73rd Constitutional Amendment : 73वें संविधान संशोधन की खास बातें |

73rd Constitutional Amendment : भारतीय संविधान के अनुच्छेद 40 की मूलभावना के अनुसार देश के ग्रामीण इलाकों, विशेष रूप से गांव में पंचायतों को स्वराज की ईकाई के रूप में स्थापित करने के लिए वे संविधान संशोधन में कुछ खास प्रावधान बनाये गये हैं जो इस प्रकार है।

73rd Constitutional Amendment : 73वें संविधान संशोधन की खास बातें

  1. प्रदेश से नीचे जिला विकासखण्ड तथा ग्राम स्तर पर पंचायतों का गठन किया जायेगा।
  2. ये पंचायतें संसद तथा विधानसभा की तरह वैधानिक संस्था होगी।
  3. ग्राम स्तर पर ग्राम तथा पंचायत के मतदाताओं को मिलाकर ग्राम सभा का गठन होगा।
  4. ग्राम सभा को भी संवैधानिक दर्जा प्राप्त होगा।
  5. संसद तथा विधानसभाओं की तरह 5 साल में पंचायतों के चुनाव होंगे।
  6. पंचायतों के स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए राज्य स्तर पर एक स्वायत्तशासी राज्य चुनाव आयोग का गठन होगा।
  7. पंचायतों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के उपाय और सिद्धांतों से सुझाव हेतु हर प्रदेश में राज्य वित्त आयोग का गठन होगा।
  8. पंचायतों का प्रमुख कार्य यह होगा कि वे सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करते हुये अपनी पंचायत क्षेत्र के आर्थिक विकास की योजना तैयार करें तथा इसे कियान्वित करें।
  9. पंचायतों के काम को पंचायत की 11वीं अनुसूची में स्पष्ट किया ग्राम सभा का महत्व गया है।
  10. इसके अनुसार पंचायतों के कार्यक्षेत्र में 29 विषय शामिल है।
  11. पंचायतों के कामकाज में समाज के कमजोर वर्गों एवं महिलाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए पद और स्थान दोनों में इन वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है।

त्रिस्तरीय पंचायतराज संरचना

जिला पंचायत

जनपद पंचायत

ग्राम पंचायत

त्रिस्तरीय पंचायतराज संरचना संवैधानिक महत्व

प्रत्येक 5 वर्ष में पंचायत चुनाव

राज्य वित्त आयोग

सामाजिक न्याय एवं आर्थिक विकास

वंचित वर्गों एवं महिलाओं की सहभागिता सुनिश्चिता करने हेतु आरक्षण का प्रावधान

जैसा कि हम सब जानते है कि पंचायत राज व्यवस्था में ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत होती है। इस अधिनियम के अनुसार गांवों में ग्राम पंचायत के गठन का प्रावधान है, वहीं ब्लॉक स्तर पर जनपद पंचायत और जिला स्तर पर जिला पंचायत के गठन का प्रावधान है।

साथ ही अधिनियम में अलग-अलग स्तर की तीनों पंचायतों के कार्यों और भूमिकाओं को भी स्पष्ट किया गया है। मध्यप्रदेा पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 49, 50 एवं 62 में त्रिस्तरीय पंचायतों के कार्यों का उल्लेख किया गया है. जो आगे विस्तार से बताएं गए हैं।

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