जाने वाली संभावित राशि की जानकारी देंगी। इस तरह प्राप्तियों और व्यय की जानकारी के आधार पर ग्राम पंचायत की सामान्य प्रशासन समिति आगामी वित्तीय वर्ष के लिए आय-व्यय का अनुमान तैयार करेगी और उसे अपनी रिपोर्ट सहित ग्राम पंचायत में प्रस्तुत करेगी (देखें परिशिष्ट 4)।

ग्राम पंचायत बजट अनुमान पर विचार करेगी। इस तरह ग्राम पंचायत द्वारा पारित बजट अनुमान जनपद पंचायत को भेजा जाएगा।

बजट तैयार करने की समय सीमा

आवश्यक है। इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम पंचायत के बजट अनुमान के लिए समय सीमा तय की यह स्पष्ट है कि वार्षिक बजट अनुमान हर साल 1 अप्रैल से लागू होता है, अतः इससे पूर्व बजट पास होना गई है, जो इस प्रकार है

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बजट अनुमान तैयार करने की प्रक्रिया

विडिव अधिकारी (यह प्रक्रिया कौन करेगा.)

अंतिम तारीख (जिसके पूर्व तक कार्यवाही पूरी किया जाना है।

आगामी वर्ष की कार्ययोजना

ग्राम पंचायत की विभिन्न स्थाई हर साल 31 जनवरी समितियों द्वारा सामान्य प्रशासन समिति को

पंचायत को आगामी वर्ष के लिए मिलने वाली संभावित

जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत द्वारा ग्राम पंचायत को दी जाएगी।

हर साल 31 जनवरी

धनराशि की जानकारी बजट अनुमान का प्ररूप

ग्राम पंचायत की सामान्य प्रशासन

समिति द्वारा

हर साल 7 फरवरी

तैयार करना।

पर ग्राम पंचायत द्वारा

बजट अनुमान के प्ररूप विचार और अनुमोदन

अनुमोदित बजट अनुमान ग्राम पंचायत द्वारा जनपद पंचायत

ग्राम पंचायत द्वारा

हर साल 21 फरवरी

हर साल फरवरी के अंतिम दिन

को प्रस्तुत किया जाएगा। बजट अनुमान का परीक्षण एवं अनुमोदन |

जनपद पंचायत द्वारा

हर साल 15 मार्च

ग्राम पंचायत के बजट शीर्ष

“मध्यप्रदेश ग्राम पंचायत (बजट अनुमान) नियम 1997 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायत के लिए बजट शीर्ष तय किए गए हैं। ग्राम पंचायत द्वारा इन्हीं बजट शीर्ष के अनुसार ही बजट बनाया जाना चाहिए। राज्य सरकार के अनुमोदन के बिना बजट शीर्ष की सूची में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता।

प्रारूप क्रमांक ग्रा.पं.ब.अ./ एक में प्राप्तियां और व्यय के बजट शीर्ष दिए गए हैं। प्राप्तियों के अंतर्गत विगत वित्तीय वर्ष में अतिशेष राशि, करों से आय, अन्य आय आदि पर केन्द्रित बजट शीर्ष दिए गए हैं. जबकि व्यय के अंतर्गत प्रशासकीय व्यय, कार्यक्रमों में व्यय जैसे ग्रामीण विकास कार्यक्रम, विद्युतीकरण एवं ऊर्जा, खादी ग्रामोद्योग एवं ग्रामीण उद्योग, वन विकास एवं सामाजिक वानिकी योजनाएं, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की योजनाएं, सड़क, नाला, पुलिया का निर्माण, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण योजनाएं, महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम आदि से संबंधित कई बजट शीर्ष तय किए गए हैं।

पुनर्विनियोग

यदि किसी परिस्थिति में ग्राम पंचायत को पुनर्विनियोग करना पड़े तो उसे संबंधित अधिकारी से अनुमाति लेना आवश्यक है। साथ ही उसे ग्राम पंचायत की बैठक में अनुमोदित करवाना भी जरूरी है। ग्राम पंचायत द्वारा पुनर्विनियोग का प्रस्ताव पास करने के 15 दिनों के भीतर जनपद पंचायत को उसकी सूचना देना जरूरी है।

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पंचायत का अनुपूरक बजट ग्राम

यदि अनुपूरक बजट की आवश्यकता हो तो उसे ग्रामपंचायत की सामान्य प्रशासन समिति तैयार करेगी और उसे ग्राम पंचायत की बैठक में रखेगी। ग्राम पंचायत के अनुमोदन के बाद अनुपूरक बजट लागू किया जाएगा। ग्राम पंचायत सचिव द्वारा अनुपूरक बजट की जरूरत को साबित करने लिए रिपोर्ट लिखी जाएगी। यह रिपोर्ट जनपद पंचायत को मंजूरी के लिए भेजी जाएगी। जनपद पंचायत अनुपूरक बजट का परीक्षण करेगी और अपनी मजूरी की सूचना ग्राम पंचायत को प्रस्ताव प्राप्ति के 15 दिनों के अंदर भेजेगी।

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पंचायतराज संस्थान, अधारताल, जबलपुर (म.प्र.)

ऑडिट

बजट बनाने से शुरू होने वाली पंचायत की वार्षिक वित्तीय प्रक्रिया ऑडिट में आकर खत्म होती है। बजट के बाद जो राशि प्राप्त होती है और जिस राशि को खर्च किया जाता है, उसके हिसाब किताब की जांच को ऑडिट कहते है। ऑडिट में यह देखा जाता है कि नियमानुसार खर्च किया गया है या नहीं? खर्च करने का फैसला किसने लिया? जिस काम या मद की राशि भी उसे काम या मद में गर्व किया गया है या नहीं? यदि खर्च करने में नियमों का उल्लंघन हुआ हो तो बाहऑजिट से का लगाया जा सकता है।

● ग्रामसभा के आय-व्यय के आदि के प्रावधान मध्यप्रदेश ग्राम स्वराज एवं पंचायत राज अधिनियम की धारा 7(ट) में लिए गए हैं, यह इस अधिनियम की धारा 129 में पंचायत इकाइयों के ऑडिट साबंधी प्रावधान है। धारा 1292) के अनुसार पंचायतों के आय-व्यय के ऑडिट के लिए राज्य सरकार ऑडिटर नियुक्त करती है। मध्यप्रदेश पंचायत संपरीक्षा नियम 1997 के जरिये प्रदेश सरकार द्वारा आडिट के नियम-कायदे तय किए गए हैं। इसके अनुसार आदि सबंधी प्रमुख प्रावधान इस प्रकार है

● सभी पंचायत इकाइयों (ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत) की आय – व्यय का ऑडिट हर साल करवाया जाएगा। व्यह ऑडिट अगला वित्तीय वर्ष पूर्ण होने से पहले करवाया जाएगा। ● जनश्व पंचायत एवं जिला पंचायत के ऑडिट करवाने का आदेश कमिश्नर तथा ग्राम पंचायत के ऑडिट करवाने

का आदेश जिला कलेक्टर द्वारा जारी किया जाएगा। ऑडिट के लिए सरकार द्वारा ऑडिटर नियुक्त किए जाते हैं। किसी विशेष परिस्थिति में संबंधित अधिकारी, किसी पंचायत इकाई के ऑडिट करवाने का आदेश किसी भी समय जारी कर सकते हैं।

आनिट के समय ग्राम पंचायत के सरपंच व सचिव एवं जनपद व जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का यह कर्तव्य है कि वे आय-व्यय संबंधी सभी दस्तावेज ऑडिटर के सामने प्रस्तुत करें।

ऑडिटर को यह अधिकार है कि वे पंचायत इकाई के सभी दस्तावेजों की छानबीन कर सकते है. पंचायत कार्यालयः में कहीं भी पहुंच कर दस्तावेजों एवं संबंधित वस्तुओं को देख सकते हैं।

ऑडिटर पंचायत कार्यालय से किसी भी दस्तावेज (केशबुक, वाउचर, बिल आदि) कार्यालय से नहीं हटा सकते।

ऑडिटर 4 सप्ताह पहले संबंधित पंचायत इकाई (ग्राम पंचायत के सचिव एवं जनपद व जिला कार्यपालन अधिकारी को) ऑडिट करने की लिखित सूचना देंगे।

ऑडिट करने के बाद ऑडिटर अपनी रिपोर्ट संबंधी पंचायत इकाई को देंगे।

पंचायत के मुख्य

ग्राम पंचायत द्वारा ऑडिट रिपोर्ट ग्रामसभा में प्रस्तुत की जाएगी और ग्रामसभा द्वारा ऑडिट रिपोर्ट का अनुमोदन किया जाए।

हिसाब-किताब में गड़बड़ी पाए जाने पर ऑडिटर किसी पंचायत प्रतिनिधि या अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही करने बनली करने या उन्हें हटाने की सिफारिश कर सकते हैं।

इस तरह प्रस्तुत मैन्युअल में ग्रामसभा एवं ग्राम पंचायत का बजट बनाने की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। गौरतलब है कि पंचायत राज व्यवस्था के जरिये गांव की सत्ता और विकास के अधिकार ग्रामवासियों को सौंप दिए गए हैं किन्तु स्वशासन की कोई भी व्यवस्था संसाधनों के बगैर संचालित होना संभव नहीं है। अतः संसाधनों की प्राप्तियों और विकास कार्यों के क्रियान्वयन के लिए यह जरूरी है कि ग्रामसभा और सभी पंचायत इकाइयां अपना बेहतर बजट बनाएं और उस बजट के अनुसार संसाधन हासिल करने का प्रयास करें।

यदि हम ग्राम पंचायत के संदर्भ में देखें तो वर्तमान में ज्यादातर ग्राम पंचायतें सरकार द्वारा दी जाने बाली राशि पर ही निर्भर हैं। सरकार भी उन्हें विभिन्न प्रावधानों और योजनाओं के अनुसार राशि उपलब्ध करवाती है। ग्राम पंचायत को स्वयं की आय भी बढ़ानी होगी। पंचायत अपनी आय को किसी भी विकास कार्य में खर्च करने का फैसला ले सकती है। ग्रामवासियों से टैक्स के रूप में राशि प्राप्त करने के लिए यह जरूरी है। कि उन्हें बजट बनाने की प्रक्रिया में शामिल किया जाए और उनके सामने बजट तथा आय-व्यय का हिसाब रखा जाए। क्योंकि बजट के जरिये ही हमें यह पता चल सकता है कि वर्ष में कहां-कहां से कितनी राशि प्राप्त होगी। यदि हमारी आवश्कताएं अधिक हैं तो हम प्राप्तियों को बढ़ाने के उपाय दूढ सकते हैं। अतः बेहतर स्वशासन के लिए जरूरी है कि ग्रामसभा और ग्राम पंचायत पूरी पारदर्शिता के साथ बजट तैयार करें ।

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