मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना

मध्यप्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2006 में निराश्रित / निर्धन परिवार की कन्या / विधवा / परित्यक्ता के सामूहिक विवाह हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से योजना आरंभ की गई। जो वर्तमान में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के नाम से संपूर्ण प्रदेश में संचालित है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उद्देश्य

इस योजना का उदेश्य प्रदेश में निवासरत जरूरतमंद कन्याओं / विधवाओं (कल्याणी)/ परित्यक्ता बहनो को उनके विवाह के समय आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। सहायता राशि

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत सामूहिक विवाह कार्यक्रम में सम्मिलित होकर विवाह करने वाली प्रत्येक पात्र कन्याओं/विधवाओं (कल्याणी)/परित्यक्ता (जिसे आगे वधु कहा गया है) को राशि रु 55000 प्रति कन्या के मान से स्वीकृत किए जाएंगे जिसमें से रु. 11000 की राशि वधु को अकाउंट पेड़ चेक (A/C Payee Cheque) एवं रु. 38000 की सामग्री वधु को उपहार के रूप में आयोजन कर्ता निकाय द्वारा प्रदान की जाएगी। रु. 6000 सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजन करने हेतु आयोजन कर्ता निकाय को देय होगी।

पात्रता के मापदंड

  1. वधु / वधु के अभिभावक मध्यप्रदेश के मूल निवासी हो।
  2. द्वारा विवाह के लिए निर्धारित आयु पूर्ण कर ली गई हो।
  3. वर्तमान में कन्या के लिए विवाह करने हेतु न्यूनतम वैधानिक आयु 18 वर्ष तथा पुरुष की न्यूनतम वैधानिक आयु 21 वर्ष निर्धारित है।
  4. परित्यक्ता महिला जिसका कानूनी रूप से तलाक हो गया हो।
  5. योजना अंतर्गत सहायता प्राप्त करने के लिए हितग्राही हेतु आय का कोई बंधन नहीं रहेगा किंतु यह आवश्यक होगा कि हितग्राही अपना विवाह निर्धारित तिथियों पर आयोजित होने वाले सामूहिक कन्या विवाह कार्यक्रम में सम्मिलित होकर ही संपन्न कराए एकल विवाह की स्थिति में योजना का लाभ प्राप्त नहीं होगा।

अन्य मापदंड

  1. श्रम विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिक हेतु विवाह सहायता योजना को सामाजिक न्याय विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में समाहित किया गया है
  2. पंजीकृत श्रमिक हितग्राहियों को भी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत आयोजित सामूहिक विवाह में भाग लेना होगा एवं पात्रता की शर्तों को पूरा करना होगा।
  3. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना मध्यप्रदेश के वधु के लिए है, यदि वर प्रदेश के बाहर का भी है तो उस वधु को योजना का लाभ प्राप्त करने का अधिकार होगा।
  4. लेकिन जब वधु / वधु के अभिभावक प्रदेश के मूल निवासी नहीं हो, तो योजना अंतर्गत लाभ प्राप्त नहीं होगा।
  5. सामूहिक विवाह कार्यक्रम तभी आयोजित किए जाएंगे जब न्यूनतम 5 जोड़ों से आवेदन प्राप्त हो।
  6. जिला एवं निकाय स्तरीय मुख्यमंत्री कन्या विवाह आयोजन समिति सामूहिक कन्या विवाह कार्यक्रम का सुचारू रूप से आयोजन सुनिश्चित किए जाने हेतु जिला स्तरीय एवं निकाय स्तरीय समितियों का गठन जिला कलेक्टर द्वारा जिले के प्रभारी मंत्री के अनुमोदन प्राप्त कर किया जाएगा
  7. उक्त समितियों में प्रभारी मंत्री द्वारा प्रत्येक समिति हेतु क्षेत्रीय विधायकों एवं पांच स्थानीय प्रतिष्ठित नागरिकों को नामांकित किया जाएगा।
  8. इनके अलावा इन समितियों में जिला एवं निकाय स्तरीय शासकीय अधिकारियों को भी शामिल किया जायेगा एवं इन सभी स्तर की समितियों में कम से कम 2 महिलाओं (शासकीय या अशासकीय), को सम्मिलित करना अनिवार्य होगा।
  9. कार्यक्रम में आयोजन हेतु अधिकृत संस्था योजना अंतर्गत सामूहिक विवाह कार्यक्रम के आयोजन हेतु ग्रामीण क्षेत्र में अधिकृत संस्था जनपद पंचायत होगी।
  10. अन्य किसी संस्था द्वारा कराए जा रहे सामूहिक विवाह इस योजना अंतर्गत लाभ पाने हेतु पात्र नहीं होंगे।
  11. तिथियों का निर्धारण सामूहिक विवाह की तिथियां एवं संख्या का निर्धारण जिले के प्रभारी मंत्री द्वारा किया जाएगा।
  12. इन तिथियों में सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे।

विवाह हेतु हितग्राहियों द्वारा आवेदन की प्रक्रिया

  1. सामूहिक विवाह में सम्मिलित होने वाली वधु एवं वर को संयुक्त रूप से निर्धारित प्रपत्र में आवेदन संबंधित निकाय (नगर निगम या नगर पालिका या नगर परिषद या जनपद पंचायत) को सामूहिक विवाह कार्यक्रम की निर्धारित दिनांक से 15 दिन पूर्व करना होगा। आवेदन पत्र निशुल्क जनपद पंचायत / नगरीय निकाय में उपलब्ध होंगे। आवेदन पत्र विभाग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।
  1. बघु द्वारा निम्नानुसार स्वप्रमाणित घोषणा पत्र आवेदन पत्र के भाग 2 में देना होगा कन्या हेतु कि कन्या का इससे पहले कभी विवाह नहीं हुआ,
  2. विधवा हेतु कि उनका पूर्व विवाह हुआ किंतु उनके पति की मृत्यु हो गई है।
  3. परित्यक्ता हेतु कि उनका पूर्व में विवाह हुआ किंतु उनका पति से कानूनी तलाक हो चुका है।
  4. वर द्वारा स्वप्रमाणित घोषणा पत्र (आवेदन का भाग 4) । आवेदन पत्र के साथ प्रस्तुत किए जाने वाले पात्रता संबंधी दस्तावेज
  5. वधु / वधु के अभिभावक का मध्यप्रदेश के मूल निवासी होने का प्रमाण पत्र।
  6. बघु व उसके वर की 9 अंकों की समग्र आईडी वर मध्यप्रदेश का निवासी नहीं होने की स्थिति में समग्र आईडी अनिवार्य नहीं होगी।
  7. वधु व वर के आधार कार्ड की छायाप्रति ।
  8. वधु व उसके वर के पासपोर्ट साइज के दो-दो फोटोग्राफ
  9. वधु व वर का मोबाईल नम्बर (यदि हो तो)।
  10. अभिभावक मोबाईल नम्बर (यदि हो तो) ।
  11. कल्याणी (विधवा) होने की स्थिति में पूर्व पति का मृत्यु प्रमाण पत्र ।
  12. परित्यक्ता महिला होने की स्थिति में कानूनी रूप से तलाक होने का न्यायालयीन आदेश।
  13. यदि हितग्राही मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मण्डल के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिक है तो श्रमिक पंजीयन कार्ड की छायाप्रति ।
  14. वधु व वर का आयु प्रमाण पत्र। आयु की पुष्टि हेतु वधु और वर द्वारा निम्नांकित दस्तावेज में से कोई एक दस्तावेज प्रस्तुत किया जाये
  • स्कूल का प्रमाण पत्र (टीसी) अथवा
  • अंकसूची जिसमें जन्म तिथि अंकित हो अथवा
  • सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया जन्म प्रमाण पत्र अथवा
  • मतदाता सूची / मतदान परिचय पत्र जिसमें आयु या जन्म तिथि अंकित हो अथवा
  • शासकीय चिकित्सा विशेषज्ञ द्वारा आयु हेतु जारी प्रमाण पत्र अथवा
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम का जॉबकार्ड अथवा
  • अन्य दस्तावेज जो आयु सिद्ध करने हेतु कानूनी रूप से स्वीकार्य हो।

विवाह हेतु हितग्राहियों की पात्रता की जांच एवं चयन प्रक्रिया हितग्राहियों की पात्रता की जांच हेतु ग्रामीण क्षेत्र में जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा एवं नगरीय क्षेत्र में आयुक्त नगर निगम अथवा निकाय के मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा जांच समिति का गठन किया जाएगा।

जो कि पात्रता के मापदंड को ध्यान में रखते हुए हितग्राहियों की आवेदन पत्रों की जांच कर सामूहिक विवाह कार्यक्रम में सम्मिलित होने हेतु चयन करेगी। जांच पश्चात् पाए गए सभी आवेदनों की पात्रता (पात्र एवं अपात्र दोनों) के विवरण को विवाह पोर्टल में दर्ज किया जायेगा। पात्र जोड़ों की स्वीकृति आदेश एवं अपात्र पाए गए जोड़ों की अस्वीकृति आदेश पोर्टल से जनरेट किए जाएंगे।

Scroll to Top