डिजाइन Design

हम एक ही उत्पाद जैसे कार, टीवी, फर्नीचर आदि के विविध रूप बाजार में देखते हैं, जो एक दूसरे से काफी अलग दिखते हैं। यदि उत्पादों की संचालन क्षमता और गुण एक जैसे हो और मूल्य तुलनात्मक हो तो उत्पाद की डिजाइन से ही उसका चयन निर्धारित होता है। यदि समानता न हो तो भी कोई व्यक्ति सिर्फ इसलिए एक महंगे उत्पाद को ले सकता है, क्योंकि उसकी डिजाइन, रंग आदि उसे पसंद आ जाते हैं।

कहने का अर्थ यह है कि किसी उत्पाद की डिजाइन, रंग आदि उस उत्पाद की बाजार मांग को बहुत हद तक प्रभावित करते हैं, इसलिए यदि आपके उत्पाद की बाहरी डिजाइन और साज-सज्जा दूसरों से अलग हैं और इससे आपको लाभ हो रहा है तो आपको इसे संरक्षित करना चाहिए। यह सुरक्षा भारत में लागू डिजाइन एक्ट 2000 के माध्यम से प्रदान की गई है।

एक्ट के अनुसार डिजाइन का अर्थ है आकार, कॉन्फिगरेशन, पैटर्न, सजावट और रेखाओं व रंगों का संयोजन जो किसी वस्तु में दिआयामी या त्रिआयामी या दोनों तरह से किया गया हो। यह कार्य औद्योगिक प्रक्रिया, मानवीय, मैकेनिकल या रासायनिक तरीके से अलग-अलग या एक साथ किया गया हो सकता है। इस कार्य का अंदाजा सिर्फ देखने से लगाया जा सकता है, इसमें किसी मैकेनिकल डिवाइस की संरचना का कोई आभास नहीं मिलना चाहिए। डिजाइन के संचालन सम्बन्धी

पहलू इस एक्ट में शामिल नहीं है।

‘डिजाइन’ के रजिस्ट्रेशन की अवधि

रजिस्टर्ड डिजाइन की अवधि 15 वर्ष है। प्रारम्भ में दस वर्ष की अवधि की अनुमति दी जाती है, इसे दस वर्ष की अवधि समाप्त होने से पहले 2000 रु. शुल्क और निर्धारित आवेदन देकर अगले पांच वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता

है। भारत में डिजाइन आवेदन का शुल्क रू. 100000 है।

केन्द्र के माध्यम से अभी तक डिजाइन हेतु 2 आवेदन किए जा चुके है।

डिजाइन पंजीकरण करने के लिये निम्न पते पर आवेदन कर सकते हैं:

पेटेंट ट्रेडमार्क एवं डिजाइन नियंत्रक, पेटेंट कार्यालय, बौद्धिक सम्पदा भवन. एस. एम. रोड, एनटॉप हिल्स पोस्ट ऑफिस के पास, एनटॉप हिल्स, मुम्बई 400037

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