जेण्डर संवेदनशीलता (Gender Equlity)

जेण्डर संवेदनशीलता

भारत के संविधान में सभी नागरिकों को समानता का हक 72 वर्श पूर्व ही दिया जा चुका था परन्तु हम आज भी देश में अभी जाति, वर्ग, लिंग पर आधरित असमानताऐ कायम है इनमें सबसे गहरी असमानता जो पुरे समाज के ताने-बाने में समाई हुई है लिंग पर आधारित है।

क्या हमारे समाज में महिलाओं और बालिकाओं को विकास के उतने ही अवसर मिलते है, जितने बालकों और पुरुष को ? क्या एक परिवार के दायरे में भी लड़के और लड़की की परवरिश और विकास में बराबर का ध्यान दिया जाता है?

पंचायतीराज संसथाओं में जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को इस लिंग -आधारित भेदभाव को हटाकर एक स्वस्थ्य व समतावादी समाज बनाने की पहल जनता की मानसिकता में बदलाव लाकर करनी होगी ।

मध्यप्रदेश के आंकड़े स्त्री पुरूश असमानता के संबंध में देखे जाये तो तस्वीर कुछ ऐसी बनती है आबादी में स्त्री पुरूश अनुपात बराबर होना चाहिये, परन्तु प्रदेश में पिछली जनगणना

के अनुसार प्रतिहजार पर केवल 931 महिलाये ही है, यह लिंग अनुपात हर दशक की

जनगणना के साथ गिरता चला जा रहा है।

ऐसा क्यो ? ऐसा कैसा विकास हम कर रहे है कि प्रदेश खुशहाली और तरक्का की ओर बढ़ रहा है फिर भी महिलाएँ और अधिक संक्ष्या में मौत के मुहं में समाने लगी है? मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में तो लिंग अनुपात प्रति हजार पुरूश तक ही सिमेट कर रह गया है, देंखे –

भिण्ड – 837. मुरैना- 829 ग्वालियर -840 दतिया -873, शिवपुरी -877 रीवा-885 जनप्रतिनिधियों को अपने अपने क्षेत्रों के लिंग अनुपात की स्थिति को देखकर उसके पीछे जिम्मेदार सामाजिक सांस्कृतिक कारणों व सोच को समझना होगा । समझ-बूझ कर यह रणनीति बनानी होगी कि बेटा बेटी एक समान यह हर घर परिवार में कैसे बनाई जावे ?

जेण्डर संवेदनशीलता

लिंग संवेदनशीलता सामाजिक एवं व्यावहारिक गतिविधियों के परिमार्जन की एक व्यापक प्रक्रिया है जो एक ओर लैंगिक असमानता एवं असुरक्षा को दूर करती है तो दूसरी ओर समाज एवं प्रत्येक स्त्री-पुरुष के चहुंमुखी विकास का मार्ग प्रशस्त करती है

महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज संस्थान, अधारताल, जबलपुर (म.प्र.)

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जिसको वर्तमान समाज में अनिवार्य आवश्यकता है। उपरोक्त विद्वानों के विचार इस तथ्य को स्पष्ट करते हैं कि लिंग संवेदनशीलता वर्तमान समय में परमावश्यक है। समाज में अनेक प्रकार की विसंगतियों एवं आपराधिक घटनाएँ लिंग संवेदनशीलता के अभाव में ही

होती है जबकि लिंग संवेदनशीलता स्त्री एवं पुरुष के व्यवहार को आदर्श रूप प्रदान करती है।

  1. संवेदनशलता क्यो?

• यह हृदय से संबंधित है

• यह आत्मा की आवाज को स्वीकार करती है। • यह शुभ कार्य करने को प्रेरित करती है

• यह कमजोर के घाव को भरती है

• यह स्वंय को पवित्र करती है।

• यह बेदना को सहलाती है।

  1. संवेदनशीलता किसके लिए ?

• जे व्यवस्था द्वारा सदियों से उत्पीड़ित व शोशित है।

• जिन्हे व्यवस्था ने यथावत वंचित बनाकर रखा है।

• जो हमारे लिये चुपचाप अनेको बलिदान करते रहे है।

• जो उपेक्षित वर्ग में है – महिलाऐं बच्चे गरीब

  1. संवेदनशीलता कैसे

• योजना बनाते समय यह ध्यान रखा जाए कि इससे महिलाओं पर सकारात्मक असर होगा।

• महिलाओं की आवाज सुनी जायेगी। • योजना के क्रियान्वयन में महिलाओं की भागीदारी होगी ।

• शिक्षा, लालन पालन स्वास्थ्य के अवसर समान रूप से (लड़कियों को लड़को के समानबिना भेदभाव के) उपलब्ध होगें • नारी की शरीर के रूप में नही अपितु व्यक्ति के रूप में पहचान होगी ।

• नारी को अपनी क्षमताओं के अनुसार विकसित होने के समान अवसर प्राप्त होगें

संवेदनशील सुशासन

जा

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संवेदनशील सुशासन सदैव जन सेवा के लिये समर्पित रहता है । फाइलो में बंधता नही । फाइलों में चेहरा नही दिखता दुखः नही दिखता । संवेदनशील सुशासन लोगों की कठिनाइयां को दूर करने कसे तत्पर रहता है। क्या करें ?

• लोगों से सतत सम्र्पक बनाये

• भेदभाव विहीन व्यवहार व र्निणय करें ।

● लेगों के विचारों एवं अनुभवों को महत्व दें ।

• व्यवहार में शालीनता / समानता दिखायें फि

• स्वके हितों को प्राथमिकता दें।

• योजना निर्मााण में लोगों की राय लें

• आपात समय व परिस्थिति में लोगों की विशेश मदद करें ।

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