ग्राम पंचायत की स्थिति विश्लेषण

ग्राम के विकास के लिए वहाँ की स्थिती को जानना सबसे आवश्यक कार्य है जिससे यह पता लगाया जा सके कि वर्तमान स्थिती से पहले वहा की क्या स्थितियां थी जैसे गांव कितने वर्षों से बसा है वहा किस समुदाय के लोग रहते है वहां का भौगोलिक परिवेश, सामाजिक परिवेश शिक्षा का स्तर, सुविधाएं आवागमन, चिकित्सा आदि किस प्रकार से है।

जनता के जीविकोपार्जन के साधन कौन-कौन से है इसमें कृषि, व्यवसाय, नौकरीपेशा, प्राथमिक या द्वितीयक कार्यों से जुड़ी हुई स्थितियां हो सकती है। गांव की बसाहट किसी बड़े स्थान / शहर के मार्ग से है, या दूरी अधिक है। गांव में बाजार की स्थिति एवं अन्य सुविधाओं का आंकलन कराना प्रमुख कार्य है जिसके आधार पर हम उस गांव के विकास के लिए रणनीति तैयार कर ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार कर सकेंगे।

वर्तमान में ग्रामीण परिवेश की स्थिति को जानकर यह प्रतीत होता है कि गांवों से शहरों की और पलायन तेजी से हो रहा है गांवों में कृषि या आय के स्त्रोत बहुत अच्छे नहीं है वहां विकास के लिए पर्याप्त अवसरों क अभाव है शिक्षा, बिजली, पानी, स्वास्थ जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं शासन प्रदान नहीं कर पा रहा है।

इसलिये आवश्यक है कि गांव की स्थिति का आंकलन करते हुए वहां विकास हेतु नई ग्राम पंचायत विकास योजन तैयार की जाना आवश्यक है। इस कार्य के लिए ग्राम की उपलब्ध संसाधनों के आधार पर गांव वालों की आवश्यकताओं को चिन्हित करना मूल कार्य होगा साथ ही इसी आधार पर गांव के विकास के लिए स्थिति का विश्लेषण करना होगा।

इस प्रकार स्थिति विश्लेषण कर हम आगे ग्राम विकास या गांवों में बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने हेतु मूलभूत संसाधन उपलब्ध करा सकते हैं।

ग्राम पंचायत की योजना बनाने से पूर्व आवश्यक है कि स्थिति विश्लेषण किया जाय जिसके आधार पर ग्राम पंचायत विकास योजना हेतु कार्यों का निर्धारण किया जाये। स्थिति विश्लेषण के लिए ग्राम पंचायत स्तर के सहयोगी आंकड़े के साथ-साथ प्रारम्भिक आंकड़ों को विभिन्न माध्यमों से जैसे पी. आर.ए. टूल्स, सर्वे इत्यादि से आंकड़े इक्ट्ठा कर स्थिति विश्लेषण किया जाना होगा।

स्थिति विश्लेषण की रिपोर्ट ग्राम पंचायत के समक्ष सलाह के लिए रखी जायेगी साथ ही साथ यह रिपोर्ट स्वयं सहायता समूहों, विशेषज्ञों से भी सलाह हेतु उपलब्ध करायी जा सकती है इसके उपरान्त स्थिति विश्लेषण रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जायेगा। स्थिति विश्लेषण को तैयार करने के लिए निम्नलिखित आंकड़ों का उपयोग किया जा सकता है:

स्थिति विश्लेषण के उद्देश्य

  • ग्राम पंचायत के विकास के विभिन्न मुद्दों पर जानकारी एकत्र करना।
  • ग्राम पंचायत में उपलब्ध मूलभूत सुविधाएं, आधारभूत संरचना के गुणवत्ता आदि का आंकलन करना। स्थिति विश्लेषण के दौरान निम्नांकित बातें ध्यान में रखी जानी चाहिए
  • स्वास्थ्य, शिक्षा, गरीबी आदि को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायत की वर्तमान स्थिति एवं उपरोक्त समूहों का चिन्हांकन
  • ग्राम पंचायत की वर्तमान स्थिति एवं वहां की जीवन शैली से जुड़ी जानकारी एकत्रित करना। ग्राम पंचायत में मूलभूत सुविधाओं और आधारभूत ढांचे में क्या-क्या कमियां है इसकी जानकारी एकत्रित करना। (जैसे- पीने योग्य पानी, स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सड़कों की स्थिति, साफ-सफाई आदि)।

स्थिति विश्लेषण के उदाहरण:

अधोसंरचना निर्माण की स्थिति में:

  • अधोसंरचना निर्माण में (सड़क निर्माण) में आने वाली परेशानियों का चिन्हांकन ।
  • सड़कहीन बसाहटों का चिन्हांकन करना ।
  • बनाई जाने योग्य सड़क की लंबाई का निर्धारण करना।
  • यह पता लगाना कहां किस सड़क में मरम्मत, भराव अथवा नयी सड़क की आवश्यकता है।

सामाजिक विकास की स्थिति में :

किसी विशेष स्थिति में स्थानीय लोगों की मनोस्थिति जानकर बिन्दुवार जानकारी एकत्रित करना जैसे आदिवासी क्षेत्र में उनकी जमीन से संबंधित परेशानियां, कौशल, रोजगार की संभावनाएं आदि की बातों के बारे विस्तृत चर्चा करना

आर्थिक विकास की स्थिति में:

ऐसे विषय के बारे में चर्चा करना जो आसानी से दूरगामी परिणाम देने में सक्षम हो जैसे कृषि उत्पादन

कैसे बढ़ाया जाए और बाजार से जोड़ा जा सके।

मानव विकास की स्थिति में:

मानव विकास संबंधित कमियों को पता लगाकर उन्हें दूर किया जा सके जैसे सीखने का निम्नतर स्तर, विद्यालय छोड़ने और कुपोषण का पता लगाना।

स्थिति विश्लेषण के चरण:

“सकारात्मक साझा कार्रवाई के प्रति समुदाय को एकजुट एवं प्रेरित करने के लिए प्रारंभिक कार्यकलाप ।”

बेसलाइन सर्वे –

इस प्रक्रिया में विकास योजना के लिए चिन्हित समस्त घटकों एवं पहलुओं की वर्तमान स्थिति का सर्वे किया जाकर जानकारी संकलित की जावेगी। इस जानकारी का उपयोग आवश्यकताओं को चिन्हित कर पूर्ति हेतु आवश्यक उपाय करने में किया जा सकेगा। बेसलाइन सर्वे के लिए निर्धारित प्रपत्र पृथक से जारी किया जावेगा। बेसलाइन सर्वे की समस्त जानकारी पंचायत दर्पण पोर्टल पर भी दर्ज की जानी होगी।

द्वितीय/सहयोगी आंकड़े (Secondary Data)

सहयोगी आंकड़े वे आंकड़े होते हैं जो ग्राम पंचायत में पहले से रिपोर्ट के रूप में या वहां दर्ज संबंधित पंजी में उपलब्ध होते हैं।

उन विषयों का पता लगाना जिसके लिये आंकड़ों की आवश्यकता है (राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायत विकास योजना हेतु केन्द्रित विषयों का चिन्हांकन) ।

जिले व राज्य स्तरीय अधिकारियों से प्राप्त आंकड़े जो पंचायत हेतु बनाये गये हों जैसे जनगणना. सामाजिक, आर्थिक, जातिगत जनगणना, जल एवं स्वच्छता संबंधी आदि ।

. ग्रामीण आर्थिक और सांख्यिकीय बुलेटिन

अन्य शासकीय सर्वे रिपोर्ट ।

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