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ग्राम विकास योजना

73वें संविधान संशोधन अधिनियम के प्रभावी होने के बाद ग्रामपंचायत द्वारा अपनी इस भूमिका का नि प्रभावी ढंग से किया गया है, किंतु ग्राम पंचायतों द्वारा अपनी तात्कालिक आवश्यकता के अनुसार कार्य लिये जाते रहे हैं. किसी एक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संसाधनों का आंकलन कर वार्षिक कार्य योजना तैयार नहीं की जाती है।

फलस्वरूप जहां एक और संसाधनों का प्रभावी उपयोग नहीं हो पाया है। वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत के समग्र विकास को भी लक्षित नहीं किया जा सका है। प्रदेश की त्रिस्तरीय व्ययवस्था में संसाधनों और प्राथमिकताओं के व्यवहारिक सामजस्य के लिए ग्राम पंचायत की मूल इकाई है इसलिए इस प्रक्रिया को ग्राम पंचायत विकास योजना के नाम से संबोधित किया गया है।

ग्राम पंचायत की योजना कैसे बनायें- यदि हमें अपनी ग्राम पंचायत की योजना बनानी हो तो इसके पहले हमारे लिए यह जान लेना जरूरी है कि “योजना बनाना” या “नियोजन” आखिर है क्या ? और इसे बनाने के क्या फायदे है। इस प्रकिया को समझना आवश्यक है। (खाद्य)

टेक्टर)

बीज वाली

बतौर उदाहरण लेते हैं कि हमारे गाँव का किसान राम प्रसाद अपने खेत में कुंवार- कार्तिक माह में गेहूँ की फसल लेना चाह रहा है, उसकी पूर्व में योजना बनाकर तैयारी शुरू करेगा। जिसके लिये सबसे पहले उसने तय किया कि कितने एकड़ में उसे गेहूँ की फसल लेना है।

उसके बाद यह तय करेगा कि बीज और खाद कितनी मात्रा में लगेगा और उसका प्रबंध कहीं से होगा। जुलाई के लिये ट्रैक्टर का प्रबंध कहाँ से होगा? सिंचाई के लिये पानी कहाँ से आयेगा? फिर यह आंकलन करेगा इन सारे कामों के लिए कितना खर्च लगेगा और उसका बंदोबस्त कहाँ से होगा। यह सारी बात तय हो जाने के बाद खेती का काम शुरू करेगा।


इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि खेत में बोनी करने से पहले की योजना क्या है इसी प्रकार बाजार जाने के पहले उसकी योजना, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए योजना, अपने घर को चलाने के लिए योजना, आमतौर पर हम किसी न किसी रूप में योजना बनाकर ही काम करते हैं. और यही है हमारी योजना बनाने की प्रक्रिया या नियोजन इसी उदाहरण से हम यह भी आसानी से जाने सकते हैं कि योजना बनाना हमारी दिनचर्या में किये जाने वाले कामों का एक जरूरी हिस्सा है और यह हुनर हम सभी के अंदर मौजूद है।

अराए शाम से ध्यान में रख उनको समुदित

किसी भी कार्य को करने से पहले उसका उद्देश्य तय होता है। जैसा कि ऊपर दिये गये उदाहरण में राम प्रसाद का उद्देश्य है गेहूँ की खेती इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए वह विभिन्न कामों को एक के बाद एक जोड़ता जाता है। जिससे उसकी योजना की सम्पूर्ण रूप-रेख बनती चली जाती है। अतः सामान्य तौर पर किसी भी योजना को बनाते समय आगे लिखे सवालों के मदद ले सकते हैं।

जैसे पूरा है उनको पूरा करने के लिए क्या करना होगा ? हम काकर करता है ? कितना समय और SHRIC Id का है? कौन क्या कर

किसी कार्य को करने से पहले इन सात सवालों के जवाब ढूंढ लिये तो समझिये कि आपने अपने कार्य की योजना बना ली।

सरक्षण

सबसे पहला सवाल है–क्या करना है ? हमारा उद्देश्य क्या है ? और उस तक पहुँचने के लिए हमें क्या-क्या करना होगा? हमें किन-किन संसाधनों की जरूरत होगी? जैसे- किसी गांव में तय किया गया कि गांव में जल संरक्षण पानी को रोकने और बचाने का काम करना है। यह एक उद्देश्य हुआ. इसके

महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज संस्थान अधारताल, जबलपुर (म.प्र.)

लिए हम जानते है कि गांव में तलाब, पोखर, नदी, नहर, शील, कुएं इत्यादि का निर्माण करना होगा फिर इनको पुनर्जीवित करना होगा।

मल जाता भी जला दिया

तीसरा और चौथा सवाल है इसे कब और कहाँ करना है? योजना बनाने के इस चरण में हमें यह तय करना होगा कि हमने जो उद्देश्य तय किये हैं उनकी पूर्ति के लिए जिन गतिविधियों और कार्यो का चिन्हांकन किया गया है, उनके लिए उचित स्थान और समय सीमा तय कर ली गई है।

इसमें यह देखना जरूरी है कि निमार्ण के लिए जिस स्थान का चुनाव किया गया है वह पानी के भराव के लिए सही हो । इसके साथ यह भी देखना जरूरी है कि उस काम को करने के लिए कौन-कौन से संसाधन कहां-कहां से जुटायें जायेंगे? जैसे— तालाब के निर्माण के लिए तकनीकी सहायता दल, मजदूर, तालाब खोदने के लिए उपकरण एवं औजार और पूँजी इत्यादि कहां से आयेगी।

इस कार्य के हितग्राही (स्टेक होल्डर) कौन-कौन होंगे जैसे— तालाब के बनने से गांव के किसानों को सिंचाई के लिए, पीने के लिए जानवरों के लिए पानी मिल सकेगा या नहीं कहीं ऐसा तो नहीं कि जिस काम को करने की हम बात कर रहे हैं उसमें कुछ खास लोगों का ही हित छुपा हो।

फिर आता है यह काम करें कैसे? किसी भी योजना को बनाने में यह एक बहुत ही जरूरी हिस्सा है। जिसमें उस काम के करने का तौर-तरीके और तकनीकी जानकारी की बात करेंगे, ताकि हम अपने काम को बिना किसी रूकावट के आसानी से पूरा कर सकें। यह सवाल हमें हमारे उद्देश्य पूर्ण लक्ष्य तक पहुँचने में मदद करता है।

इसमें संभावित रूकावट वा जोखिम की आशंका दूर करने का उपाय भी सोचते और करते हैं? काम को कैसे सरल विधि से करने और समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने जैसे उपाय भी इसमें करते हैं। भागीदारी से अपनत्व बढ़ता है और काम की सतत निगरानी का मौका देता है।

लिपसादाचार यात हम कर ली यात लिए नी लीली पण अनेकद जस्ती है। कुशल निन्त्री माशा उपासना के आशाले आम मीनल से इस्तेमाल करते आमा बहिण मोहिम चलाए जा रहे हैं इतने

“ग्राम पंचायत की, ग्राम पंचायत के लिये, ग्राम पंचायत द्वारा “

अंतिम सवाल है, कितने संसाधनों की आवश्यकता है? संसाधनों की मात्रा का आंकलन किये बिना हमारी योजना अधूरी होगी इसलिए हमें योजना बनाते समय संसाधनों का विशेष ध्यान रखना चाहिए,

जैसे— तालाब बनाने में हमें कितनी जगह लगेगी, कितने मजदूर, कितने औजार लगेंगे और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि इस निमार्ण कार्य को पूर्ण करने में हमें कितनी राशि की जरूरत होगी, इन सारी बातों का बारीकी से आंकलन कर लेना चाहिए।

इस प्रकार हमने देखा कि योजना बनाते समय सबसे पहले उसका उद्देश्य या लक्ष्य तय

होता है, फिर उन लक्ष्यों या उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किये जाने वाले काम, उन कामों को करने वाले

लोग व संसाधन, स्थान, समय-सीमा, संभावित खर्च अपेक्षित परिणाम आदि बातों का ध्यान रखना अनिवार्य


होता है। अपने तक सुनियोजित ढंग से बिना किसी रुकावट और कम से कम जोखिम की संभावना के साथ पहुंचने का यह कारगर तरीका है।

उपरोक्त से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि.

ग्राम पंचायत विकास योजना का उद्देश्य मात्र अधोसंरचना विकास नही, गांव की जनता के मन में आपसी सामंजस्य, साझेदारी और कतिपय नैतिक भावनाएं उत्पन्न करना है।

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