आपदा प्रबंधन DISASTER MANAGEMENT

आपदा प्रबंधन भी अन्य प्रबंधनों की तरह ही महत्वपूर्ण है। बल्कि कुछ ज्यादा ही क्योंकि आपदा बता नहीं आती। कभी भी कही भी आती है और हमारी असावधानी और असुरक्षा का लाभ उठाकर कई गुना सारक क्षमता से तबाही मचाती है। बाद, सूखा, भूकम्प, अग्नि चक्रवात, सुनामी, जैसी प्राकृतिक आपदाओं पर कर किसी का वश नहीं चलता।

आपदा प्रबंधन

प्राकृतिक आपदाओं के कारण अक्सर बुनयादि सुविधाएं ट्रेन, बस, टेलिफोन. मोबाईल, सड़क से सम्पर्क टूट जाता है और मानव जाति पर ऐसा भयंकर दुधगाव पड़ता है इससे उबरने में पीढ़ियां लग जाती है। ऐसा लगता है, मानो सब लुट गया हो और समय रूक गया हो।

प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता है, परन्तु पूर्वानुमान और पूर्व तैयारी से इसे कम किया जा सकता है। आपदा प्रबंधन को लेकर समाज और सरकार के स्तर पर तैयारी और सामंजस्य की कमी के कारण प्राकृतिक आपदाओं से अन्य देशों की अपेक्षा हमारे देश में ज्यादा जन एवं धन की हानि होती है।

सरकार ने अपने स्तर पर आपदा प्रबंधन के कुछ समूह गठित किये है जो आपदायें आने पर बचाव कार्य में जुट जाते है एवं जनजीवन को सामान्य करते हैं।

हमें अपने स्तर आपदाओं से निपटने हेतु सुरक्षा उपाय अपनाना चाहिये एवं विभिन्न प्रकार की आपदाओं से किस प्रकार निपटा जाये इसके बारे में मालूम होना चाहिये जिससे जन एवं धन की हानि कम कर सकते हैं।

सामान्य सावधानियां :

एक आपातकालीन किट हमेशा तैयार रखें। इसमें प्राथमिक चिकित्सा सामग्री, सूखे मेवे जो जल्दी खराब न हों, पानी शुद्ध करने वाली टिकिया, चादरें बच्चे-बूढ़ों की जरूरत की चीजें, चाकू सहित उपयोग औजार, बैटरी, टॉर्च, स्कू ड्राइवर, रस्सी गोन्द वाले टेप और बैटरी से चलने वाला रेडियो शामिल हो।

परिचय वाले कागजात, वित्तीय दस्तावेजों, जन्म प्रमाण-पत्र, पासपोर्ट आदि को एक स्थान पर सुलभ

रखें। यह भी उपयुक्त होगा कि ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रमाणित फोटो प्रतियां किसी वैकल्पिक

स्थान पर अथवा भरोसेमंद मित्र / संबंधी के पास रखें। ६. परिवार के वयस्क सदस्यों को बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा और कृत्रिम स्वास देने के काम में प्रशिक्षण दिलाना उपयुक्त रहेगा। 2. चौकस रहे और अपने आसपास के पीड़ितों की हर सम्भव सहायता करें। ऐसा कुछ भी न करें जिससे राहत और बचाव कार्यों में बाधा पैदा हो।

कोविड महामारी :

  1. सम्पूर्ण विश्व वर्ष 2020 से कोरोना महामारी से जूझ रही है भारत में इस महामारी के दो दौर में अपार जनहानी भुगत चुका है। इस दौरान सम्पूर्ण लॉकडोंउन के कारण देश आर्थिक रूप से थम गया था।
  2. कोविड महामारी और लॉक डाउन के समय ग्राम पंचायत के क्षरा का चयन किया गया था। ग्राम पंचायत के द्वारा ग्राम में आइसोलेशन सेंटर बनना, सैनिटाइजेशन कराना, सामाजिक दूरी का पालन, कोविड मरीजों का इलाज आदि कार्य किये गये थे।
  3. इसी प्रकार ग्राम पंचायतों के द्वारा वैक्सीनेशन कार्य में भी बढ़ चढत्र कर कार्य किया था।
  4. भविष्य में यह महामारी दोबारा न फैले इसके लिये ग्राम में सामाजिक दूरी का पालन कराना, मास्क का इस्तेमाल, सेनीटाइजेशन, वेक्सीनेशन कराया जाना आदि कार्य कराना होगा।
  5. अफरा-तफरी न मचाएँ, शान्त रहे एवं निर्देशों का पालन करें, अफवाहों पर ध्यान न दें। परिवार के लिए पहले से ही एक आपातकालीन योजना बनाएँ और यह भी सुनिश्चित करें कि परिवार के हर सदस्य को इसकी जानकारी हो।
  6. घर से निकलने के दो रास्ते बनाऐं यह तय कर रखें कि अगर परिवार के लोग बिछड़ गय तो कहाँ मिलेंगे। एक समान सम्पर्क व्यक्ति या परिवार का नाम तय कर लें।
  7. सुनिश्चित करें कि परिवार का हर सदस्य आपातकालीन सम्पर्क नम्बर जैसे- पुलिस, अस्पताल, एम्बुलेंस, अग्निशमन सेवा, आतंक विरोधी दस्ते आदि के बारे में जाने और उसे यह भी मालूम हो कि इन्हें मदद के लिए कैसे बुलाया जाता है।

भूकम्प

  1. अपनी इमारत की संरचना की इंजीनियरों द्वारा जाँच कराएं और यदि सम्भव हो तो भाग को मजबूत कराएँ। घर में गीजर, बड़े फेम वाले फोटो, आइने वगैरह ऐसे स्थान पर गिरकर किसी को घायल कर सकें।
  1. भूकम्प के समय आपकी सबसे बढ़िया प्रतिक्रिया होगी कि निकल भागे, ओट में का खड़े रहें जमीन पर लेट जाएं. किसी मजबूत [मेल या बेड के नीचे छिप जाएं, घुटनों पर सिर रख सिर हाथों से ढक लें।
  2. अगर उपलब्ध हो तो अपना सिर तकिए से ढक लें। अगर धारा में कोई या देठ आदि ओट लेने को न हो तो दरवाजे के बीच खड़े हो और भूकम्पका करें खिड़कियों, लटकने और गिर सकने वाली भारी वस्तुओं से दूर रहें इमारत से बाहर भी निकले ज भूकम्प रुक जाये।
  3. अगर आप घर से बाहर हैं तो बिजली के तारों, भवन की बाहरी दीवारों, गली, मस्तियों और पेड़ों से दूर रहें।
  4. किसी इमारत के पास न खड़े हो क्योंकि वह गिर सकती है। यदि आप किसी चलती गाड़ी में हैं तो इमारत.. दीवार और पेड़ से दूर ठहर जायें।

बाढ़

Flooding
Flooding
  1. उन ऊँची जगहों की पहचान करें जहाँ आप के समय पनाह ले सकते हैं।
  2. जब तक बहुत जरूरी न हो, बाद के पानी में न घुसें पानी की गहराई का पता करें और किसी लाठी से जमीन की मजबूती मालूम कर लें।
  3. जहाँ बिजली के तार गिरे हों. उधर मत जायें।
  4. अपनी गैस और बिजली की सप्लाई बन्द कर दें।
  5. बिजली के उपकरणों का स्विच बन्द कर दें।
  6. बाढ़ के बाद अक्सर जल जनित रोग फैलते हैं।
  7. उनसे बचने के उपाय करें।

आग

  1. सुनिश्चित करें कि आपका मकान / पड़ोस ज्यादा से ज्यादा आग से सुरक्षित हो
  2. सुनिश्चित करें कि आग बुझाऊ यन्त्र चालू हालत में हों।
  3. पड़ोस में न तो रिसने वाली गैस पाइप हो और न ही चटखी हुई बिजली की तारें
  4. अनुमति से अधिक बिजली न खींचे
  5. ज्वलनशील सामग्री सुरक्षित स्थान पर रखें।
  6. सम्भव हो तो स्मोक डिटेक्टर लगाएं जो धुआं निकलते ही संकेत देता है।
  7. ज्वलनशील पदार्थ बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
  8. गैस सिलिंडर से गैस चूल्हा ऊँचाई पर हो।
  9. गैस स्टेण्ड अवश्य बनावे और रोशनदान हो।
  10. घर / इमारत में आग से बचने का रास्ता तय करें।
  11. अपने पड़ोस में आप सुरक्षा अभ्यास करें।
  12. आग लगने पर अपने मुंह को भीगे तौलिये से ढकॅ ताकि धुआं असर न करे
  13. घर के अन्दर आग अगर तेज हो तो उस से बचने के लिए भागते समय रेंग कर निकलें, क्योंकि ऊपर जहरीली गैसें धुआं हो सकता है।
  14. अगर कपड़ों में आग लग जाए तो भागने की बजाये, आग बुझाने के लिए जमीन पर लुढ़कें।
  15. जब तक सुरक्षित होने की घोषणा न की जाए, तब तक इमारत में प्रवेश न करें।
  16. जले भाग को ठंडक पहुंचाएं और तत्काल विशेष प्राथमिक उपचार लें।

समुद्री तूफान

  1. समुद्री तूफान के मौराम से पहले ही दरवाजों-खिड़कियों की मरम्मत कराएं, मकान की छत ठीक करायें, सूखे पेड़ हटवा दें और पुराने जर्जर भवन ढहा दें।
  2. आपातकालीन किट तैयार रखें, जिसमें पानी, खाना, टॉर्च, रेडियो, बैटरियों, आपातकालीन दवाएँ और औजार सुलभ हो।
  3. तूफान आए तो मकान के अन्दर चले जायें या विशेष शरण स्थलों में पनाह लें।
  4. सभी खिड़कियां-दरवाजे बन्द कर लें।
  5. टीन या नुकीले औजार जमीन पर पड़ा रहने दें।
  6. जब तक खतरा न टले बाहर न निकलें।

आपदा प्रबंधन विषय

म.प्र. पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 में दिये गये। प्रावधान ग्राम सभा की शक्तियाँ एवं कृत्य

ग्राम सभा की शक्तियों एवं कार्यो में आपदा प्रबंधन के विषय में धारा उपखण्ड (ख) में “आग की रोकथाम, आग बुझाने और ऐसे आग लग जाने पर संपत्ति की सुरक्षा करने के लिए रक्षा समिति की स्थापना करना” उल्लेखित है। 7 की उपधारा (

ग्राम सभा की “ग्राम विकास समिति”

अधिनियम की धारा 7-के के लिए स्थाई समितियों के गठन कार्य दागियों से संबंधि “मध्यप्रदेश ग्राम सभा (समितियों के सम्मिलन, कामकाज के संचालन की प्रक्रिया तथा संबद्ध विषय) नियम 2005 बनाया गया है। जिसके अनुसार नियम 13.2 (8) में ग्राम विकास समिति को समनुदेशित विषय “ग्राम की सुरक्षा जैसे कि जीवन तथा संपत्ति की सुरक्षा, बाद, सूखा, भूकंप, आदि के कारित कृष्ट में राहत से संबंधित कार्य दिया गया है। आपदा प्रबंधन के विषय में धारा

7 की उपधारा (जज) के उपखण्ड (ख) में “आग की रोकथाम, आग बुझाने और ऐसे आग लग जाने पर संपत्ति की सुरक्षा करने के लिए, रक्षा समिति की स्थापना करना” उल्लेखित है।

जनपद एवं जिला पंचायत की “सामान्य प्रशासन समिति” जनपद एवं जिला पंचायत की स्थायी समिति सामान्य प्रशासन समिति को सौंपे गये विषयों में बाद, सूखा, भूकम्प, ओलावृष्टि, दुर्भिक्ष, टिड्डी दल तथा अन्य ऐसी आपतिक स्थितियों से उत्पन्न होने वाली आपदाओं से राहत” को शामिल किया गया है।

जनपद पंचायत के कृत्य

अधिनियम की धारा 50 की उपधारा 1 कंडिका (ख) के अनुसार “आग, बाद, सूखा, भूकम्प, दुर्भिक्ष, टिड्डीदल, महामारी, और अन्य प्राकृतिक आपदाओं में आपतिक सहायता की व्यवस्था करना उल्लेखित है।

निष्कर्ष एवं भविष्य में उठाये जाने वाले कदम

आपदा प्रबंधन की आवश्यकता और गंभीरता को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में अधिनियम में उल्लेखित प्रावधान पर्याप्त नहीं है। अधिनियम में बहुत ही संक्षिप्त में ही आपदा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को शामिल कर लिया गया है। इसके लिए निम्न सुझाव है।

  • ग्रामसभा, ग्राम पंचायत, जनपद एंव जिला पंचायत स्तर पर आपदा प्रबंधन की जबावदेही सुनिश्चित करने से संबंधित प्रावधानों को शामिल करना ।
  • आपदा प्रबंधन के लिए संसाधनों की उपलब्धता व्यवस्था करना।
  • पंचायत प्रतिनिधियों एवं शासकीय अधिकारियों/कर्मचारियों की क्षमता वृद्धि के लिए प्रशिक्षण की
  • ग्राम पंचायत स्तर पर आपदा प्रबन्धन समिति बनाकर सक्रिय की जाये जो ग्रामीणों को जागरूक करें।

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