कार्य हेतु अंशदान एवं अभिसरण (कनवरर्जेस)

कार्य हेतु अंशदान

कार्यों हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर अंशदान की अनिवार्यता नहीं होगी। किंतु ग्राम पंचायत द्वारा अंशदान अस्वीकार नहीं किया जावेगा। यह अंशदान पंचायत के रिसोर्स एनवलप का भाग होगा ग्राम पंचायतें इस अंशदान का उपयोग उन कार्यों के निष्पादन में गेप फिलिंग के लिये कर सकेंगी जहाँ अन्य मद उपलब्ध ना हो या उनका उपयोग अनुमत्य ना हो। ग्राम पंचायत द्वारा नागरिकों को अंशदान हेतु प्रोत्साहित किया जायेगा।

अभिसरण (कनवरर्जेस)

ग्राम पंचायतों को अपने रिसोर्स एनवलप में प्राप्त होने वाली राशियों के मध्य अभिसरण को प्रोत्साहन करना चाहिए ताकि संसाधनों की एकजुटता से अधिक परिणाममूलक कार्य संपादित हो सकें एवं परिसंपत्तियों का निर्माण हो सकें। पंचायतों को कार्य की प्रकृति अनुसार कनवरजेंस हेतु समय-समय पर जारी निर्देश प्रभावी रहेंगे। प्रमुखतः निम्न योजनाओं से कनवरजेंस किया जा सकेगा।

मनरेगा से

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) संसद द्वारा सन 2005 में पारित किया गया। यह अधिनियम देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिन मजदूरी रोजगार का अधिकार प्रदान करता है।

मनरेगा के प्रमुख उद्देश्य हैं –

ग्रामीण कामगारों को / मजदूरों को अकुशल रोजगार प्रदान करना।

ग्रामीण आजीविका का संवर्धन करने के लिए मूलभूत संरचनाओं का निर्माण करना। आंतरिक व्यवस्थाओं के माध्यम से पारदर्शिता और जिम्मेदारी को बढ़ावा देना।

सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण के लिये विशेषतः ग्रामीण सड़क तथा सी.सी. रोड निर्माण । योजनांतर्गत पात्र परिवारों के लिये आजीवका के साधन जैसे कपिलधारा कूप, नंदन फलोद्यान, पशुशेड आदि ।

प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन जैसे मेढ़ बंधान आदि।

पंचायत भवन निर्माण ।

स्वच्छ भारत मिशन 

व्यक्तिगत शौचालय

व्यक्तिक पारिवारिक शौचालय समस्त बी.पी.एल. परिवार, समस्त अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए, लघु एवं सीमांत कृषक, आवास योजनार्न्तगत भूमिहीन मजदूर, विकलांग एवं महिला मुखिया के आवास ।

व्यक्तिक आवासीय शौचालय की लागत 10,000 से बढ़ाकर 12,000 की गई।

व्यक्तिक आवासीय शौचालय के लिए केन्द्रान्स की राशि रु. 9000 (75 प्रतिशत) एवं राज्यांश राशि रु. 3000 (25 प्रतिशत)। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र, जम्मू एवं कश्मीर और राज्य की विशेष परिस्थितियों में केन्द्रान्स एवं राज्याश (90:10 ) होगा।

TEC गतिविधीयों के लिये कुल परियोजना लागत की 8 प्रतिशत राशि सुनिश्चित, जिसमें 3 प्रतिशत राशि केन्द्रीय स्तर पर एवं 5 प्रतिशत का उपयोग राज्य स्तर पर आई ई सी / आई पी सी संबधित संचार एवं क्षमता निर्माण पर व्यय ।

कुल परियोजना लागत का 2 प्रतिशत प्रशासनिक व्यय ।

. स्कूल शौचालय – स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा तैयार करना ।

आंगनवाडी शौचालय महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा तैयार करना।

व्यवहार परिवर्तन या सशक्त बनाने के लिये सूचना, शिक्षा एवं संचार की गतिविधियां आयोजित करना एवं अन्तर्वैयक्तिक संचार से प्रेरित करना। निर्मित शौचालय एवं उपयोग किये जाने वाले शौचालयों का निरीक्षण करना।

स्वच्छ भारत

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन

ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सामान्य जीवन स्तर में सुधार लाना । कम लागत में निर्मित एवं उपयोग में आसान तकनीकी के शौचालय और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन

की नवीनतम विधि का प्रावधान।

अपशिष्ट के वैज्ञानिक निपटान के लिये तंत्र विकसित करना।

ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (SLWM) के लिए 150 परिवारों की पंचायतो को 7 लाख रु. 300 परिवारो की पंचायतो को 12 लाख रु.500 परिवारो की पंचायतो को 15 लाख रु. एवं 500 से अधिक परिवारो की पंचायतो को 20 लाख रु., की वित्तीय सहायता प्रदान करना। जिसमें केन्द्र एवं राज्य का अनुपात 75 : 25 का होगा, अतिरिक्त लागत आवश्यकतानुसार राज्य या ग्राम पंचायत वहन करेगी।

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